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Yamuna Nagar News: इंकलाब मंदिर में की जाती है बलिदानियों की पूजा

Mon, 23 Mar 2026 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 23 Mar 2026 12:20 AM IST
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Martyrs are worshipped at the Inquilab Temple
 बलिदानियों को नमन करते इंकलाब मंदिर के संस्थापक। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। देशभर में भगवानों के अनगिनत मंदिर हैं, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं यमुनानगर के गांव गुमथला राव में स्थित एक मंदिर अपनी अनूठी पहचान के कारण विशेष महत्व रखता है। यहां किसी देवी-देवता की नहीं, बल्कि देश के बलिदानियों की पूजा की जाती है।
यह मंदिर इंकलाब मंदिर के नाम से देशभर में जाना जाता है और यहां दूर-दूर से लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं। शहीद दिवस के अवसर पर इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस मंदिर की विशेषता इसकी पूजा पद्धति में भी देखने को मिलती है। यहां पारंपरिक आरती या पूजा नहीं होती, बल्कि प्रतिदिन देशभक्ति के गीत गूंजते हैं।
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श्रद्धालु शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं और अमर शहीद अमर रहें जैसे नारों से वातावरण गूंज उठता है। बीते करीब 26 वर्षों से यह परंपरा निरंतर निभाई जा रही है, जो नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की भावना से जोड़ने का काम कर रही है। इंकलाब मंदिर की स्थापना वर्ष 2000 में हरियाणा एंटी करप्शन सोसायटी द्वारा की गई थी।
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इसके संस्थापक अधिवक्ता वरयाम सिंह बताते हैं कि इस मंदिर की प्रेरणा उन्हें अपने छात्र जीवन में मिली थी। जब वह दसवीं कक्षा में थे, तब उन्होंने शहीदों पर आधारित एक फिल्म देखी, जिससे वे गहराई से प्रभावित हुए। उसी समय उनके मन में विचार आया कि जिस प्रकार देवी-देवताओं के मंदिर हैं, उसी तरह देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीरों के लिए भी एक ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां लोग उनकी कुर्बानियों को याद कर सकें।
उन्होंने बताया कि मंदिर की स्थापना के पीछे उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ना भी है। इसी सोच के तहत मंदिर परिसर में समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इंकलाब मंदिर केवल श्रद्धा का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभियान का भी हिस्सा बन चुका है।

यहां से वीर शहीदों के शहीदी दिवस पर अवकाश घोषित करने, उनके चित्रों वाले कैलेंडर और सिक्के जारी करने जैसी पहलें शुरू की गई थीं, जिनमें सफलता भी मिली। अब मंदिर प्रबंधन देश के वीर शहीदों और क्रांतिकारी वीरांगनाओं को संवैधानिक रूप से शहीद का दर्जा दिलाने की मांग उठा रहा है। मंदिर से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि सरकार उनकी इस मांग को गंभीरता से लेकर जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी, ताकि देश के इन सच्चे नायकों को उनका उचित सम्मान मिल सके।
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