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Yamuna Nagar News: बारिश से शिमला मिर्च की पौध में लगी फंगस
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यमुनानगर। जिले में कई दिनों से लगातार रूक-रूक कर बारिश हो रही है। एक-दो बारिश तो ऐसी हुई कि चारों तरफ पानी ही पानी हो गया। इस बारिश से सब्जी उत्पादक किसानों को काफी नुकसान हुआ है। किसानों ने खेतों में लगाने के लिए शिमला मिर्च की जो पौधे तैयार की थी वह भी बारिश की भेंट चढ़ गई है। बारिश के कारण पौधों में फंगस लग गई है। वहीं बारिश से खेतों में पानी भरा हुआ है। इससे खीरा लगाने में भी करीब एक माह की देरी हो चुकी है।
अहड़वाला गांव निवासी प्रगतिशील किसान फूल चंद ने बताया कि बागवानी विभाग की योजना के अनुसार उसने खेत में नेटहाउस लगाया हुआ है। इस बार खेत में शिमला मिर्च के पौधे लगाने थे। इसके लिए उसने खेत में साढ़े 13 हजार पौधों की पौध तैयार की थी। जिसमें से 15 दिन पहले ही साढ़े 10 हजार पौधे खेत में लगा भी दिए थे। रूक-रूक कर बारिश हो रही है। इससे खेत सूख नहीं पा रहे। लगातार पानी भरा रहने से शिमला मिर्च के पौधों में फंगस लग गई। जिससे पौधे गल कर खराब हो गए। पौध तैयार करने व लगाने पर करीब 22 हजार रुपये खर्च आया था। अब शिमला मिर्च के पौधे भी नहीं बचे हैं। अब पौधे लगाने पर पौधों से तीन माह बाद शिमला मिर्च की तुड़ाई शुरू हो जाती। अब शिमला मिर्च की जगह खीरा लगाने पर विचार कर रहे हैं। सरकार को खराब हुए पौधों का मुआवजा देना चाहिए।
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टमाटर के 30 प्रतिशत पौधे खराब:
टीन का माजरा गांव निवासी प्रगतिशील किसान रमन अंटवाल ने बताया कि उसने टमाटर की एनएस 4266 नामधारी किस्म के 10 हजार पौधे तैयार किए थे। 22 अगस्त को ही नेटहाउस में पौधे लगाने का काम शुरू किया था। जिस पर करीब 40 हजार रुपये खर्च आया था। 65 से 70 दिन बाद पौधों से टमाटर की तुड़ाई शुरू हो जाती। लेकिन तेज बारिश की वजह से नेटहाउस में बारिश का पानी चला गया। जिससे 30 प्रतिशत पौधे खराब हो गए। उन्होंने बताया कि न केवल टमाटर के पौधों का नुकसान हुआ है बल्कि खेत गीले होने से इस बार खीरे के पौधे लगाने में भी करीब एक माह की देरी हो रही है। जिससे काफी नुकसान हो चुका है।
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इस बार देरी से बारिश हुई है: कृष्ण सोलंकी
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. कृष्ण सोलंकी ने बताया कि इस बार बारिश देरी से और तेज हुई है। जिससे विभिन्न सब्जी के पौधों पर काफी असर पड़ा है। किसान विकल्प के तौर पर अन्य सब्जी लगा सकते हैं। इसके बारे में वह कभी भी कार्यालय में आकर मिल सकते हैं।
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अहड़वाला गांव निवासी प्रगतिशील किसान फूल चंद ने बताया कि बागवानी विभाग की योजना के अनुसार उसने खेत में नेटहाउस लगाया हुआ है। इस बार खेत में शिमला मिर्च के पौधे लगाने थे। इसके लिए उसने खेत में साढ़े 13 हजार पौधों की पौध तैयार की थी। जिसमें से 15 दिन पहले ही साढ़े 10 हजार पौधे खेत में लगा भी दिए थे। रूक-रूक कर बारिश हो रही है। इससे खेत सूख नहीं पा रहे। लगातार पानी भरा रहने से शिमला मिर्च के पौधों में फंगस लग गई। जिससे पौधे गल कर खराब हो गए। पौध तैयार करने व लगाने पर करीब 22 हजार रुपये खर्च आया था। अब शिमला मिर्च के पौधे भी नहीं बचे हैं। अब पौधे लगाने पर पौधों से तीन माह बाद शिमला मिर्च की तुड़ाई शुरू हो जाती। अब शिमला मिर्च की जगह खीरा लगाने पर विचार कर रहे हैं। सरकार को खराब हुए पौधों का मुआवजा देना चाहिए।
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टमाटर के 30 प्रतिशत पौधे खराब:
टीन का माजरा गांव निवासी प्रगतिशील किसान रमन अंटवाल ने बताया कि उसने टमाटर की एनएस 4266 नामधारी किस्म के 10 हजार पौधे तैयार किए थे। 22 अगस्त को ही नेटहाउस में पौधे लगाने का काम शुरू किया था। जिस पर करीब 40 हजार रुपये खर्च आया था। 65 से 70 दिन बाद पौधों से टमाटर की तुड़ाई शुरू हो जाती। लेकिन तेज बारिश की वजह से नेटहाउस में बारिश का पानी चला गया। जिससे 30 प्रतिशत पौधे खराब हो गए। उन्होंने बताया कि न केवल टमाटर के पौधों का नुकसान हुआ है बल्कि खेत गीले होने से इस बार खीरे के पौधे लगाने में भी करीब एक माह की देरी हो रही है। जिससे काफी नुकसान हो चुका है।
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इस बार देरी से बारिश हुई है: कृष्ण सोलंकी
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. कृष्ण सोलंकी ने बताया कि इस बार बारिश देरी से और तेज हुई है। जिससे विभिन्न सब्जी के पौधों पर काफी असर पड़ा है। किसान विकल्प के तौर पर अन्य सब्जी लगा सकते हैं। इसके बारे में वह कभी भी कार्यालय में आकर मिल सकते हैं।