{"_id":"66662be3099f5944eb00fe74","slug":"indian-culture-based-on-yoga-and-spirituality-tripada-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-120176-2024-06-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारतीय संस्कृति योग व अध्यात्म पर आधारित : त्रिपदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारतीय संस्कृति योग व अध्यात्म पर आधारित : त्रिपदा
Mon, 10 Jun 2024 03:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 10 Jun 2024 03:55 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। हिंदू स्कूल में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित की जा रही पांच दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिवस श्री राम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी त्रिपदा भारती ने प्रभु श्रीराम जन्म प्रसंग को बहुत ही रोचक व अध्यात्मिक तथ्यों सहित प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया प्रभु का जन्म व कर्म दिव्य होता है। जिसे हम साधारण बुद्धि के द्वारा नहीं समझ सकते। प्रभु की प्रत्येक लीला के पीछे आध्यात्मिक रहस्य होते हैं। जिन्हें हम ब्रह्म ज्ञान के द्वारा ही समझ सकते है। इसके अतिरिक्त साध्वी जी ने बताया श्री राम का जीवन चरित्र मानव के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है। हमारे समाज को उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
किंतु आज हमारा समाज ऐसे उत्तम चरित्र को भूलकर निकृष्टता का अनुसरण कर रहा है। जिसका परिणाम आप टूटते बिखरते परिवारों के रूप में, दिशाहीन युवाओं के रूप में व दम तोड़ती मानवता के रूप में स्पष्ट देख सकते हैं। इसलिए अगर हम एक सुंदर सभ्य व श्रेष्ठ समाज की परिकल्पना को साकार करना चाहते है तो हमें श्रीराम जी के चरित्र को अपने जीवन में उतरना होगा और ऐसा अध्यात्म ज्ञान की दीक्षा को प्राप्त करके ही संभव हो सकता है।
विज्ञापन
जब एक पूर्ण गुरु का आगमन हमारे जीवन में होता है तो वह हमें ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा देते है। यही अध्यात्म हमारी भारतीय संस्कृति का भी आधार रहा है। जहां अन्य देशों की संस्कृतियां भोग पर आधारित है। वहीं हमारी भारतीय संस्कृति योग और अध्यात्म से संपन्न है। इसलिए अगर हम जीवन में उत्कर्ष प्राप्त करना चाहते है तो पुनः हमें अपनी संस्कृति के साथ जुड़ना होगा।
इसके अतिरिक्त कथा में सुमधुर भजनों का गायन भी किया गया कथा का समापन प्रभु की पावन मंगल आरती के साथ किया गया। दूसरे दिवस का शुभारंभ विधायक रेनू बाला, समाजसेवी ऋषिपाल, अमित सेतिया, हंसराज डांग तथा नरेश बक्शी द्वारा किया गया। इस अवसर पर चेतन सखूजा, अंकित अग्रवाल, अवध बिहारी, सुरेश सैनी, अवधेश गर्ग, सुधीर भल्ला, संदीप गुप्ता, विकास वर्मा, गुलशन घई, कुलवंत सैनी आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
साढौरा। हिंदू स्कूल में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित की जा रही पांच दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिवस श्री राम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी त्रिपदा भारती ने प्रभु श्रीराम जन्म प्रसंग को बहुत ही रोचक व अध्यात्मिक तथ्यों सहित प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया प्रभु का जन्म व कर्म दिव्य होता है। जिसे हम साधारण बुद्धि के द्वारा नहीं समझ सकते। प्रभु की प्रत्येक लीला के पीछे आध्यात्मिक रहस्य होते हैं। जिन्हें हम ब्रह्म ज्ञान के द्वारा ही समझ सकते है। इसके अतिरिक्त साध्वी जी ने बताया श्री राम का जीवन चरित्र मानव के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है। हमारे समाज को उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
विज्ञापन
किंतु आज हमारा समाज ऐसे उत्तम चरित्र को भूलकर निकृष्टता का अनुसरण कर रहा है। जिसका परिणाम आप टूटते बिखरते परिवारों के रूप में, दिशाहीन युवाओं के रूप में व दम तोड़ती मानवता के रूप में स्पष्ट देख सकते हैं। इसलिए अगर हम एक सुंदर सभ्य व श्रेष्ठ समाज की परिकल्पना को साकार करना चाहते है तो हमें श्रीराम जी के चरित्र को अपने जीवन में उतरना होगा और ऐसा अध्यात्म ज्ञान की दीक्षा को प्राप्त करके ही संभव हो सकता है।
विज्ञापन
जब एक पूर्ण गुरु का आगमन हमारे जीवन में होता है तो वह हमें ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा देते है। यही अध्यात्म हमारी भारतीय संस्कृति का भी आधार रहा है। जहां अन्य देशों की संस्कृतियां भोग पर आधारित है। वहीं हमारी भारतीय संस्कृति योग और अध्यात्म से संपन्न है। इसलिए अगर हम जीवन में उत्कर्ष प्राप्त करना चाहते है तो पुनः हमें अपनी संस्कृति के साथ जुड़ना होगा।
इसके अतिरिक्त कथा में सुमधुर भजनों का गायन भी किया गया कथा का समापन प्रभु की पावन मंगल आरती के साथ किया गया। दूसरे दिवस का शुभारंभ विधायक रेनू बाला, समाजसेवी ऋषिपाल, अमित सेतिया, हंसराज डांग तथा नरेश बक्शी द्वारा किया गया। इस अवसर पर चेतन सखूजा, अंकित अग्रवाल, अवध बिहारी, सुरेश सैनी, अवधेश गर्ग, सुधीर भल्ला, संदीप गुप्ता, विकास वर्मा, गुलशन घई, कुलवंत सैनी आदि उपस्थित रहे।