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Yamuna Nagar News: सोशल मीडिया पर खर्च का हिसाब रखना टेढ़ी खीर

Wed, 11 Sep 2024 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 11 Sep 2024 01:37 AM IST
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Keeping track of expenses on social media is a tough job
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगााधरी। चुनावी रण में नेता प्रचार के लिए सोशल मीडिया पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। टिकट की दावेदारी के साथ प्रत्याशी भी सोशल मीडिया पर लगातार प्रचार कर रहे हैं। तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर चुनावी पोस्ट की भरमार हो गई है। प्रचार के लिए नेता इंजीनियर्स, इंफ्यूलांयर, फैन पेज बनाकर पोस्ट कर रहे हैं और इन पोस्ट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए हजारों रुपये भी खर्च कर रहे हैं।
आदर्श चुनाव संहिता के अंतर्गत प्रचार, विज्ञापन, रैली, जनसभाओं सहित अन्य तमाम गतिविधियों का लगाया धन चुनावी खर्च में जोड़ा जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर नेता हर दिन हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, जिस प्रशासन के पास कोई हिसाब नहीं है। सोशल मीडिया नेताओं की पोस्ट बूस्ट करना, निर्धारित क्षेत्र में अधिक लोगों को उनके अकाउंट पर दिखाना, इंफ्यूलांसर के साथ कोलैब कर पोस्ट वायरल करना इत्यादि कामों पर हजारों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
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पोस्ट बूस्ट करने और सबसे पहले दिखाई देने के लिए नेता एक पोस्ट के लिए हजार से तीन हजार रुपये तक खर्च कर रहे हैं। इसके अलावा तमाम प्लेटफार्म पर फैन पेज बनाकर लोगों के अकाउंट पर पोस्ट दिखाई जा रही है। इसके लिए एक्सपर्ट काम करते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर मशहूर व रुतबेदार लोगों के साथ, इंफ्यूलांसर से कोलैब के साथ पोस्ट अपलोड की जा रही है।
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इंफ्यूलांसर अपने पेज या अपने साथ पोस्ट अपलोड करने के लिए अपनी निर्धारित रकम लेते हैं। इसका कोई दायरा नहीं है यह हजारों से लाखों में भी है। इसके अलावा व्यापारी पेज, फेसबुक व यू-ट्यूब चैनल पर विज्ञापन, एप पर विज्ञापन भी चलाए जा रहे हैं। प्रशासन के पास अभी इसका कोई हिसाब नहीं है। नेता अपने सहयोगियों से पेज बनाकर अपने हक में वोट करने व नेता अपनी दावेदारी जता रहे हैं।
सोशल मीडिया अन्य माध्यमों से यह प्रचार का सबसे सरल व उत्तम जरिया है। चूंकि सोशल मीडिया पर कोई भी कहीं से बैठे पोस्ट अपलोड कर लाखों लोगों तक पहुंचा सकते हैं। वहीं इस पर अपलोड पोस्ट का कंटेंट व अन्य चीजे बदली व मिटाई भी जा सकती है। प्रशासन सोशल मीडिया पर निगरानी के दावे कर रहा है, लेकिन इसकी प्रशासन के पास कोई सटीक जानकारी नहीं है।


चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर प्रशासन की पूरी तरह नजर है। प्रत्याशियों, नेताओं व राजनीतिक दलों के पेज व अकाउंट पर नजर रखी जा रही है। जो प्रत्याशी इंफ्यूलांसर से काम ले रहे हैं या सोशल मीडिया पर विज्ञापन दे रहे हैं उनका खर्च चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा। यदि कोई नेता किसी दूसरे के लिए ऐसा प्रचार कर रहा है तो वह पार्टी खर्च में गिना जाएगा। इसे लिए लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि ऐसी किसी गतिविधियों के बारे देखे तो प्रशासन को सूचित करें। - पीयूष गुप्ता, सीटीएम, जगाधरी।
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