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टमाटर ने किसानों को बनाया कर्जदार
अमर उजाला/ब्यूरो, यमुनानगर
Updated Mon, 30 Jun 2014 12:16 AM IST
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जठलाना में टमाटर के दामों में आई भारी गिरावट से टमाटर उत्पादक किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। टमाटर के बेहद कम दाम मिलने से टमाटर उत्पादक किसान और मजदूर कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।
जबकि टमाटर खरीदने वाले व्यापारी और दुकानदार किसान से सस्ते टमाटर खरीद कर बाजार में ग्राहकों को मंहगे दामों पर बेच रहे हैं।
इस कारण रादौर में इस बार हजारों एकड़ में टमाटर की खेती करने वाले किसान भारी घाटे में हैं। किसान टमाटर के दामों में आई भारी गिरावट के लिए व्यापारियों की आपसी मिलीभगत को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
टमाटर उत्पादक किसान जसबीर सिंह धौलरा, संजू सांगवान ने बताया कि पिछले वर्ष टमाटर की खेती किसानों के लिए वरदान बनकर आई थी।
पिछले वर्ष किसानों ने टमाटर की फसल से प्रति एकड़ एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक कमाया था। लेकिन इस बार टमाटर के दाम बेहद कम है।
जिस कारण किसानों को टमाटर की फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। टमाटर की प्रति एकड़ फसल उगाने पर लगभग 20 हजार रुपये खर्च आता है।
लेकिन टमाटर के बेहद कम दाम मिलने से उन्हें लागत मूल्य भी नहीं मिल पाया है। फतियाबाद, सिरसा, हिसार, दिल्ली जगह से रादौर क्षेत्र में टमाटर खरीदने के व्यापारी प्रतिदिन भारी संख्या में पहुंचते हैं।
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लेकिन व्यापारियों की मिलीभगत से किसानों का टमाटर कम दामों पर खरीदा जा रहा है। व्यापारी 25 किलो टमाटर की करेट मात्र 40 रुपये में खरीद रहे हैं।
इस प्रकार किसानों का टमाटर खेतों में डेढ़ से दो रुपये किलो बिक रहा है। लेकिन दुकानदार उसी टमाटर को बाजार में 10 से 12 रुपये किलो तक बेचकर मोटी रकम कमा रहे हैं।
सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार
भारतीय किसान यूनियन जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने कहा कि टमाटर के कम दामों के लिए सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार है।
सरकार की ओर से टमाटर की फसल के लिए कोई न्यूनतम मूल्य निर्धारित नहीं किया गया है। जिस कारण किसानों को टमाटर की फसल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं।
मजदूरों पर अर्थिक मार
रादौर क्षेत्र के लगभग 25 से अधिक गांव में किसान टमाटर की हजारों एकड़ में खेती करते हैं। क्षेत्र में टमाटर की फसल किसान और मजदूर मिलकर करते हैं।
टमाटर की फसल पर आने वाला खर्च किसानों तथा मजदूरों के बीच आधा-आधा बांट लिया जाता है। मजदूर टमाटर की फसल को लगाने से लेकर टमाटर की फसल को समेटने तक का सारा कार्य खुद करता है।
लेकिन इस बार टमाटर के फसल के दाम बेहद कम होने के कारण टमाटर की खेती से जुड़े मजदूरों पर भारी आर्थिक मार पड़ी है।
अधिकतर मजदूरों ने साहूकारों से मोटे ब्याज पर पैसा लेकर टमाटर की खेती में पैसा लगाया है। ऐसे में टमाटर की फसल के भारी नुकसान में जाने के कारण टमाटर की खेती से जुड़े मजदूरों और उनके परिवारों पर कर्ज का बोझ चढ़ गया है।
मजदूर सतपाल, फुलाराम, शेर सिंह, हंसराज, राकेश पासी, अनिल पासी ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर टमाटर की खेती में पैसा लगाया था।
