{"_id":"661c495202c1ee8bf80631f5","slug":"mans-destiny-is-impossible-without-woman-maheshashram-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-117396-2024-04-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"नारी के बिना पुरुष का भाग्य असंभव : महेशाश्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नारी के बिना पुरुष का भाग्य असंभव : महेशाश्रम
Mon, 15 Apr 2024 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 15 Apr 2024 02:53 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। शहर के श्री नागेश्वर धाम श्री दंडी स्वामी आश्रम पक्का घाट में रामनवमी के उपलक्ष्य में चल रही श्री राम कथा में दंडी स्वामी महेशाश्रम महाराज ने बताया कि गृहस्थ के जीवन में नारी शक्ति की सहायता के बिना पुरुष के भाग्य शक्ति का उदय होना असंभव है। इसीलिए शास्त्र में नारी को अर्धांगिनी कहा गया है।
उन्होंने बताया कि देव ऋषि नारद के प्रश्नों का उत्तर देते हुए ब्रह्मा ने बताया कि परमात्मा भी सगुण साकार रूप धारण करके जब जगत में आता है, तो वह भी सीता रूपी भक्ति से विवाह कर अपने अवतार के पूर्णता के लिए अपनी भार्या सीता को अपनी सहायिका बनाकर प्रस्तुत करता है। भगवती सीता पृथ्वी से उत्पन्न होने वाली आदिशक्ति के स्वरूप में महाराज जनक के पुत्री बनकर प्रकट हुई। भगवान श्री राम ने भगवती सीता का पानी ग्रहण कर मानव धर्म का प्रमाण प्रस्तुत किया।
मनुष्य को भगवान श्री राम के मर्यादित चरित्र का अनुसरण करते हुए नारी शक्ति को अबला नहीं अपने जीवन की सहायिका माननी चाहिए। महेशाश्रम ने बताया कि पुराणों में वर्णन है कि यंत्र पूज्यंते नारिका तत्र रमंते देवता, नारी, माता, पत्नी, पुत्री, बहन जिस रूप में भी हो उसे उचित सम्मान देते हुए अपने जीवन के सहायिका के रूप में स्थान देना चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आज हमारे समाज में कुछ विधर्मी मजहब एवं अनेकों अधर्मी संस्थाएं प्रगट हो गई है, जो नारी को सिर्फ बच्चा उत्पन्न करने वाली मशीन एवं भोग के समाग्री समझते हैं। ऐसे धर्म विरोधी संस्थाओं से सावधान रहते हुए अपने जीवन को भगवान श्री राम के मर्यादा के अनुरूप आचरण करते हुए अपने जीवन का कार्य संपादित करना चाहिए। तभी आपको मनुष्य जीवन का उद्देश्य प्राप्त हो सकता है।
विज्ञापन
रादौर। शहर के श्री नागेश्वर धाम श्री दंडी स्वामी आश्रम पक्का घाट में रामनवमी के उपलक्ष्य में चल रही श्री राम कथा में दंडी स्वामी महेशाश्रम महाराज ने बताया कि गृहस्थ के जीवन में नारी शक्ति की सहायता के बिना पुरुष के भाग्य शक्ति का उदय होना असंभव है। इसीलिए शास्त्र में नारी को अर्धांगिनी कहा गया है।
उन्होंने बताया कि देव ऋषि नारद के प्रश्नों का उत्तर देते हुए ब्रह्मा ने बताया कि परमात्मा भी सगुण साकार रूप धारण करके जब जगत में आता है, तो वह भी सीता रूपी भक्ति से विवाह कर अपने अवतार के पूर्णता के लिए अपनी भार्या सीता को अपनी सहायिका बनाकर प्रस्तुत करता है। भगवती सीता पृथ्वी से उत्पन्न होने वाली आदिशक्ति के स्वरूप में महाराज जनक के पुत्री बनकर प्रकट हुई। भगवान श्री राम ने भगवती सीता का पानी ग्रहण कर मानव धर्म का प्रमाण प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
मनुष्य को भगवान श्री राम के मर्यादित चरित्र का अनुसरण करते हुए नारी शक्ति को अबला नहीं अपने जीवन की सहायिका माननी चाहिए। महेशाश्रम ने बताया कि पुराणों में वर्णन है कि यंत्र पूज्यंते नारिका तत्र रमंते देवता, नारी, माता, पत्नी, पुत्री, बहन जिस रूप में भी हो उसे उचित सम्मान देते हुए अपने जीवन के सहायिका के रूप में स्थान देना चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आज हमारे समाज में कुछ विधर्मी मजहब एवं अनेकों अधर्मी संस्थाएं प्रगट हो गई है, जो नारी को सिर्फ बच्चा उत्पन्न करने वाली मशीन एवं भोग के समाग्री समझते हैं। ऐसे धर्म विरोधी संस्थाओं से सावधान रहते हुए अपने जीवन को भगवान श्री राम के मर्यादा के अनुरूप आचरण करते हुए अपने जीवन का कार्य संपादित करना चाहिए। तभी आपको मनुष्य जीवन का उद्देश्य प्राप्त हो सकता है।