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Yamuna Nagar News: स्वास्थ्य विभाग ने बदली दवा, थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चों पर बेअसर

Mon, 28 Oct 2024 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 28 Oct 2024 01:07 AM IST
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Health department changed the medicine, it was ineffective on children suffering from thalassemia
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग ने थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चों को दी जाने वाली दवा में बदलाव कर दिया है। पीजीआई के डॉक्टरों का कहना है कि जो दवा बच्चों को दी जा रही है वह असर नहीं करती। ऐसे में परिजन मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल से दवा न लेकर बाजार में मेडिकल स्टाेर से दवाई खरीद रहे हैं। इससे उन्हें अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
जिले में थैलेसीमिया से ग्रस्त कुल 151 लोग हैं। इनमें बच्चों की संख्या 105 हैं। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चाें काे महीने में एक या इससे भी ज्यादा बार खून चढ़ाना पड़ता है। रक्त चढ़ाने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है। ऐसे में आयरन की मात्रा को कंट्रोल करने तथा अन्य शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बरकरार रखने के लिए बच्चों को दिन में दो से तीन बार एक गोली खिलाई जाती है।
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थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों के के परिजन रजनी, दीपी व मनदीप ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल से पहले उन्हें सिपला कंपनी की यह गोली दी जाती थी। छह माह से सिपला की जगह बजाज कंपनी की दवा दी जा रही है। वह पीजीआई में बच्चों के उपचार के लिए गए तो डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उन्हें अब जो गोली दी जाती है वह बच्चों के शरीर पर असर नहीं करती।
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तब से उन्होंने अस्पताल से न लेकर बाजार में मेडिकल स्टोर से गोली लेनी शुरू कर दी। एक गोली की कीमत 30 रुपये है। रोग के हिसाब से एक दिन में दो से तीन गोली खिलानी पड़ती है। इसलिए रोजाना का औसतन खर्च 100 रुपये है। महीने में उन्हें 3000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। वह दवा की कंपनी बदलने को लेकर पीएमओ व विधायक से भी मिले, लेकिन अभी तक वही दवाई दी जा रही है।

थैलेसीमिया बच्चों को उनके माता-पिता से मिलने वाला आनुवांशिक रक्त रोग है। इस रोग की पहचान बच्चे में तीन महीने बाद हो पाती है। आमतौर पर हर सामान्य व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है, लेकिन थैलेसीमिया से पीड़ित रोगी के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र घटकर सिर्फ 20 दिन ही रह जाती है। इसका सीधा असर व्यक्ति के हीमोग्लोबिन पर पड़ता है, जिसके कम होने पर व्यक्ति एनीमिया का शिकार हो जाता है और हर समय किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहने लगता है।

मुख्यालय से खरीदी जाती है दवा : पीएमओ
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. नवजोत कौर का कहना है कि थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चों को जो दवा दी जा रही है वह टेंडर प्रक्रिया के माध्यम मुख्यालय स्तर पर खरीदी जाती है। दवा कब बदली गई इसकी जानकारी नहीं है। परिजनों की इस समस्या से वह मुख्यालय को अवगत कराएंगी।
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