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मनुष्य धरती पर सृष्टि का सिरमौर : साध्वी बबली
Mon, 04 Aug 2025 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:43 AM IST
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सत्संग के दौरान प्रवचन करतीं साध्वियां। आयोजक
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। व्यासपुर स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में संरक्षण प्रकल्प के उपलक्ष्य में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संस्थान की प्रचारक साध्वी बबली भारती ने कहा कि मनुष्य धरती पर सृष्टि का सिरमौर है।
उन्होंने बताया कि प्रकृति के पांच तत्वों से बना मानव सर्वश्रेष्ठ इसलिए नहीं है कि वो आजीवन केवल अपनी सुख सुविधाओं को उपलब्ध करवाने हेतु प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहे, बल्कि मानव तन की प्राप्ति करके हम प्रकृति को संरक्षित कर अपना ऋण उतार पाएं। वास्तविकता में प्रकृति का संरक्षण ही जीवन का संरक्षण है क्योंकि धरती पर जीवन तभी तक संभव है।
यदि हम भविष्य की संतति को सुरक्षित देखना चाहते हैं तो हमें अभी से ही प्रयास आरंभ करने होंगे। अधिक से अधिक पौधरोपण करना, जल संचय करना, सौर ऊर्जा,वायु ऊर्जा के द्वारा संचालित होने वाले कुदरती संसाधनों का प्रयोग करना ही हमारी दिनचर्या में सम्मिलित होना चाहिए। आज यदि अधिक गर्मी या शीत से संपूर्ण जीव जगत पीड़ित हो रहा है, तो उसका मूल कारण केवल प्राकृतिक असंतुलन है, जो केवल मानव की लापरवाही को ही दर्शाता है।
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व्यासपुर। व्यासपुर स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में संरक्षण प्रकल्प के उपलक्ष्य में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संस्थान की प्रचारक साध्वी बबली भारती ने कहा कि मनुष्य धरती पर सृष्टि का सिरमौर है।
उन्होंने बताया कि प्रकृति के पांच तत्वों से बना मानव सर्वश्रेष्ठ इसलिए नहीं है कि वो आजीवन केवल अपनी सुख सुविधाओं को उपलब्ध करवाने हेतु प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहे, बल्कि मानव तन की प्राप्ति करके हम प्रकृति को संरक्षित कर अपना ऋण उतार पाएं। वास्तविकता में प्रकृति का संरक्षण ही जीवन का संरक्षण है क्योंकि धरती पर जीवन तभी तक संभव है।
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यदि हम भविष्य की संतति को सुरक्षित देखना चाहते हैं तो हमें अभी से ही प्रयास आरंभ करने होंगे। अधिक से अधिक पौधरोपण करना, जल संचय करना, सौर ऊर्जा,वायु ऊर्जा के द्वारा संचालित होने वाले कुदरती संसाधनों का प्रयोग करना ही हमारी दिनचर्या में सम्मिलित होना चाहिए। आज यदि अधिक गर्मी या शीत से संपूर्ण जीव जगत पीड़ित हो रहा है, तो उसका मूल कारण केवल प्राकृतिक असंतुलन है, जो केवल मानव की लापरवाही को ही दर्शाता है।
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