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प्रभु की कृपा से मिलता है मानव तन : सुयशा भारती

Mon, 09 Dec 2024 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 09 Dec 2024 12:04 AM IST
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Human body is obtained by the grace of God: Suyash Bharti
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी सुयशा भारती ने कहा कि जीवात्मा को परमात्मा की असीम कृपा एवं पूर्व जन्मों के पुण्य पुंज के द्वारा मानव तन की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि जन्म एवं मृत्यु के चक्रव्यूह से बाहर निकलने का प्रयास करना ही जीवात्मा का प्रथम कर्तव्य है, लेकिन जो मानव तन परमात्मा की प्राप्ति के लिए मिला था वो ही भक्ति मार्ग की सबसे बड़ी बाधा बन जाता है, जब मनुष्य अपनी इस नश्वर देह के अहंकार में अपने सृजन करता को भी भूल जाता है।
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साध्वी ने कहा कि जब हम अपने नश्वर तन की सुंदरता, शक्ति एवं सामर्थ्य का दंभ करते हैं, तब हमारे भीतर मिथ्या अभिमान का सृजन होता है जो हमारी अंतरात्मा के पतन का कारण बनता है। अपनी नश्वर देह के अभिमान में हम कदाचित भूल जाते हैं कि हमें यह जीवन एक निश्चित समय अवधि तक ही मिला है। जिस नश्वर देह का अहंकार मनुष्य पल प्रतिपल करता है वह प्राण छूटने के पश्चात नष्ट होकर माटी में मिल जाती है।
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तब जीवात्मा की अवस्था उस भिखारी की तरह होती है जिसे राजा ने कुछ समय के लिए पूरा राज्य सौंप दिया हो लेकिन वह राज्य के प्रति अपने दायित्वों को भुलाकर उस समय अवधि के दौरान सोता रहे और अवधि पूर्ण हो जाने पर राजा आकर अपना राज्य वापिस लेता है और वह भिखारी फिर से अपनी दुर्दशा को रोने के लिए लाचार खड़ा रह जाता है। हम ऐसी भूल कदापि न करें।
साध्वी ने कहा कि यह मानव तन नश्वर अवश्य हैं लेकिन इसे सृष्टि का सिरमौर कहा गया है क्योंकि इस नश्वर देह में संपूर्ण ब्रह्मांड का सार तत्व समाया हुआ है लेकिन वह आध्यात्मिक जागृति के बिना प्रकट नहीं होता। आज हमें भी मानव तन की प्राप्ति हुई है और आज हमारे पास समय भी है।
हम इस नश्वर देह में रहते हुए उस अलौकिक सत्ता को जान सकते हैं जिसके बारे में हमारे शास्त्र एवं ग्रंथ कहते हैं कि ब्रह्म सत्य है और जगत मिथ्या है। इस मिथ्या जगत में रहते हुए भी जो उस परम सत्य ब्रह्म को जान लेते हैं वे ही विवेकी जन कहलाते हैं।

यदि हम अपने जीवन को वास्तविकता में संपूर्ण रूप से सार्थक करना चाहते हैं तो कदाचित हमें एक ब्रह्मनिष्ठ संत की शरण में जा कर ब्रह्म ज्ञान के द्वारा निरंतर ध्यान साधना का पुरुषार्थ करना होगा तभी हम इस नश्वर देह के भीतर छुपे हुए अलौकिक परम सत्य स्वरूप परमात्मा की पहचान कर सकते हैं।
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