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नाबालिग से दुराचार के दोषी को दस साल की कैद
यमुनानगर
Updated Thu, 09 Jan 2014 05:27 PM IST
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शादी का झांसा देकर नाबालिग का अपहरण करने के बाद उससे दुराचार करने के
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दोषी को कोर्ट ने 10 साल की कैद और 30 हजार रुपये जुर्माना देने की सजा
सुनाई है।
जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। बुधवार को यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब 9 महीने तक चली सुनवाई के दौरान 19 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
जानकारी के अनुसार 7 मार्च 2013 को शहर पुलिस जगाधरी ने इंद्रावास कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर वाल्मीकि नगर नांदेड निवासी संदीप (जो इंद्रावास कॉलोनी में अपनी मौसी के पास रह रहा था) के खिलाफ उसकी नाबालिग बेटी के अपहरण का केस दर्ज किया था। जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने नाबालिग और आरोपी को नांदेड से काबू कर लिया।
नाबालिग ने पुलिस को बताया कि 22 फरवरी 2013 को करीब साढे़ 12 बजे जब वह स्कूल से अपने घर आई, कुछ देर बाद शांति कॉलोनी निवासी उसकी सहपाठी उसके घर आई। जिसने उसे कहा कि वह उसके घर चले, ताकि वहां पर प्रोजेक्ट बना सकें। इसके बाद वह अपनी सहेली के घर चली गई।
घर जाने के बाद उसकी सहेली ने उसके लिए चाय बनाई और फोन करके संदीप तथा उसके साथी अजय को अपने घर बुला लिया। आधे घंटे में दोनों उसके घर पहुंच गए। जब उसकी सहेली ने उसे चाय पिलाई, तो वह बेहोश हो गई। इसके बाद संदीप तथा अजय उसे कार में बिठाकर अपने साथ ले गए।
संदीप ने एकांत जगह पर उसके साथ दुराचार किया। इस घटना को किसी को बताने पर संदीप ने उसके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी। इस कारण वह डर गई। इसके बाद संदीप उसे यमुनानगर से पानीपत ले गया। जहां से वह उसे भोपाल से होते हुए औरंगाबाद अपने घर ले गया।
जहां पर संदीप ने उसके साथ दुराचार किया। किसी तरह से उसने मामले की सूचना अपने परिजनों को दी। इसके बाद परिजन मौके पर पहुंच गए और उसे अपने साथ ले आए। पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल करवाया। इसमें उसके साथ दुराचार की पुष्टि हुई। पुलिस ने इस मामले में भादंसं की धारा 376 तथा साजिश की धारा 120 बी को भी जोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी संदीप को 11 मार्च 2013 को नांदेड से गिरफ्तार किया।
इसके बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया। रिमांड के बाद पुलिस ने फिर से संदीप को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। कुछ दिनों के बाद पुलिस ने पीड़िता की सहेली तथा आरोपी के साथी अजय को भी गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में करीब 9 महीने तक चली सुनवाई के दौरान 19 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल ने 4 जनवरी को आरोपी संदीप को दोषी करार दिया, जबकि पीड़िता की सहेली को बरी कर दिया गया।
बुधवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने संदीप को दुराचार का दोषी (भादंसं की धारा 376 में) करार देते हुए 10 साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि भादंसं की धारा 366 में 10 साल की कैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माना तथा सेक्शन-3 में 10 साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। बुधवार को यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब 9 महीने तक चली सुनवाई के दौरान 19 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
जानकारी के अनुसार 7 मार्च 2013 को शहर पुलिस जगाधरी ने इंद्रावास कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर वाल्मीकि नगर नांदेड निवासी संदीप (जो इंद्रावास कॉलोनी में अपनी मौसी के पास रह रहा था) के खिलाफ उसकी नाबालिग बेटी के अपहरण का केस दर्ज किया था। जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने नाबालिग और आरोपी को नांदेड से काबू कर लिया।
नाबालिग ने पुलिस को बताया कि 22 फरवरी 2013 को करीब साढे़ 12 बजे जब वह स्कूल से अपने घर आई, कुछ देर बाद शांति कॉलोनी निवासी उसकी सहपाठी उसके घर आई। जिसने उसे कहा कि वह उसके घर चले, ताकि वहां पर प्रोजेक्ट बना सकें। इसके बाद वह अपनी सहेली के घर चली गई।
घर जाने के बाद उसकी सहेली ने उसके लिए चाय बनाई और फोन करके संदीप तथा उसके साथी अजय को अपने घर बुला लिया। आधे घंटे में दोनों उसके घर पहुंच गए। जब उसकी सहेली ने उसे चाय पिलाई, तो वह बेहोश हो गई। इसके बाद संदीप तथा अजय उसे कार में बिठाकर अपने साथ ले गए।
संदीप ने एकांत जगह पर उसके साथ दुराचार किया। इस घटना को किसी को बताने पर संदीप ने उसके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी। इस कारण वह डर गई। इसके बाद संदीप उसे यमुनानगर से पानीपत ले गया। जहां से वह उसे भोपाल से होते हुए औरंगाबाद अपने घर ले गया।
जहां पर संदीप ने उसके साथ दुराचार किया। किसी तरह से उसने मामले की सूचना अपने परिजनों को दी। इसके बाद परिजन मौके पर पहुंच गए और उसे अपने साथ ले आए। पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल करवाया। इसमें उसके साथ दुराचार की पुष्टि हुई। पुलिस ने इस मामले में भादंसं की धारा 376 तथा साजिश की धारा 120 बी को भी जोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी संदीप को 11 मार्च 2013 को नांदेड से गिरफ्तार किया।
इसके बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया। रिमांड के बाद पुलिस ने फिर से संदीप को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। कुछ दिनों के बाद पुलिस ने पीड़िता की सहेली तथा आरोपी के साथी अजय को भी गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में करीब 9 महीने तक चली सुनवाई के दौरान 19 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश बंसल ने 4 जनवरी को आरोपी संदीप को दोषी करार दिया, जबकि पीड़िता की सहेली को बरी कर दिया गया।
बुधवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने संदीप को दुराचार का दोषी (भादंसं की धारा 376 में) करार देते हुए 10 साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि भादंसं की धारा 366 में 10 साल की कैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माना तथा सेक्शन-3 में 10 साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।