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पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में जगदीप प्रथम
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। महाराजा अग्रसेन कॉलेज में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर समाज शास्त्र विभाग की ओर से ऑनलाइन पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता करवाई गई। प्रतियोगिता में बीए अंतिम वर्ष के जगदीप ने पहला स्थान, बीए अंतिम के निशांत वर्मा ने दूसरा स्थान बीए द्वितीय वर्ष की मुस्कान ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। बीए अंतिम वर्ष की कोमल को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
विभागाध्यक्ष डॉ. पवन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में हुई प्रतियोगिता का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. पीके बाजपेयी ने किया। उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी किसी भी समाज के लिए कलंक है। मासूम उम्र में रोटी कमाने के लिए जो काम करते हैं, उनका बचपन इसके बोझ तले कुचल जाता है। यदि हम वास्तव में विश्व गुरु बनना चाहते हैं, तो हमें इस बुराई को रोकना होगा। वर्तमान में बाल श्रम के भारी बोझ तले दबे बच्चे को शिक्षा देनी होगी। हमें उन्हें स्कूलों में भेजना है, उन्हें गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा देनी है। तभी हमारे देश की वास्तविक प्रगति संभव है।
यूनिसेफ रिपोर्ट 2020 के बारे डॉ. बाजपेयी ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार, दुनिया में कुल 160 मिलियन बच्चे बाल श्रम के लिए मजबूर हैं। अनुमान है कि यह 20.06 मिलियन के खतरनाक आंकड़े तक पहुंचने वाला है। समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. पवन त्रिपाठी ने कहा कि बाल श्रम की बुराई मिटाने के लिए 1986 में कानून लागू किया गया था, जो 14 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे से काम करने से रोकता है। उन्होंने कहा कि बालश्रम रोकने के लिए तमाम संगठन काम कर रहे हैं। हमें एकजुट होकर इस बुराई को समाप्त करना होगा। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साह से भाग लिया। विद्यार्थियों ने पोस्टर से बालश्रम रोकने के तरीके बताए।
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जगाधरी। महाराजा अग्रसेन कॉलेज में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर समाज शास्त्र विभाग की ओर से ऑनलाइन पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता करवाई गई। प्रतियोगिता में बीए अंतिम वर्ष के जगदीप ने पहला स्थान, बीए अंतिम के निशांत वर्मा ने दूसरा स्थान बीए द्वितीय वर्ष की मुस्कान ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। बीए अंतिम वर्ष की कोमल को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
विभागाध्यक्ष डॉ. पवन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में हुई प्रतियोगिता का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. पीके बाजपेयी ने किया। उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी किसी भी समाज के लिए कलंक है। मासूम उम्र में रोटी कमाने के लिए जो काम करते हैं, उनका बचपन इसके बोझ तले कुचल जाता है। यदि हम वास्तव में विश्व गुरु बनना चाहते हैं, तो हमें इस बुराई को रोकना होगा। वर्तमान में बाल श्रम के भारी बोझ तले दबे बच्चे को शिक्षा देनी होगी। हमें उन्हें स्कूलों में भेजना है, उन्हें गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा देनी है। तभी हमारे देश की वास्तविक प्रगति संभव है।
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यूनिसेफ रिपोर्ट 2020 के बारे डॉ. बाजपेयी ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार, दुनिया में कुल 160 मिलियन बच्चे बाल श्रम के लिए मजबूर हैं। अनुमान है कि यह 20.06 मिलियन के खतरनाक आंकड़े तक पहुंचने वाला है। समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. पवन त्रिपाठी ने कहा कि बाल श्रम की बुराई मिटाने के लिए 1986 में कानून लागू किया गया था, जो 14 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे से काम करने से रोकता है। उन्होंने कहा कि बालश्रम रोकने के लिए तमाम संगठन काम कर रहे हैं। हमें एकजुट होकर इस बुराई को समाप्त करना होगा। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साह से भाग लिया। विद्यार्थियों ने पोस्टर से बालश्रम रोकने के तरीके बताए।
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