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जानू हत्याकांड : पुलिस की विफलता से हुई मेरे बेटे जानू की हत्या
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मेरे बेटे जानू की हत्या पुलिस की विफलता के कारण हुई है। पुलिस चाहती तो जानू की जान बच सकती थी। जिस दिन मेरे बेटे की हत्या हुई उस दिन पुलिस ने सभी सड़कों व चौराहों पर नाकाबंदी कर रखी थी। जानू के हत्यारोपी कुरुक्षेत्र से कारों में आए थे। यदि पुलिस ने नाकाबंदी कर रखी थी तो हत्यारोपियों की कार को कहीं पर भी रोक कर चेकिंग क्यों नहीं की। पुलिस पर यह आरोप मृतक जानू वाल्मीकि के पिता कांग्रेस एवं दलित नेता राजेंद्र वाल्मीकि ने मंगलवार को अपने आवास पर मीडिया से रूबरू होकर लगाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पुलिस ने हत्यारोपियों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया तो वाल्मीकि समाज के विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों के लोग एकत्रित होकर सड़क पर उतरेंगे। उस दौरान समाज जो निर्णय लेगा उसकी सारी जिम्मेदारी पुलिस की होगी। इसे लेकर एक दिन पहले मीटिंग हो चुकी है। जिसमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश के लोगों की बात हो चुकी है। हजारों की संख्या में लोग एकत्रित होंगे।
राजेंद्र वाल्मीकि ने कहा कि 30 दिसंबर में भी बेटे जानू पर जानलेवा हमला हुआ था। उस दौरान भी सचिन पंडित व सुमित राणा पर केस दर्ज हुआ था। परंतु पुलिस ने आरोपियों को एक बार भी गिरफ्तार नहीं किया। जबकि उन्होंने खुद आरोपियों की शाहबाद में लोकेशन पुलिस को बताई थी। तब यमुनानगर पुलिस ने कहा था कि इसमें कार्रवाई कुरुक्षेत्र पुलिस करेगी। यदि पुलिस ने तब आरोपियों को पकड़ कर जेल में डाल दिया होता तो शायद आज उसका बेटा जानू जिंदा होता। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर में जब हमला हुआ था तो उससे कुछ दिन पहले ही पुलिस ने उनके घर से पुलिस गार्द को हटा दिया था। इसके 15-20 दिन बाद ही हमला हो गया। जब सुरक्षा हटाने के बारे में उन्होंने पुलिस से बात की तो उन्हें बताया गया कि इस बारे में ऊपर से आदेश हैं। कहीं न कहीं साजिश के तहत साजिश के तहत ऐसा किया गया था।
राजेंद्र वाल्मीकि ने कहा कि मुख्य हत्यारोपी सचिन पंडित, मनोज उर्फ शैंटी व सुमित राणा अब भी खुले घूम रहे हैं। पुलिस ने जिन दो आरोपियों को पकड़ा है वह केवल खानापूर्ति है। दो साल में मेरे दोनों बेटों को मार दिया गया। अब मुझे व मेरे परिवार को भी जान का खतरा है। यह मामला उन्होंने पहले मुख्यमंत्री के समक्ष भी रखा था। परंतु उनसे कोई इंसाफ नहीं मिला। फिर भी वह मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री इस मामले को गंभीरता से लें।
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राजेंद्र वाल्मीकि ने कहा कि उसके बेटे जानू की हत्या के बाद पुलिस ने सिक्योरिटी में तैनात सुरक्षा कर्मी अमित को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन वारदात के समय सुरक्षा कर्मी अमित अपने घर चले गए थे। इसलिए उसकी इस वारदात में लापरवाही निकालना गलत है। उसके बेटे की हत्या में उसका कोई कसूर नहीं है। पुलिस ने उसे गलत तरीके से सस्पेंड किया। राजेंद्र वाल्मीकि ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से बातचीत की। जिसके बाद सुरक्षा कर्मी अमित को बहाल किया गया।
