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मासूम को आंचल देने के लिए आगे आईं कई ‘माताएं’
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। अविवाहित नाबालिग लड़की ने बॉथरूम में जन्म देकर जिस बच्चे को छत पर फेंका था, उसे अपनी ममता का आंचल देने के लिए कई मां आगे आई हैं। कई महिलाओं ने चाइल्ड लाइन औप अमर उजाला कार्यालय में फोन करके बच्चे को गोद लेने की इच्छा जताई। हालांकि बच्चा अभी पीजीआई में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। उसकी हालत अभी भी गंभीर में बनी है।
एक दंपती ने बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में फोन कर नवजात को गोद लेने की बात कही। पति का अपना कारोबार है और पत्नी सरकारी नौकरी में है। बच्चे को परिवार मिल जाएगा, जिससे उसकी परवरिश अच्छी होगी। वहीं एक दंपती ने कहा कि उनके पास कोई बच्चा नहीं है और वह इसे अपनाने को तैयार हैं। जगाधरी के एक महिला का कहना है कि वे साधन संपंन हैं, लेकिन घर में बच्चे की किलकारी नहीं है। ऐसे में वे इस बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया अपना रहे हैं।
चाइल्ड लाइन निदेशिका डॉ. अंजू वाजपेयी ने कहा कि तीन दिन में उनके पास भी कई लोगों ने फोन करके बच्चा गोद लेने की इच्छा जताई हैं। यह अच्छी बात है कि लोग इतने जागरूक और संवेदनशील हैं, लेकिन यह कानूनी प्रक्रिया है। पहले बच्चे के मां-बाप व दोनों परिवारों की काउंसलिंग की जाएगी। यदि वह बच्चा नहीं रखते हैं तो इसके लिए सरेंडर डीड बनाई जाएगी। इसके बाद बच्चे को शिशु गृह भेज दिया जाएगा। इस दौरान मां-बाप को दो महीने अपने फैसले पर विचार करने का समय भी दिया जाएगा। इस दौरान वे बच्चा रखने को राजी होते हैं तो काउंसलिंग कर कानूनी प्रक्रिया के साथ उन्हें बच्चा वापस दे दिया जाएगा। बच्चा नहीं लेते तो उसे शिशु गृह में भेज दिया जाएगा। बच्चा गोद देने की प्रक्रिया सेंट्रल एडॉप्शन रिर्सोस अथॉरिटी की साइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसकी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।
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नाबालिग मां के खिलाफ केस पर चाइल्डलाइन का एतराज
कहा कि बिना काउंसलिंग नाबालिग पर केस करना ठीक नहीं
किशोरी को गर्भवती बनाने वाला पुलिस गिरफ्त से बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। बॉथरूम में बच्चे को जन्म देकर छत पर फेंकने के मामले में पुलिस ने नाबालिग प्रसूता के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। पुलिस ने उस फैक्टरी मालिक की शिकायत पर के दर्ज किया है, जिसकी छत पर बच्चा मिला था। नाबालिग पर केस दर्ज किए जाने का चाइल्ड लाइन व चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने एतराज जताया है।
चाइल्ड लाइन की निदेशिका डॉ. अंजू वाजपेयी का कहना है कि बिना काउंसलिंग के इस तरह नाबालिग पर केस दर्ज करना ठीक नहीं है। हालांकि बच्चा पैदा कर फेंकने पर कानून में केस का प्रावधान है, लेकिन यह बालिग पर लागू होता है। नाबालिग के मामले में पुलिस को चाइल्ड लाइन व चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के साथ विचार करना होता है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जब केस दर्ज किया था, उस समय उसकी आयु स्पष्ट नहीं थी। वहीं परिवारवाले शुरूआत से प्रसूता के नाबालिग होने का दावा कर रहे थे।
चाइल्ड लाइन निदेशिका डॉ. अंजू वाजपेयी का कहना है कि जब पुलिस को प्रसूता की सही आयु का पता नहीं था, तो केस किस आधार पर किया। वहीं जब महिला ने उसकी नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने व गर्भवती करने की शिकायत पुलिस को दी तो केस दर्ज किया ही नहीं जाना चाहिए था। डॉ. वाजपेयी ने कहा कि बच्चा फेंकने का केस तो बनता है, लेकिन चूंकि यहां प्रसूता नाबालिग है और शारीरिक व मानसिक शोषण का शिकार है। ऐसे में पुलिस को उसकी काउंसलिंग तक इंतजार करना चाहिए था। साथ ही चाइल्ड लाइन व चाइल्ड वेलफेयर से इसके बारे चर्चा करनी चाहिए थी।
डर से सहम गई थी किशोरी
किशोरी की मां ने बताया कि वे मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और यहां किराए पर रहते हैं। उसके बेटा दोस्त राजकुमार उनके घर आता था। वह उनकी बेटी से बात करता था। पिछले साल राजकुमार उसकी बेटी को घूमाने के बहाने टाउन पार्क ले गया और उससे दुष्कर्म किया। इस बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद कई बार धमका कर दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। इस पर उसकी बेटी ने राजकुमार से शादी करने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया। जब बेटी ने बताया कि वह गर्भवती है तो उसने धमकी दी कि यदि उसने किसी को उसका नाम बताया तो वह उसे, उसके भाई व पिता को जान से मार देगा, जिससे वह डरी सहमी रही
महिला की शिकायत पर किशोरी से दुष्कर्म करने, जान से मारने की धमकी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर किया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दर जा रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। नाबालिग मां पर बच्चा फेंकने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। कानून में इसका प्रावधान है, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई है। -नरेंद्र सिंह, प्रभारी थाना शहर जगाधरी
