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कपालमोचन मेला : रात के सवा 12 बजते ही सरावरों पर उमड़ा श्रद्धालुओं को सैलाब, मोक्ष और आस्था की लगाई डुबकी
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यमुनानगर/बिलासपुर। चार दिन से चल रहे तीर्थराज कपालमोचन मेले में रात के सवा 12 बजते ही तीनों सरोवरों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने एक के बाद सरोवरों में शाही स्नान कर मोक्ष और आस्था की डुबकी लगाई। वहीं गुरु पर्व होने के चलते श्रद्धालुओं की आतिशबाजी और रंग-बिरंगी लाइटों से आसमान रोशन हो उठा। चारों तरफ गुरु महाराज के जयकारे लग रहे थे। सरोवरों में रात का पानी काफी ठंडा हो जाता है, फिर भी श्रद्धालु डुबकी लगाने के लिए बेझिझक सरोवरों में उतरे। भक्तिभाव में सराबोर रात का यह विहंगम दृश्य देखते ही बन रहा था। यहां तक कि बड़े, बुजुर्गों के साथ बच्चे भी उत्साह के साथ स्नान कर रहे थे। वहीं भीड़ के दौरान कोई घटना न हो जाए, इसके लिए प्रशासन की ओर से पहले ही कड़े इंतजाम कर लिए गए थे। सरोवरों पर पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई थी।
कपालमोचन में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान करने से पहले श्रद्धालु मां सरस्वती की पूजा करने पहुंचे। इसके बाद वे आदिबद्री गए, जहां भगवान केदारनाथ और माता मंत्रा देवी की पूजा की। कपालमोचन से वापस जाते वक्त संगत बिलासपुर, छछरौली मार्ग पर बसातियांवाला स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में पूजा करने पहुंचे। मेले में करीब पांच हजार वाहन पहुंचे थे।
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पूरे दिन श्रद्धालु सरोवरों में मान्यता के अनुसार स्नान करते हैं। किंतु पंजाब से आए ज्यादातर श्रद्धालु 18 नवंबर की रात को सवा 12 बजते ही स्नान शुरू कर दिया और उसके बाद वह घर गए। स्नान के बाद श्रद्धालु जाम में फंसने से बचने के लिए रात को निकलने की कोशिश करते हैं। दिन में तो केवल लोकल और आसपास के जिलों की संगत ही स्नान करती है। ऐसे में रात में स्नान करने के बाद ज्यादातर श्रद्धालु लौट गए और अगले साल कपालमोचन मेले में दोबारा आने की कामना की।
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बिलासपुर। कपालमोचन एक ऐसा पवित्र स्थान है, जहां सभी धर्मों को मानने वाले लोग पहुंचते हैं। सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारे में मत्था टेकते हैं तो इसके बाद वे गऊ बच्छा घाट पर जाकर भगवान शिव की आरती उतारते हैं। फिर सूरजकुंड सरोवर पर जाकर सुख समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं हिंदू लोग विभिन्न प्रकार का सामान बेचते दिखे तो मुस्लिम समुदाय के लोग कुंडी और पीढ़ी बेचते दिखते हैं, जिसकी सबसे ज्यादा डिमांड मेले में रहती है।
वैसे तो कपालमोचन मेले के दौरान हर वर्ष साफसफाई कराई जाती है, लेकिन इस बार सड़कों और घाटों पर जो सफाई दिखी, उसकी श्रद्धालुओं ने सराहना की। रात में एक बजे भी कर्मचारी घाटों और सड़कों पर सफाई करते दिखे। मेले में आए सुखदेव सिंह, राम सिंह, त्रिलोचन सिंह का कहना था कि ऐसी सफाई कपालमोचन में उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। इस बार प्रशासन ने पर्याप्त इंतजाम करवाए थे।
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कपालमोचन में कार्तिक पूर्णिमा का स्नान करने से पहले श्रद्धालु मां सरस्वती की पूजा करने पहुंचे। इसके बाद वे आदिबद्री गए, जहां भगवान केदारनाथ और माता मंत्रा देवी की पूजा की। कपालमोचन से वापस जाते वक्त संगत बिलासपुर, छछरौली मार्ग पर बसातियांवाला स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में पूजा करने पहुंचे। मेले में करीब पांच हजार वाहन पहुंचे थे।
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कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पूरे दिन श्रद्धालु सरोवरों में मान्यता के अनुसार स्नान करते हैं। किंतु पंजाब से आए ज्यादातर श्रद्धालु 18 नवंबर की रात को सवा 12 बजते ही स्नान शुरू कर दिया और उसके बाद वह घर गए। स्नान के बाद श्रद्धालु जाम में फंसने से बचने के लिए रात को निकलने की कोशिश करते हैं। दिन में तो केवल लोकल और आसपास के जिलों की संगत ही स्नान करती है। ऐसे में रात में स्नान करने के बाद ज्यादातर श्रद्धालु लौट गए और अगले साल कपालमोचन मेले में दोबारा आने की कामना की।
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बिलासपुर। कपालमोचन एक ऐसा पवित्र स्थान है, जहां सभी धर्मों को मानने वाले लोग पहुंचते हैं। सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारे में मत्था टेकते हैं तो इसके बाद वे गऊ बच्छा घाट पर जाकर भगवान शिव की आरती उतारते हैं। फिर सूरजकुंड सरोवर पर जाकर सुख समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं हिंदू लोग विभिन्न प्रकार का सामान बेचते दिखे तो मुस्लिम समुदाय के लोग कुंडी और पीढ़ी बेचते दिखते हैं, जिसकी सबसे ज्यादा डिमांड मेले में रहती है।
वैसे तो कपालमोचन मेले के दौरान हर वर्ष साफसफाई कराई जाती है, लेकिन इस बार सड़कों और घाटों पर जो सफाई दिखी, उसकी श्रद्धालुओं ने सराहना की। रात में एक बजे भी कर्मचारी घाटों और सड़कों पर सफाई करते दिखे। मेले में आए सुखदेव सिंह, राम सिंह, त्रिलोचन सिंह का कहना था कि ऐसी सफाई कपालमोचन में उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। इस बार प्रशासन ने पर्याप्त इंतजाम करवाए थे।