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कहां जाएं मरीज, जगाधरी अस्पताल खुद बीमार
ब्ूयरो/अमर उजाला, यमुनानगर
Updated Sat, 06 Jun 2015 12:10 AM IST
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मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के लिहाज से जगाधरी सिविल अस्पताल खुद बीमार है। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 500 मरीज आते हैं। गर्मियों में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या करीब 800 तक पहुंच रही हैं। जब अस्पताल में जाकर व्यवस्थाएं जांचीं तो खामियां सामने आईं।
अस्पताल की बिजली सप्लाई हॉटलाइन से न जुड़ी होने के कारण बिजली जाने पर मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सप्लाई को हॉटलाइन से जोड़ने के लिए काफी समय से प्रयास किए जा रहे हैं। बिजली कट लगते ही अस्पताल की सप्लाई पहले इनवर्टर और फिर जेनरेटर पर चालू हो जाती है लेकिन सभी एसी नहीं चल पाते हैं। जनरेटर चलने पर बड़ी एक्सरे मशीन नहीं चल पाती हैं, जिससे मरीजों के एक्सरे नहीं हो पाते।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बिजली जाने पर जेनरेटर से पंखे चालू हो जाते हैं, लेकिन मौके पर पड़ताल की तो छत के पंखे बंद मिले। अस्पताल के वार्डों में बेड पर लेटे मरीज को उनके परिजन बेहाल थे।
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बिजली जाते ही बेचैन हो जाते हैं मरीज
अस्पताल में भर्ती एक मरीज के तीमारदार जगाधरी की मीनू और कंडरौली के नीरज ने कहा कि रात को अक्सर बिजली चली जाती है, जिससे पंखे बंद हो जाते हैं। मरीजों को हाथ के पंखे से हवा करनी पड़ती है। कई बार एक घंटेे तक बिजली नहीं आती है। गर्मी के कारण मरीजों की नींद खुल जाती है और वे बेचैन हो जाते हैं।
एक बेड पर लिटाए जाते हैं दो-दो मरीज
लेदी से आए एक मरीज के परिजन अंग्रेज सिंह और सोमपाल ने बताया कि अस्पताल में बेड कम हैं। गर्मियों में अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं। बेड की कमी के कारण एक बेड पर दो-दो मरीज लिटाए जाते हैं। कई बार मरीज को फर्श पर लिटाना पड़ता है। इस बारे में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में 60 बेड हैं। इसे बढ़ाकर सौ करने के लिए प्रपोजल भेजा गया है, लेकिन यह अभी तक सिरे नहीं चढ़ा है।
वाटर कूलर से नहीं मिलता ठंडा पानी
अस्पताल मेें मरीजों के लिए दो वाटर कूलर लगे हैं, लेकिन एक से ही ठंडा पानी आता है। दूसरा मात्र शोपीस बना हुआ है। इस वाटर कूलर पर लगा एक्वागॉर्ड भी खराब पड़ा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए यहां वाटर कूलर और नलकों की संख्या पर्याप्त नहीं है।
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अस्पताल की बिजली सप्लाई हॉटलाइन से न जुड़ी होने के कारण बिजली जाने पर मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सप्लाई को हॉटलाइन से जोड़ने के लिए काफी समय से प्रयास किए जा रहे हैं। बिजली कट लगते ही अस्पताल की सप्लाई पहले इनवर्टर और फिर जेनरेटर पर चालू हो जाती है लेकिन सभी एसी नहीं चल पाते हैं। जनरेटर चलने पर बड़ी एक्सरे मशीन नहीं चल पाती हैं, जिससे मरीजों के एक्सरे नहीं हो पाते।
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अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बिजली जाने पर जेनरेटर से पंखे चालू हो जाते हैं, लेकिन मौके पर पड़ताल की तो छत के पंखे बंद मिले। अस्पताल के वार्डों में बेड पर लेटे मरीज को उनके परिजन बेहाल थे।
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बिजली जाते ही बेचैन हो जाते हैं मरीज
अस्पताल में भर्ती एक मरीज के तीमारदार जगाधरी की मीनू और कंडरौली के नीरज ने कहा कि रात को अक्सर बिजली चली जाती है, जिससे पंखे बंद हो जाते हैं। मरीजों को हाथ के पंखे से हवा करनी पड़ती है। कई बार एक घंटेे तक बिजली नहीं आती है। गर्मी के कारण मरीजों की नींद खुल जाती है और वे बेचैन हो जाते हैं।
एक बेड पर लिटाए जाते हैं दो-दो मरीज
लेदी से आए एक मरीज के परिजन अंग्रेज सिंह और सोमपाल ने बताया कि अस्पताल में बेड कम हैं। गर्मियों में अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं। बेड की कमी के कारण एक बेड पर दो-दो मरीज लिटाए जाते हैं। कई बार मरीज को फर्श पर लिटाना पड़ता है। इस बारे में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में 60 बेड हैं। इसे बढ़ाकर सौ करने के लिए प्रपोजल भेजा गया है, लेकिन यह अभी तक सिरे नहीं चढ़ा है।
वाटर कूलर से नहीं मिलता ठंडा पानी
अस्पताल मेें मरीजों के लिए दो वाटर कूलर लगे हैं, लेकिन एक से ही ठंडा पानी आता है। दूसरा मात्र शोपीस बना हुआ है। इस वाटर कूलर पर लगा एक्वागॉर्ड भी खराब पड़ा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए यहां वाटर कूलर और नलकों की संख्या पर्याप्त नहीं है।