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Yamuna Nagar News: पहले ओलावृष्टि अब दामों में कमी से सब्जी उत्पादक परेशान

Sat, 18 May 2024 05:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 18 May 2024 05:48 AM IST
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First hailstorm, now vegetable growers worried due to drop in prices
साहिल घई
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साढौरा। क्षेत्र के किसानों के खेतों में खड़ी टमाटर व शिमला मिर्च की फसलें फरवरी में ओलावृष्टि के कारण तबाह होने से किसानों को लगभग दो करोड़ का नुकसान सहना पड़ा था। इसके बाद किसानों ने घाटे की भरपाई की उम्मीद से अपने खेतों में फिर से मेहनत करके टमाटर, शिमला मिर्च व खीरे की फसलें लगाई। मई के पहले सप्ताह में जब यह फसलें मंडी में पहुंचनी शुरु हुई तो बेहतर दाम मिलने से किसान ओलावृष्टि से हुए नुकसान को भूल गए। अब इन सब्जियों के दामों में बेतहाशा कमी के कारण उनकी खुशी मायूसी में बदल गई है।
किसानों को नहीं मिल पा रही लागत
पार्षद व सब्जी उत्पादक किसान अंकुश चौहान ने बताया कि मई के शुरुआती दिनों में टमाटर का 25 किलो का क्रेट 400 रुपये का बिक रहा था। अब इसके दाम घटकर 100 रुपये हो गए हैं इसी तरह 15 रुपये किलो बिकने वाली शिमला मिर्च के दाम 2 से 5 रुपये किलो हो गए है। जबकि खीरे की 20 किलो की पन्नी पहले के 200 रुपए प्रति पन्नी के मुकाबले अब केवल 20 रुपए की ही बिक पा रही है। सब्जियों के दामों में भारी गिरावट से किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है। संवाद
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मांग में बढ़ोतरी न होने से परेशानी
सब्जी उत्पादक किसान मंगल सिंह ने बताया कि अभी तक लू न चलने से तापमान अपेक्षाकृत कम रहने के कारण टमाटर, शिमला मिर्च व खीरे की उपज अचानक बढ़ गई है। जबकि लू न चलने के कारण ही मांग में बढ़ोतरी न होने से सब्जियों के दामों में काफी गिरावट हो गई है। उन्होंने बताया कि जैसे ही लू चलने के अलावा गर्मी बढ़ती है तो टमाटर की मांग भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि यूपी, उतराखंड, चंडीगढ़ व स्थानीय मंडी में इन सब्जियों के दामों में गिरावट आ रही है।
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सब्जी उत्पादन से चलाते हैं परिवार का गुजारा
रजत राणा ने बताया कि कस्बे में ही लगभग सौ एकड़ में टमाटर की बिजाई हुई है। बाकी देहात में भी 50 एकड़ में टमाटर की बिजाई हुई है। शिमला मिर्च व खीरा भी लगभग 20 से अधिक एकड़ में लगाया हुआ है। टमाटर को लगाने पर लगभग 50 हजार प्रति एकड़ की लागत आई है। अधिकतर किसानों के पास कम जमीन होने के कारण यह किसान सब्जी पैदा करके अपना गुजारा करते हैं। लेकिन टमाटर, शिमला मिर्च व खीरे के दामों में आई गिरावट से इन किसानों के परिवारों के समक्ष आर्थिंक संकट बन आया है।
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