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Yamuna Nagar News: ताजेवाला से लालढांग तक 23 करोड़ से होगा ढलान व मोड़ में सुधार

Mon, 25 May 2026 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 25 May 2026 12:46 AM IST
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From Tajewala to Laldhang
ताजेवाला से लालढांग मार्ग पर हाईवे के क्षतिग्रस्त बरम। संवाद
राजेश कुमार
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यमुनानगर। ताजेवाला से लालढांग तक करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में सड़क की स्थिति सुधारने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने 23 करोड़ रुपये की लागत से विशेष निर्माण और सुरक्षा कार्य कराने का फैसला लिया है। इसके लिए निविदा लगाई गई है। प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण शुरू कराया जाएगा।
अभी मानसून आने वाला है। ऐसे में एनएचएआई बारिश के बाद ही काम शुरू करवाएगा। करीब नौ माह में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस एरिया में 15 से अधिक लोगों की मौत और 25 से ज्यादा घायल हो चुके हैं। वहीं वाहनों के पलटने की संख्या तो बेहिसाब है। यह क्षेत्र लंबे समय से सड़क हादसों और खराब सड़क के कारण चर्चा में रहा है।
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बरसात और भारी वाहनों के दबाव के चलते सड़क बार-बार टूट जाती है, जिससे बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं। इन गड्ढों के कारण वाहन चालक नियंत्रण खो बैठते हैं और दुर्घटनाएं होती रहती हैं। अब आईआईटी रोपड़ की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर यहां ओवरले, ड्रेनेज और प्रोटेक्शन वर्क कराया जाएगा ताकि सड़क लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनी रहे।
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जगाधरी-पांवटा साहिब नेशनल हाईवे पर भारतमाला परियोजना के तहत करीब 1200 करोड़ रुपये का निर्माण कार्य चल रहा है। ताजेवाला से लालढांग तक का हिस्सा कलेसर वन्यजीव क्षेत्र से होकर गुजरता है।
वन क्षेत्र होने के कारण यहां सड़क का चौड़ीकरण या पूर्ण पुनर्निर्माण संभव नहीं है। इसी वजह से सड़क को बार-बार अस्थायी रूप से ठीक किया जाता रहा। कुछ दिनों बाद फिर वही स्थिति बन जाती थी। हाईवे पर सबसे बड़ी समस्या भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही है। हिमाचल प्रदेश से खनन सामग्री लेकर आने वाले ट्रक बड़ी संख्या में इसी मार्ग से गुजरते हैं।
कई बार इन ट्रकों से भारी पत्थर सड़क पर गिर जाते हैं, जिससे वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। सड़क पर बने गड्ढों और ढलानों के कारण यह खतरा और बढ़ जाता है।
इसके अलावा कलेसर नेशनल पार्क क्षेत्र होने के कारण जंगली जानवर भी अचानक सड़क पर आ जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार आईआईटी रोपड़ की टीम ने मौके का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सड़क पर ओवरले तकनीक अपनाकर नई मजबूत परत बिछाई जाए।
पानी की निकासी के लिए सॉफ्टर ड्रेन तकनीक से ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। जिन स्थानों पर ढलान अधिक है, वहां सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। इसके साथ ही मोड़ों को भी तकनीकी रूप से सुधारा जाएगा। सड़क किनारे मेटल बीम क्रेश बैरियर लगाए जाएंगे ताकि वाहन अनियंत्रित होकर खाई या जंगल क्षेत्र में न गिरें। टूट चुकी रेलिंग को भी बदला जाएगा। संवाद

आईआईटी रोपड़ की रिपोर्ट के आधार पर निर्माण और मेंटेनेंस कार्य की योजना तैयार की गई है। करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से सड़क सुरक्षा और मजबूती से जुड़े सभी कार्य कराए जाएंगे। निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। -ऋषभ गोयल, टेक्निकल मैनेजर, एनएचएआई।

ताजेवाला से लालढांग मार्ग पर हाईवे के क्षतिग्रस्त बरम। संवाद

ताजेवाला से लालढांग मार्ग पर हाईवे के क्षतिग्रस्त बरम। संवाद

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