वह सुबह से शाम तक अपने परिवारों के साथ टमाटर तोड़ने का काम करते हैं। लेकिन उन्हें टमाटर के अच्छे दाम मिलना तो दूर की बात रही उन्हें टमाटर तोड़ने की दिहाड़ी भी पूरी नहीं मिल पा रही है।
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जबकि टमाटर खरीदने वाले व्यापारी और दुकानदार किसान से सस्ते टमाटर खरीद कर बाजार में ग्राहकों को मंहगे दामों पर बेच रहे हैं।
इस कारण रादौर में इस बार हजारों एकड़ में टमाटर की खेती करने वाले किसान भारी घाटे में हैं। किसान टमाटर के दामों में आई भारी गिरावट के लिए व्यापारियों की आपसी मिलीभगत को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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टमाटर उत्पादक किसान जसबीर सिंह धौलरा, संजू सांगवान ने बताया कि पिछले वर्ष टमाटर की खेती किसानों के लिए वरदान बनकर आई थी।
पिछले वर्ष किसानों ने टमाटर की फसल से प्रति एकड़ एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक कमाया था। लेकिन इस बार टमाटर के दाम बेहद कम है।
जिस कारण किसानों को टमाटर की फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। टमाटर की प्रति एकड़ फसल उगाने पर लगभग 20 हजार रुपये खर्च आता है।
लेकिन टमाटर के बेहद कम दाम मिलने से उन्हें लागत मूल्य भी नहीं मिल पाया है। फतियाबाद, सिरसा, हिसार, दिल्ली जगह से रादौर क्षेत्र में टमाटर खरीदने के व्यापारी प्रतिदिन भारी संख्या में पहुंचते हैं।
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लेकिन व्यापारियों की मिलीभगत से किसानों का टमाटर कम दामों पर खरीदा जा रहा है। व्यापारी 25 किलो टमाटर की करेट मात्र 40 रुपये में खरीद रहे हैं।
इस प्रकार किसानों का टमाटर खेतों में डेढ़ से दो रुपये किलो बिक रहा है। लेकिन दुकानदार उसी टमाटर को बाजार में 10 से 12 रुपये किलो तक बेचकर मोटी रकम कमा रहे हैं।
सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार
भारतीय किसान यूनियन जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने कहा कि टमाटर के कम दामों के लिए सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार है।
सरकार की ओर से टमाटर की फसल के लिए कोई न्यूनतम मूल्य निर्धारित नहीं किया गया है। जिस कारण किसानों को टमाटर की फसल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं।
मजदूरों पर अर्थिक मार
रादौर क्षेत्र के लगभग 25 से अधिक गांव में किसान टमाटर की हजारों एकड़ में खेती करते हैं। क्षेत्र में टमाटर की फसल किसान और मजदूर मिलकर करते हैं।
टमाटर की फसल पर आने वाला खर्च किसानों तथा मजदूरों के बीच आधा-आधा बांट लिया जाता है। मजदूर टमाटर की फसल को लगाने से लेकर टमाटर की फसल को समेटने तक का सारा कार्य खुद करता है।
लेकिन इस बार टमाटर के फसल के दाम बेहद कम होने के कारण टमाटर की खेती से जुड़े मजदूरों पर भारी आर्थिक मार पड़ी है।
अधिकतर मजदूरों ने साहूकारों से मोटे ब्याज पर पैसा लेकर टमाटर की खेती में पैसा लगाया है। ऐसे में टमाटर की फसल के भारी नुकसान में जाने के कारण टमाटर की खेती से जुड़े मजदूरों और उनके परिवारों पर कर्ज का बोझ चढ़ गया है।
मजदूर सतपाल, फुलाराम, शेर सिंह, हंसराज, राकेश पासी, अनिल पासी ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर टमाटर की खेती में पैसा लगाया था।
वह सुबह से शाम तक अपने परिवारों के साथ टमाटर तोड़ने का काम करते हैं। लेकिन उन्हें टमाटर के अच्छे दाम मिलना तो दूर की बात रही उन्हें टमाटर तोड़ने की दिहाड़ी भी पूरी नहीं मिल पा रही है।