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सत्संग में बताया गुरु नाम का महत्व
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम के सत्संग में उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती ने गुरु नाम का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि विश्व के किसी भी महान व्यक्ति का जीवन सार देखे तो पता चलता है कि उनकी सफलता के पीछे गुरु का विशेष योगदान मिलता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में गुरु का विशेष महत्व है। हर आयु अवस्था में गुरु की आवश्यकता होती है। इस जीवन रूपी सागर को पार करने के लिए गुरु नाम की पतवार चाहिए होती है। गुरु ही मनुष्य का मार्ग दर्शन कर उसे प्रभु से मिलवाता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती, मीराबाई, आदि गुरु शंकराचार्य, सहजोबाई सहित अन्य अनेक उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने गुरु वचन का पालन करते हुए जीवन व्यतीत किया और इस संसार में अपना नाम अमर कर लिया।
उन्होंने कहा कि जब हम गुरु के वचनों पर विश्वास कर उसका अनुसरण करते हैं, तो हमें उस परमपिता परमात्मा की कृपा प्राप्त होने लगती है। गुरु नाम से हर प्रकार की परेशानी स्वयं ही दूर होने लगती है। बिन गुरु के मनुष्य पशु समान होता है, जो आकारण इंद्रियों के वशीभूत होकर संसार के माया जाल में फंसा रहता है। गुरु ही मनुष्य को इस माया जाल से निकलने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस दौरान महिला मंडल ने भजनों से गुरु की महिमा का गुणगान किया।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती ने गुरु नाम का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि विश्व के किसी भी महान व्यक्ति का जीवन सार देखे तो पता चलता है कि उनकी सफलता के पीछे गुरु का विशेष योगदान मिलता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में गुरु का विशेष महत्व है। हर आयु अवस्था में गुरु की आवश्यकता होती है। इस जीवन रूपी सागर को पार करने के लिए गुरु नाम की पतवार चाहिए होती है। गुरु ही मनुष्य का मार्ग दर्शन कर उसे प्रभु से मिलवाता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती, मीराबाई, आदि गुरु शंकराचार्य, सहजोबाई सहित अन्य अनेक उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने गुरु वचन का पालन करते हुए जीवन व्यतीत किया और इस संसार में अपना नाम अमर कर लिया।
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उन्होंने कहा कि जब हम गुरु के वचनों पर विश्वास कर उसका अनुसरण करते हैं, तो हमें उस परमपिता परमात्मा की कृपा प्राप्त होने लगती है। गुरु नाम से हर प्रकार की परेशानी स्वयं ही दूर होने लगती है। बिन गुरु के मनुष्य पशु समान होता है, जो आकारण इंद्रियों के वशीभूत होकर संसार के माया जाल में फंसा रहता है। गुरु ही मनुष्य को इस माया जाल से निकलने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस दौरान महिला मंडल ने भजनों से गुरु की महिमा का गुणगान किया।
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