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कलेसर जंगल में तीन माह बाद दिखाई दिए गजराज, फोटो किए शूट
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कलेसर जंगल में विचरण करता जंगली हाथी।
- फोटो : Yamuna Nagar
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प्रतापनगर। यमुनानगर के कलेसर जंगल की शान गजराज की आखिरकार तीन माह बाद फिर से चिंघाड़ सुनाई दी। जिसकी पुष्टि वन्य प्राणी विभाग कलेसर ने की है। दोनों हाथी हिमाचल प्रदेश के सिंबलवाड़ा में चले गये थे। जिसके चलते पिछले काफी दिनों से हाथियों की चिंघाड़ों से जंगल सूना पड़ा था।
जंगल में हाथियों की मौजूदगी का एहसास आसपास के लोग उनकी मौज-मस्ती देखकर करते थे। लेकिन पिछले तीन महीने से लोगों को हाथियों की गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही थीं। विभाग के अनुसार हाथी साथ लगते जंगलों में कुछ दिन बिताकर कर वापस भी आ जाते थे लेकिन इस बार सिंबलवाड़ा के जंगल में दोनों हाथियों का ठहराव कुछ लंबा रहा। यमुनानगर का राष्ट्रीय उद्यान कलेसर जंगल हरियाणा का सबसे बड़ा जंगल है। जिसमें गजराज समेत दर्जनों की संख्या में छोटे बड़े जंगली जीव रहते हैं। मगर तीन महीनें से जंगल के दोनों हाथी दिखाई नहीं दिए। ऐसे में विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी थी।
कलेसर जंगल में हाथियों की अनुपस्थिति के बाद वन्य प्राणी विभाग ने साथ लगते हिमाचल प्रदेश के सिंबलवाड़ा और देहरादून के राजाजी नेशनल पार्क में जांच शुरू की और अपने हाथियों की पहचान के लिए कर्मचारियों को भेजा। कलेसर जंगल के दोनों हाथों की उपस्थिति सिंबलवाड़ा में दर्ज की गई। जिससे वन्य प्राणी विभाग ने राहत की सांस ली थी।
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चिंघाड़ सुनते ही जंगल में पहुंचे कर्मचारी, फोटो किया शूट
वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर लीलू राम ने बताया कि करीब 12 हजार एकड़ में फैले कलेसर राष्ट्रीय उद्यान में पिछले लंबे समय से दो हाथी रह रहे हैं। साथ लगते हिमाचल प्रदेश के सिंबलवाड़ा और देहरादून के राजाजी नेशनल पार्क में भी आते जाते रहते हैं लेकिन इस बार दोनों हाथी जंगल से निकलकर हिमाचल प्रदेश के सिंबलवाड़ा के जंगल में पहुंच गए थे। कलेसर में पिछले दो दिनों से हाथियों की चिंघाड़ उनको सुनाई दी। इसके बाद कर्मचारियों के साथ जंगल पहुंचे और गजराज को देखा और उनका फोटो भी शूट किया।
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जंगल में हाथियों की मौजूदगी का एहसास आसपास के लोग उनकी मौज-मस्ती देखकर करते थे। लेकिन पिछले तीन महीने से लोगों को हाथियों की गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही थीं। विभाग के अनुसार हाथी साथ लगते जंगलों में कुछ दिन बिताकर कर वापस भी आ जाते थे लेकिन इस बार सिंबलवाड़ा के जंगल में दोनों हाथियों का ठहराव कुछ लंबा रहा। यमुनानगर का राष्ट्रीय उद्यान कलेसर जंगल हरियाणा का सबसे बड़ा जंगल है। जिसमें गजराज समेत दर्जनों की संख्या में छोटे बड़े जंगली जीव रहते हैं। मगर तीन महीनें से जंगल के दोनों हाथी दिखाई नहीं दिए। ऐसे में विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी थी।
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कलेसर जंगल में हाथियों की अनुपस्थिति के बाद वन्य प्राणी विभाग ने साथ लगते हिमाचल प्रदेश के सिंबलवाड़ा और देहरादून के राजाजी नेशनल पार्क में जांच शुरू की और अपने हाथियों की पहचान के लिए कर्मचारियों को भेजा। कलेसर जंगल के दोनों हाथों की उपस्थिति सिंबलवाड़ा में दर्ज की गई। जिससे वन्य प्राणी विभाग ने राहत की सांस ली थी।
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चिंघाड़ सुनते ही जंगल में पहुंचे कर्मचारी, फोटो किया शूट
वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर लीलू राम ने बताया कि करीब 12 हजार एकड़ में फैले कलेसर राष्ट्रीय उद्यान में पिछले लंबे समय से दो हाथी रह रहे हैं। साथ लगते हिमाचल प्रदेश के सिंबलवाड़ा और देहरादून के राजाजी नेशनल पार्क में भी आते जाते रहते हैं लेकिन इस बार दोनों हाथी जंगल से निकलकर हिमाचल प्रदेश के सिंबलवाड़ा के जंगल में पहुंच गए थे। कलेसर में पिछले दो दिनों से हाथियों की चिंघाड़ उनको सुनाई दी। इसके बाद कर्मचारियों के साथ जंगल पहुंचे और गजराज को देखा और उनका फोटो भी शूट किया।