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ऐतिहासिक कपालमोचन मेले को नहीं मिली मंजूरी
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मेले के आयोजन को स्थगित करने की जानकारी देते एसडीएम। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कपालमोचन में राज्यस्तरीय ऐतिहासिक मेला कोरोना महामारी के चलते इस बार भी आयोजित नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने सामाजिक, धार्मिक और व्यापार संगठनों की मांग को दरकिनार करते हुए मेले के आयोजन को मंजूरी देने से इंकार कर दिया है।
पिछले साल भी कोविड के चलते मेला स्थगित कर दिया गया था। इस बार कोविड संक्रमण कम होने के बावजूद मंजूरी नहीं दी गई। मंगलवार को एसडीएम जसपाल गिल ने स्थानीय विश्राम गृह में आयोजित बैठक के दौरान स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि अभी कोरोना पूरी से समाप्त हो नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में इस वर्ष भी मेला आयोजित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा पहला कर्तव्य श्रद्धालुओं का स्वास्थ्य एवं सुरक्षा है।
एसडीएम ने बताया कि मेले के आयोजन को लेकर 22 अक्तूबर को जिला उपायुक्त ने श्राइन बोर्ड सदस्यों, कपालमोचन के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं के संचालकों व प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ली थी और मेले के आयोजन पर विचार-विमर्श किया था। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी। उच्चाधिकारियों के आदेश पर पूरी परिस्थितियों की गंभीरता से जांच करते हुए श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को देखते हुए मेले को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
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एसडीएम ने बताया मेले में आने वाले पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों के शासन और प्रशासन को भी पत्र लिखकर मेले के स्थगित होने बारे सूचित किया जाएगा। कपालमोचन की विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बात कर उन्हें अपनी संगत को मेले के स्थगित होने के बारे में जानकारी भेजने के लिए कहा जाएगा।
एसडीएम ने कहा कि मेले में बाहरी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। मुख्य मार्गों पर अवरोधक लगाकर प्रवेश पर रोक भी लगाई जाएगी। एक भी संक्रमित व्यक्ति लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। कपालमोचन स्थित सरोवरों में स्नान पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। तीनों सरोवरों से पानी की निकासी करवाकर खाली करवा दिया जाएगा।
एसजीपीसी सदस्य बलदेव सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से बड़े-बड़े आयोजन किए जा रहे हैं। रैलियों का आयोजन किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में मेेले का आयोजन स्थगित होना खेद की बात है। मेले से भारत का प्राचीन इतिहास जुड़ा है, जिससे मौजूदा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से अवगत होने का अवसर मिलता है।
गुरु रविदास मंदिर डेरा बाबा लाल दास सभा के सदस्य अमरनाथ ज्ञासडा ने कहा कि मेले भारतीय संस्कृति व नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। कपालमोचन में पिछले पांच दशक से भी अधिक समय से लाखों श्रद्धालु मन्नत पूरी करने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मेले को स्थगित करना सही नहीं है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंचेगी।
कश्यप धर्मशाला कपालमोचन के प्रधान मांगे राम ने कहा कि मेले का आयोजन होना बहुत जरूरी है। मेले से हजारों लोगों को रोजगार जुड़ा हुआ है। मेला स्थगित करना ठीक नहीं है। मेले के आयोजन को लेकर सभी संस्थाओं के संचालक सरकार के अनुसार कार्य करने को तैयार हैं। मेला स्थगित होने से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचेगी।
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बिलासपुर। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कपालमोचन में राज्यस्तरीय ऐतिहासिक मेला कोरोना महामारी के चलते इस बार भी आयोजित नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने सामाजिक, धार्मिक और व्यापार संगठनों की मांग को दरकिनार करते हुए मेले के आयोजन को मंजूरी देने से इंकार कर दिया है।
पिछले साल भी कोविड के चलते मेला स्थगित कर दिया गया था। इस बार कोविड संक्रमण कम होने के बावजूद मंजूरी नहीं दी गई। मंगलवार को एसडीएम जसपाल गिल ने स्थानीय विश्राम गृह में आयोजित बैठक के दौरान स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि अभी कोरोना पूरी से समाप्त हो नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में इस वर्ष भी मेला आयोजित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा पहला कर्तव्य श्रद्धालुओं का स्वास्थ्य एवं सुरक्षा है।
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एसडीएम ने बताया कि मेले के आयोजन को लेकर 22 अक्तूबर को जिला उपायुक्त ने श्राइन बोर्ड सदस्यों, कपालमोचन के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं के संचालकों व प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ली थी और मेले के आयोजन पर विचार-विमर्श किया था। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी। उच्चाधिकारियों के आदेश पर पूरी परिस्थितियों की गंभीरता से जांच करते हुए श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को देखते हुए मेले को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
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एसडीएम ने बताया मेले में आने वाले पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों के शासन और प्रशासन को भी पत्र लिखकर मेले के स्थगित होने बारे सूचित किया जाएगा। कपालमोचन की विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बात कर उन्हें अपनी संगत को मेले के स्थगित होने के बारे में जानकारी भेजने के लिए कहा जाएगा।
एसडीएम ने कहा कि मेले में बाहरी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। मुख्य मार्गों पर अवरोधक लगाकर प्रवेश पर रोक भी लगाई जाएगी। एक भी संक्रमित व्यक्ति लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। कपालमोचन स्थित सरोवरों में स्नान पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। तीनों सरोवरों से पानी की निकासी करवाकर खाली करवा दिया जाएगा।
एसजीपीसी सदस्य बलदेव सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से बड़े-बड़े आयोजन किए जा रहे हैं। रैलियों का आयोजन किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में मेेले का आयोजन स्थगित होना खेद की बात है। मेले से भारत का प्राचीन इतिहास जुड़ा है, जिससे मौजूदा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से अवगत होने का अवसर मिलता है।
गुरु रविदास मंदिर डेरा बाबा लाल दास सभा के सदस्य अमरनाथ ज्ञासडा ने कहा कि मेले भारतीय संस्कृति व नैतिक मूल्यों के प्रतीक हैं। कपालमोचन में पिछले पांच दशक से भी अधिक समय से लाखों श्रद्धालु मन्नत पूरी करने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मेले को स्थगित करना सही नहीं है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंचेगी।
कश्यप धर्मशाला कपालमोचन के प्रधान मांगे राम ने कहा कि मेले का आयोजन होना बहुत जरूरी है। मेले से हजारों लोगों को रोजगार जुड़ा हुआ है। मेला स्थगित करना ठीक नहीं है। मेले के आयोजन को लेकर सभी संस्थाओं के संचालक सरकार के अनुसार कार्य करने को तैयार हैं। मेला स्थगित होने से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचेगी।