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Yamuna Nagar News: हथिनीकुंड बैराज का चबूतरा खाली, प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट हुई गायब
Thu, 27 Nov 2025 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 27 Nov 2025 12:10 AM IST
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हथिनी कुंड बैराज पर जलस्तर कम होने से दिखाई देने लगी जमीन। संवाद
प्रतापनगर। सर्दियों के आगमन के साथ जिस हथिनीकुंड बैराज का इलाका हर वर्ष विदेशी मेहमानों प्रवासी पक्षियों की मधुर चहचहाहट से गुलजार रहता था, वह इस बार वह वीरान और खामोश दिखाई दे रहा है। बैराज के चबूतरे पर सैकड़ों हंस, बतख और अन्य प्रवासी प्रजातियां दूर देशों से लंबी उड़ान भरकर सर्दियों में समय बिताने आती थी। इन दिनों यह खाली पड़ा हुआ है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस वर्ष बैराज क्षेत्र में अचानक बढ़ी मानवीय गतिविधि और विशेष रूप से पानी में लगातार चल रही नाव ने प्रवासी पक्षियों के व्यवहार पर प्रतिकूल असर डाला है। वहीं, पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू होने के कारण बैराज का जलस्तर भी कम हो गया है। ऐसे में हथिनी कुंड बैराज पर यमुना नदी की जमीन भी नजर आने लगी है।
बैराज के पास रहने वाले लोगों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से वे नवंबर से फरवरी तक विभिन्न देशों से आने वाले इन प्रवासी पक्षियों का सौंदर्य देखते आए हैं। पक्षियों के झुंडों का एक साथ उड़ना, पानी में तैरते सफेद हंसों की कतारें और सूर्योदय के समय उनकी चहचहाहट यह सब अब यादों में बदलता जा रहा है। स्थानीय निवासी सतीश कुमार, दाऊद , विकास, अंकित पाल, सद्दाम आदि का कहना है कि हर साल सुबह-सुबह यहां इतना सुरीला माहौल होता था कि लोग खासतौर पर सैर के लिए आते थे। पर्यावरण प्रेमी और बर्ड वॉचर बलबीर सिंह, जगमोहन सिंह का कहना है, हथिनीकुंड बैराज उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण पक्षी अवरोधन स्थल है। यहाँ से हंस और अन्य प्रजातियां हिमालय पार कर मध्य एशिया से हर साल आती है।
प्रवासी पक्षियों के लिए खतरा बढ़ा
विशेषज्ञों का मानना है कि नावों के चलते पक्षियों को शारीरिक खतरे के साथ मानसिक तनाव भी होता है। लगातार उड़कर दूसरी जगह शरण ढूंढ़ने से उनके शरीर में ऊर्जा की भारी खपत होती है, जिससे कई बार वे भोजन की कमी के कारण कमजोर पड़ जाते हैं। इसके अलावा पर्यावरणीय दृष्टि से भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। प्रवासी पक्षी न केवल स्थानीय जैव विविधता का हिस्सा हैं बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उधर, वन एवं वन्य जीव विभाग का कहना है मामले की जानकारी उच्च स्तर पर भेजी गई है और जल्द ही निरीक्षण किया जाएगा।
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बैराज के पास रहने वाले लोगों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से वे नवंबर से फरवरी तक विभिन्न देशों से आने वाले इन प्रवासी पक्षियों का सौंदर्य देखते आए हैं। पक्षियों के झुंडों का एक साथ उड़ना, पानी में तैरते सफेद हंसों की कतारें और सूर्योदय के समय उनकी चहचहाहट यह सब अब यादों में बदलता जा रहा है। स्थानीय निवासी सतीश कुमार, दाऊद , विकास, अंकित पाल, सद्दाम आदि का कहना है कि हर साल सुबह-सुबह यहां इतना सुरीला माहौल होता था कि लोग खासतौर पर सैर के लिए आते थे। पर्यावरण प्रेमी और बर्ड वॉचर बलबीर सिंह, जगमोहन सिंह का कहना है, हथिनीकुंड बैराज उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण पक्षी अवरोधन स्थल है। यहाँ से हंस और अन्य प्रजातियां हिमालय पार कर मध्य एशिया से हर साल आती है।
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प्रवासी पक्षियों के लिए खतरा बढ़ा
विशेषज्ञों का मानना है कि नावों के चलते पक्षियों को शारीरिक खतरे के साथ मानसिक तनाव भी होता है। लगातार उड़कर दूसरी जगह शरण ढूंढ़ने से उनके शरीर में ऊर्जा की भारी खपत होती है, जिससे कई बार वे भोजन की कमी के कारण कमजोर पड़ जाते हैं। इसके अलावा पर्यावरणीय दृष्टि से भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। प्रवासी पक्षी न केवल स्थानीय जैव विविधता का हिस्सा हैं बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उधर, वन एवं वन्य जीव विभाग का कहना है मामले की जानकारी उच्च स्तर पर भेजी गई है और जल्द ही निरीक्षण किया जाएगा।
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हथिनी कुंड बैराज पर जलस्तर कम होने से दिखाई देने लगी जमीन। संवाद