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Yamuna Nagar News: इंटरनेट की समस्या, सोशल मीडिया पर बाल रामलीला दिखाना मुश्किल
Tue, 15 Oct 2024 04:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 15 Oct 2024 04:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शिक्षा विभाग की ओर से राजकीय प्राथमिक पाठशाला में रामलीला सोमवार से शुरू हो गई है। स्कूलों में आधी अधूरी तैयारियों के साथ सोमवार को स्कूलों में बच्चों ने बाल रामलीला का मंचन किया। सुविधाओं के अभाव में भी बच्चों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतरीन रहा। वहीं, रामलीला मंचन की वीडियोग्राफी करना और पोर्टल पर वीडियो अपलोड करना शिक्षकों के लिए परेशानी बन गया है।
मुख्यालय के आदेशानुसार शिक्षकों को स्कूल में रामलीला मंचन की करीब तीन से पांच मिनट की वीडियो बनाकर निपुण हरियाणा के पोर्टल पर अपलोड करनी है। वहीं, यह वीडियो विभाग सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म भी अपलोड करनी है। जिससे सरकारी स्कूलों की गतिविधियों का प्रचार किया जा सके। यह आदेश शिक्षकों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। विभाग ने वीडियो अपलोड करने के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन कई स्कूल ऐसे हैं, जहां इंटरनेट की सुविधा न के बराबर है।
जिले के करीब पांच दर्जन स्कूल ऐसे हैं, जहां इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी है। इन स्कूलों में शिक्षकों कों 25केबी की फोटो अपलोड करने में ही काफी देर लग जाती है। ऐसे में तीन से पांच मिनट की वीडियो अपलोड करना शिक्षकों के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। हालांकि विभाग ने इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की है, लेकिन इससे शिक्षकों को परेशानी हो रही है।
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जिले के करीब पांच दर्जन ऐसे हैं, जहां इंटरनेट बेहद धीमा है। इन स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं भी नहीं लग पाती हैं। जिले के सभी स्कूलों में ऑनलाइन असेसमेंट करवाए गए थे। परंतु इन पांच दर्जन स्कूलों में ऑनलाइन नहीं बच्चों की ऑफलाइन परीक्षाएं करवाई गई थी। यह स्कूल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। सबसे ज्यादा स्कूल प्रतापनगर, कलेसर, रणजीतपुर, घाड़ क्षेत्र के हैं।
यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश व उत्तरप्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं, जिस कारण यहां इंटरनेट की काफी समस्या रहती है। कई बार सैशन एक्सपायर कर जाता है, लेकिन सामग्री अपलोड नहीं हो पताी है। विभाग ने ऐसे स्कूलों के शिक्षकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। इसके तहत शिक्षक घर या कहीं बाहर से भी वीडियो भेज सकते हैं।
रफ्तार टेस्ट के साथ रामलीला का मंचन
विभाग की ओर से करवाई जा रही रामलीला की अभी तक एक चौथाई वीडियो भी पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई है। वहीं यह कार्यक्रम जिले के 592 स्कूलों में करवाजा रहा है। निपुण बाल रामलीला के साथ स्कूलों में रफ्तार टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। यह टेस्ट अभी कलस्टर लेवल पर करवाए जा रहे हैं। जिले में कुल 74 क्लस्टर हैं और हर क्लस्टर में 10 से 12 प्राइमरी स्कूल हैं। इसके बाद खंड स्तर पर टेस्ट करवाए जाएंगे। ऐसे में शिक्षक ज्यादा व्यस्त हैं। इसी कारण अधिकांश स्कूलों की वीडियो अभी पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाई है।
बिना ड्रेस निभा रहे किरदार
विभाग की ओर से रामलीला मंचन के लिए ड्रेस सहित तमाम सामग्री स्कूलों को अपने स्तर पर एकत्र करने के निर्देश दिए गए थे। वहीं, इसके स्कूल प्रबंधन समिति, पंचायत से भी सहयोग लेने का विकल्प दिया गया था। परंतु इसके बावजूद शिक्षक ड्रेस का प्रबंधन नहीं कर पाए। ऐसे में सोमवार को स्कूलों में रामलीला शुरू हो गई तो खानापूर्ति कर दी गई। मुकुट की जगह सिर पर चार्ट पेपर बांध दिया गया। राम-लखन की सन्यासी वेशभूषा की जगह सफेद कुर्ता पायजामा पहना दिया गया। बाल हनुमान को गदा की जगह डंडा पकड़ा दिया गया। यह भी एक कारण है कि शिक्षक वीडिया अपलोड करने में टालमटोल कर रहे हैं।
जिले के सभी प्राथमिक स्कूलों में रामलीला शुरू हो गई है। रामलीला की वीडियो पोर्टल के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी अपलोड की जानी है। स्कूलों में क्लस्टर लेवल रफ्तार टेस्ट भी चल रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों को वीडियो देने में समय लगा है। वे घर या अन्य किसी स्थान से भी वीडियो कभी भी अपलोड कर सकते हैं। ड्रेस के लिए स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं। - संजीव सैनी, एफएलएन समन्वयक।