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यमुनानगर। अविवाहित नाबालिग लड़की ने बॉथरूम में जन्म देकर जिस बच्चे को छत पर फेंका था, उसे अपनी ममता का आंचल देने के लिए कई मां आगे आई हैं। कई महिलाओं ने चाइल्ड लाइन औप अमर उजाला कार्यालय में फोन करके बच्चे को गोद लेने की इच्छा जताई। हालांकि बच्चा अभी पीजीआई में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। उसकी हालत अभी भी गंभीर में बनी है।
एक दंपती ने बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में फोन कर नवजात को गोद लेने की बात कही। पति का अपना कारोबार है और पत्नी सरकारी नौकरी में है। बच्चे को परिवार मिल जाएगा, जिससे उसकी परवरिश अच्छी होगी। वहीं एक दंपती ने कहा कि उनके पास कोई बच्चा नहीं है और वह इसे अपनाने को तैयार हैं। जगाधरी के एक महिला का कहना है कि वे साधन संपंन हैं, लेकिन घर में बच्चे की किलकारी नहीं है। ऐसे में वे इस बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया अपना रहे हैं।
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चाइल्ड लाइन निदेशिका डॉ. अंजू वाजपेयी ने कहा कि तीन दिन में उनके पास भी कई लोगों ने फोन करके बच्चा गोद लेने की इच्छा जताई हैं। यह अच्छी बात है कि लोग इतने जागरूक और संवेदनशील हैं, लेकिन यह कानूनी प्रक्रिया है। पहले बच्चे के मां-बाप व दोनों परिवारों की काउंसलिंग की जाएगी। यदि वह बच्चा नहीं रखते हैं तो इसके लिए सरेंडर डीड बनाई जाएगी। इसके बाद बच्चे को शिशु गृह भेज दिया जाएगा। इस दौरान मां-बाप को दो महीने अपने फैसले पर विचार करने का समय भी दिया जाएगा। इस दौरान वे बच्चा रखने को राजी होते हैं तो काउंसलिंग कर कानूनी प्रक्रिया के साथ उन्हें बच्चा वापस दे दिया जाएगा। बच्चा नहीं लेते तो उसे शिशु गृह में भेज दिया जाएगा। बच्चा गोद देने की प्रक्रिया सेंट्रल एडॉप्शन रिर्सोस अथॉरिटी की साइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसकी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।
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नाबालिग मां के खिलाफ केस पर चाइल्डलाइन का एतराज
कहा कि बिना काउंसलिंग नाबालिग पर केस करना ठीक नहीं
किशोरी को गर्भवती बनाने वाला पुलिस गिरफ्त से बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। बॉथरूम में बच्चे को जन्म देकर छत पर फेंकने के मामले में पुलिस ने नाबालिग प्रसूता के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। पुलिस ने उस फैक्टरी मालिक की शिकायत पर के दर्ज किया है, जिसकी छत पर बच्चा मिला था। नाबालिग पर केस दर्ज किए जाने का चाइल्ड लाइन व चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने एतराज जताया है।
चाइल्ड लाइन की निदेशिका डॉ. अंजू वाजपेयी का कहना है कि बिना काउंसलिंग के इस तरह नाबालिग पर केस दर्ज करना ठीक नहीं है। हालांकि बच्चा पैदा कर फेंकने पर कानून में केस का प्रावधान है, लेकिन यह बालिग पर लागू होता है। नाबालिग के मामले में पुलिस को चाइल्ड लाइन व चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के साथ विचार करना होता है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जब केस दर्ज किया था, उस समय उसकी आयु स्पष्ट नहीं थी। वहीं परिवारवाले शुरूआत से प्रसूता के नाबालिग होने का दावा कर रहे थे।
चाइल्ड लाइन निदेशिका डॉ. अंजू वाजपेयी का कहना है कि जब पुलिस को प्रसूता की सही आयु का पता नहीं था, तो केस किस आधार पर किया। वहीं जब महिला ने उसकी नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने व गर्भवती करने की शिकायत पुलिस को दी तो केस दर्ज किया ही नहीं जाना चाहिए था। डॉ. वाजपेयी ने कहा कि बच्चा फेंकने का केस तो बनता है, लेकिन चूंकि यहां प्रसूता नाबालिग है और शारीरिक व मानसिक शोषण का शिकार है। ऐसे में पुलिस को उसकी काउंसलिंग तक इंतजार करना चाहिए था। साथ ही चाइल्ड लाइन व चाइल्ड वेलफेयर से इसके बारे चर्चा करनी चाहिए थी।
डर से सहम गई थी किशोरी
किशोरी की मां ने बताया कि वे मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और यहां किराए पर रहते हैं। उसके बेटा दोस्त राजकुमार उनके घर आता था। वह उनकी बेटी से बात करता था। पिछले साल राजकुमार उसकी बेटी को घूमाने के बहाने टाउन पार्क ले गया और उससे दुष्कर्म किया। इस बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद कई बार धमका कर दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। इस पर उसकी बेटी ने राजकुमार से शादी करने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया। जब बेटी ने बताया कि वह गर्भवती है तो उसने धमकी दी कि यदि उसने किसी को उसका नाम बताया तो वह उसे, उसके भाई व पिता को जान से मार देगा, जिससे वह डरी सहमी रही
महिला की शिकायत पर किशोरी से दुष्कर्म करने, जान से मारने की धमकी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर किया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दर जा रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। नाबालिग मां पर बच्चा फेंकने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। कानून में इसका प्रावधान है, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई है। -नरेंद्र सिंह, प्रभारी थाना शहर जगाधरी