कांग्रेस नेता राजेंद्र वाल्मीकि का बेटा जानू फाइनेंस का काम करता था। 15 अप्रैल की रात को जानू अपने दोस्तों के साथ शादी समारोह में शामिल होने गया था। योजना के तहत जानू की हत्या करने के लिए आरोपी पहले से घात लगाकर पैलेस के बाहर कार में बैठ गए। जैसे ही जानू शादी समारोह से बाहर निकला तो उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। गोलियों की आवाज सुनकर लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां जानू व उसके दोस्त खून से लथपथ पड़े मिले। चारों को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डाक्टर ने जानू को मृत घोषित कर दिया था। जबकि उसके दोस्तों को अस्पताल में उपचार दिया गया।
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राजेंद्र वाल्मीकि ने कहा कि 30 दिसंबर में भी बेटे जानू पर जानलेवा हमला हुआ था। उस दौरान भी सचिन पंडित व सुमित राणा पर केस दर्ज हुआ था। परंतु पुलिस ने आरोपियों को एक बार भी गिरफ्तार नहीं किया। जबकि उन्होंने खुद आरोपियों की शाहबाद में लोकेशन पुलिस को बताई थी। तब यमुनानगर पुलिस ने कहा था कि इसमें कार्रवाई कुरुक्षेत्र पुलिस करेगी। यदि पुलिस ने तब आरोपियों को पकड़ कर जेल में डाल दिया होता तो शायद आज उसका बेटा जानू जिंदा होता। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर में जब हमला हुआ था तो उससे कुछ दिन पहले ही पुलिस ने उनके घर से पुलिस गार्द को हटा दिया था। इसके 15-20 दिन बाद ही हमला हो गया। जब सुरक्षा हटाने के बारे में उन्होंने पुलिस से बात की तो उन्हें बताया गया कि इस बारे में ऊपर से आदेश हैं। कहीं न कहीं साजिश के तहत साजिश के तहत ऐसा किया गया था।
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राजेंद्र वाल्मीकि ने कहा कि मुख्य हत्यारोपी सचिन पंडित, मनोज उर्फ शैंटी व सुमित राणा अब भी खुले घूम रहे हैं। पुलिस ने जिन दो आरोपियों को पकड़ा है वह केवल खानापूर्ति है। दो साल में मेरे दोनों बेटों को मार दिया गया। अब मुझे व मेरे परिवार को भी जान का खतरा है। यह मामला उन्होंने पहले मुख्यमंत्री के समक्ष भी रखा था। परंतु उनसे कोई इंसाफ नहीं मिला। फिर भी वह मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री इस मामले को गंभीरता से लें।
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राजेंद्र वाल्मीकि ने कहा कि उसके बेटे जानू की हत्या के बाद पुलिस ने सिक्योरिटी में तैनात सुरक्षा कर्मी अमित को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन वारदात के समय सुरक्षा कर्मी अमित अपने घर चले गए थे। इसलिए उसकी इस वारदात में लापरवाही निकालना गलत है। उसके बेटे की हत्या में उसका कोई कसूर नहीं है। पुलिस ने उसे गलत तरीके से सस्पेंड किया। राजेंद्र वाल्मीकि ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से बातचीत की। जिसके बाद सुरक्षा कर्मी अमित को बहाल किया गया।
कांग्रेस नेता राजेंद्र वाल्मीकि का बेटा जानू फाइनेंस का काम करता था। 15 अप्रैल की रात को जानू अपने दोस्तों के साथ शादी समारोह में शामिल होने गया था। योजना के तहत जानू की हत्या करने के लिए आरोपी पहले से घात लगाकर पैलेस के बाहर कार में बैठ गए। जैसे ही जानू शादी समारोह से बाहर निकला तो उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। गोलियों की आवाज सुनकर लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां जानू व उसके दोस्त खून से लथपथ पड़े मिले। चारों को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डाक्टर ने जानू को मृत घोषित कर दिया था। जबकि उसके दोस्तों को अस्पताल में उपचार दिया गया।