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गुप्त नवरात्र : दस महाविद्याओं की पूजा का विधान

Mon, 12 Feb 2024 03:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 12 Feb 2024 03:03 AM IST
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Gupt Navratri: Method of worship of ten Mahavidyas
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। माघ मास के गुप्त नवरात्र 10 फरवरी से शुरू हो गए हैं, जो 18 फरवरी तक रहेंगे। ज्योतिषाचार्य की मानें तो इन नवरात्र में दस महाविद्याओं की पूजा होती है। साथ ही इस दौरान हर राशि वालों के लिए अलग-अलग पूजा विधान है, जो विशेष फलदायी हैं।

शिव शक्ति कर्म कांड संस्थान (हरियाबांस) के पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं। इसमें दो प्रत्यक्ष व दो अप्रत्यक्ष होते हैं। अप्रत्यक्ष नवरात्र को ही गुप्त नवरात्र कहते हैं। प्रत्यक्ष तौर चैत्र व आश्विन मास के नवरात्र होते हैं। अप्रत्यक्ष यानी गुप्त नवरात्र आषाढ़ व माघ मास के आते हैं। चैत्र व शारदीय नवरात्र में मां भगवती के नौ रूपों की पूजा उपासना होती हैं, वहीं गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है।
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गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना कर ऋषि विश्वामित्र अद्भुत शक्तियों के स्वामी बन गए। इसी तरह लंकापति रावण के पुत्र मेघनाद ने अतुलनीय शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रि में साधना की थी। शुक्राचार्य ने मेघनाद को परामर्श दिया था कि गुप्त नवरात्रों में अपनी कुलदेवी निकुम्बाला की साधना कर वह अजेय बनाने वाली शक्तियों का स्वामी बन सकता है।
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महेश शांडिल्य ने बताया कि इस तरह गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है। इनमें मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां षोडशी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी, मां कमला की पूजा शामिल है। जो नवरात्रि के दिनों मुताबिक होती है। इसके अलावा इन गुप्त नवरात्रि में राशि वार अलग-अलग पूजा विधान भी है, जो विशेषदायी होंगे।

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राशि वार पूजा विधान
मेष : स्कंदमाता की पूजा व दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ।

वृषभ : देवी के महागौरी स्वरूप की पूजा व ललिता सहस्त्रनाम का पाठ।
मिथुन : देवी यंत्र स्थापित कर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा।

कर्क : मां शैलपुत्री की उपासना व लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ।
सिंह : मां कूष्मांडा की पूजा व दुर्गा मंत्रों का जाप।

कन्या : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा व लक्ष्मी मंत्रों का जाप।
तुला : महागौरी की पूजा व काली चालीसा का पाठ।

वृश्चिक : स्कंदमाता की पूजा व दुर्गा सप्तशती का पाठ।
धनु : मां चंद्रघंटा की आराधना व उनके मंत्रों का जाप।

मकर : मां काली की पूजा व नर्वाण मंत्रों का जाप।
कुंभ : मां कालरात्रि की पूजा व देवी कवच का पाठ।

मीन : मां चंद्रघंटा की पूजा व हल्दी की माला से बगलामुखी मंत्रों का जाप।
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