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Yamuna Nagar News: जमीन पर कब्जे के लिए हिमाचल वन विभाग व मालिक आमने सामने

Sun, 24 Mar 2024 04:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 24 Mar 2024 04:35 AM IST
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Himachal Forest Department and owner face to face for possession of land
यमुनानगर। रेलवे स्टेशन के पास स्थित हिमाचल प्रदेश के पुराने बस अड्डे की जमीन पर कब्जा लेने पर शनिवार को विवाद हो गया। विवाद जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले पक्ष और हिमाचल प्रदेश वन विभाग के बीच हुआ। मालिकाना हक जताने वाला पक्ष शनिवार को जमीन पर कब्जा लेने के लिए जमीन पर पहुंचा था, लेकिन वहां हिमाचल प्रदेश वन विभाग के रेंज ऑफिसर भी पहुंच गए और उन्हें कब्जा लेने से रोक दिया। इस पर दोनों पक्षों में काफी बहस हुई। सूचना पर थाना शहर यमुनानगर पुलिस भी पहुंच गई। इस दौरान मालिकाना हक वाले पक्ष ने कहा कि कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया है, इसके आधार पर वह कब्जा लेने आए हैं। जबकि वन विभाग ने कहा कि उन्होंने फैसले को कोर्ट में पुन: चुनौती दी है।
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जानकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन स्थित महाराजा अग्रसेन चौक के पास करीब दस बीघा और पांच बीसा जमीन पर किसी समय हिमाचल प्रदेश परिवहन का बस अड्डा था। पुराने लोग आज भी इसे हिमाचल बस अड्डा के नाम से जानते हैं। समय बदलने के साथ यह बस अड्डा खत्म कर दिया गया, लेकिन ये जमीन हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन विभाग को दे दी। इससे पहले हरियाणा एंड पंजाब हाईकोर्ट और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट भी हिमाचल प्रदेश वन विभाग के पक्ष में फैसला दे चुका है। वहीं इस जमीन के मालिक ने दोबारा से जस्टिस पीयूष चौधरी की कोर्ट अपील की थी। लोअर कोर्ट ने 19 मार्च को हिमाचल प्रदेश वन विभाग के खिलाफ फैसला दिया। इसके बाद शनिवार को पक्षधर कब्जा लेने आए थे, लेकिन हिमाचल वन विभाग ने इसकी अतिरिक्त जिला न्यायाधीश जगदीश चंद की कोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर एक अप्रैल को निर्णय होगा।
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हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की है यह जमीन
हिमाचल प्रदेश सरकार के अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने कहा कि ये जमीन 1925 से हिमाचल प्रदेश सरकार के पास है। जिस पर हिमाचल प्रदेश के वन विभाग का रेस्ट हाउस बना हुआ है। यहां पर वन विभाग के गार्ड भी रहते हैं। यह जमीन हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज रवि कुमार कौल की है। जिसके अभी तीन हिस्सेदार हैं। सेवानिवृत जज रवि कुमार कौल हाईकोर्ट की मौजूदा जज मंजरी नेहरू कौल के पिता हैं जबकि इसमें विशाल सरोहा व दिल्ली निवासी रोबिन भसीन और रवि कुमार कौल इसके मालिक व दावेदार है। इसे लेकर 2008 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट भी हिमाचल प्रदेश सरकार के पक्ष में फैसला दे चुका है। इस मामले में एक अप्रैल को सुनवाई होनी है। रोबिन भसीन ने कहा कि यह जमीन उनकी है। हिमाचल प्रदेश वन विभाग का जबरन कब्जा है। इसके लिए वे हिमाचल प्रदेश सरकार को चार करोड़ 60 रुपये दे चुके हैं। हिमाचल प्रदेश ने रुपये लेने के बाद दावा छोड़ने को कहा था। परंतु वन विभाग जबरन इस पर कब्जा किए हुए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद भी उन्हें कब्जा नहीं लेने दिया गया है।
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वर्जन
विवाद की सूचना पर वह पहुंचे थे। दोनों पक्षों की बात सुनी गई है। कोर्ट ने एक के पक्ष में फैसला दिया है, लेकिन दूसरे ने दोबारा अपील की है। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं बनती है। कोर्ट के आदेशानुसार ही इसमें काम किया जाएगा। फिलहाल यहां यथा स्थिति बनी हुई है।
-जगदीश चंद्र, प्रभारी, थाना शहर यमुनानगर।
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