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जगाधरी। शिक्षा विभाग की ओर से राजकीय प्राथमिक पाठशाला में रामलीला सोमवार से शुरू हो गई है। स्कूलों में आधी अधूरी तैयारियों के साथ सोमवार को स्कूलों में बच्चों ने बाल रामलीला का मंचन किया। सुविधाओं के अभाव में भी बच्चों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतरीन रहा। वहीं, रामलीला मंचन की वीडियोग्राफी करना और पोर्टल पर वीडियो अपलोड करना शिक्षकों के लिए परेशानी बन गया है।
मुख्यालय के आदेशानुसार शिक्षकों को स्कूल में रामलीला मंचन की करीब तीन से पांच मिनट की वीडियो बनाकर निपुण हरियाणा के पोर्टल पर अपलोड करनी है। वहीं, यह वीडियो विभाग सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म भी अपलोड करनी है। जिससे सरकारी स्कूलों की गतिविधियों का प्रचार किया जा सके। यह आदेश शिक्षकों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। विभाग ने वीडियो अपलोड करने के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन कई स्कूल ऐसे हैं, जहां इंटरनेट की सुविधा न के बराबर है।
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जिले के करीब पांच दर्जन स्कूल ऐसे हैं, जहां इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी है। इन स्कूलों में शिक्षकों कों 25केबी की फोटो अपलोड करने में ही काफी देर लग जाती है। ऐसे में तीन से पांच मिनट की वीडियो अपलोड करना शिक्षकों के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। हालांकि विभाग ने इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की है, लेकिन इससे शिक्षकों को परेशानी हो रही है।
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जिले के करीब पांच दर्जन ऐसे हैं, जहां इंटरनेट बेहद धीमा है। इन स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं भी नहीं लग पाती हैं। जिले के सभी स्कूलों में ऑनलाइन असेसमेंट करवाए गए थे। परंतु इन पांच दर्जन स्कूलों में ऑनलाइन नहीं बच्चों की ऑफलाइन परीक्षाएं करवाई गई थी। यह स्कूल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। सबसे ज्यादा स्कूल प्रतापनगर, कलेसर, रणजीतपुर, घाड़ क्षेत्र के हैं।
यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश व उत्तरप्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं, जिस कारण यहां इंटरनेट की काफी समस्या रहती है। कई बार सैशन एक्सपायर कर जाता है, लेकिन सामग्री अपलोड नहीं हो पताी है। विभाग ने ऐसे स्कूलों के शिक्षकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। इसके तहत शिक्षक घर या कहीं बाहर से भी वीडियो भेज सकते हैं।
रफ्तार टेस्ट के साथ रामलीला का मंचन
विभाग की ओर से करवाई जा रही रामलीला की अभी तक एक चौथाई वीडियो भी पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई है। वहीं यह कार्यक्रम जिले के 592 स्कूलों में करवाजा रहा है। निपुण बाल रामलीला के साथ स्कूलों में रफ्तार टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। यह टेस्ट अभी कलस्टर लेवल पर करवाए जा रहे हैं। जिले में कुल 74 क्लस्टर हैं और हर क्लस्टर में 10 से 12 प्राइमरी स्कूल हैं। इसके बाद खंड स्तर पर टेस्ट करवाए जाएंगे। ऐसे में शिक्षक ज्यादा व्यस्त हैं। इसी कारण अधिकांश स्कूलों की वीडियो अभी पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाई है।
बिना ड्रेस निभा रहे किरदार
विभाग की ओर से रामलीला मंचन के लिए ड्रेस सहित तमाम सामग्री स्कूलों को अपने स्तर पर एकत्र करने के निर्देश दिए गए थे। वहीं, इसके स्कूल प्रबंधन समिति, पंचायत से भी सहयोग लेने का विकल्प दिया गया था। परंतु इसके बावजूद शिक्षक ड्रेस का प्रबंधन नहीं कर पाए। ऐसे में सोमवार को स्कूलों में रामलीला शुरू हो गई तो खानापूर्ति कर दी गई। मुकुट की जगह सिर पर चार्ट पेपर बांध दिया गया। राम-लखन की सन्यासी वेशभूषा की जगह सफेद कुर्ता पायजामा पहना दिया गया। बाल हनुमान को गदा की जगह डंडा पकड़ा दिया गया। यह भी एक कारण है कि शिक्षक वीडिया अपलोड करने में टालमटोल कर रहे हैं।
जिले के सभी प्राथमिक स्कूलों में रामलीला शुरू हो गई है। रामलीला की वीडियो पोर्टल के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी अपलोड की जानी है। स्कूलों में क्लस्टर लेवल रफ्तार टेस्ट भी चल रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों को वीडियो देने में समय लगा है। वे घर या अन्य किसी स्थान से भी वीडियो कभी भी अपलोड कर सकते हैं। ड्रेस के लिए स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं। - संजीव सैनी, एफएलएन समन्वयक।