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मृत्यु को जानने से मन से मिट जाता है भय : कमलेश
Sun, 04 May 2025 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 04 May 2025 12:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। श्री सनातन धर्म मंदिर मॉडल टाउन में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन गया। कथा के पहले दिन श्री चित्रकूट धाम से आए हुए कथा व्यास आचार्य कमलेश शास्त्री महाराज ने भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि मृत्यु को जानने से उसका भय मन से मिट जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया, वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है। श्रीमद्भागवत कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है। यह परमहंसों की संहिता है, भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है। भागवत कथा भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न करती है। यह ग्रंथ वेद, उपनिषद का सार रूपी फल है। यह कथा रूपी अमृत देवताओं को भी दुर्लभ है।
कथा व्यास ने कहा कि कथा वही है, जिसमें ईश्वर से प्रेम हो। कथा सुनने से भक्तों में श्री कृष्ण का ज्ञान वैराग्य भक्ति स्थापित हो जाए। श्रीमद् भागवत कथा गुरु शिष्य संबंध भी है, जिसमें गुरुदेव सुखदेव महाराज अपने प्रिय शिष्य राजा परीक्षित को भगवान की कथा का अमृत का पान कराते हुए उनके ह्रदय में भगवान की प्रेम भक्ति स्थापित करते हैं और उसे भगवान से मिला देते हैं, अर्थात आत्म ज्ञान करा देते हैं।
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ठाकुर जी की कथा सुनते-सुनते खुद से मिल जाना जो स्वयं से मिल जाता है उसे कभी अकेलापन नहीं सताता, श्रीमद् भागवत कथा असीम है। इससे पहले सुबह कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा आर्य समाज मंदिर से रवाना होकर विभिन्न इलाकों से होती हुई कथा स्थल पर पहुंची। जहां फूलों की वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान ढोल की थाप पर श्रद्धालु जमकर झूमे। प्रथम दिवस की कथा के मुख्य यजमान रोशन लाल शर्मा, नरेश खेड़ा, विजय कुमार, संदीप, अच्छे लाल वर्मा, प्रहलाद खन्ना उपस्थित रहे।
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यमुनानगर। श्री सनातन धर्म मंदिर मॉडल टाउन में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन गया। कथा के पहले दिन श्री चित्रकूट धाम से आए हुए कथा व्यास आचार्य कमलेश शास्त्री महाराज ने भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि मृत्यु को जानने से उसका भय मन से मिट जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया, वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है। श्रीमद्भागवत कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है। यह परमहंसों की संहिता है, भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है। भागवत कथा भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न करती है। यह ग्रंथ वेद, उपनिषद का सार रूपी फल है। यह कथा रूपी अमृत देवताओं को भी दुर्लभ है।
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कथा व्यास ने कहा कि कथा वही है, जिसमें ईश्वर से प्रेम हो। कथा सुनने से भक्तों में श्री कृष्ण का ज्ञान वैराग्य भक्ति स्थापित हो जाए। श्रीमद् भागवत कथा गुरु शिष्य संबंध भी है, जिसमें गुरुदेव सुखदेव महाराज अपने प्रिय शिष्य राजा परीक्षित को भगवान की कथा का अमृत का पान कराते हुए उनके ह्रदय में भगवान की प्रेम भक्ति स्थापित करते हैं और उसे भगवान से मिला देते हैं, अर्थात आत्म ज्ञान करा देते हैं।
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ठाकुर जी की कथा सुनते-सुनते खुद से मिल जाना जो स्वयं से मिल जाता है उसे कभी अकेलापन नहीं सताता, श्रीमद् भागवत कथा असीम है। इससे पहले सुबह कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा आर्य समाज मंदिर से रवाना होकर विभिन्न इलाकों से होती हुई कथा स्थल पर पहुंची। जहां फूलों की वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान ढोल की थाप पर श्रद्धालु जमकर झूमे। प्रथम दिवस की कथा के मुख्य यजमान रोशन लाल शर्मा, नरेश खेड़ा, विजय कुमार, संदीप, अच्छे लाल वर्मा, प्रहलाद खन्ना उपस्थित रहे।