यमुनानगर
किसानों का गन्ने और गेहूं का भुगतान ना होने पर भारतीय किसान संघ ने सरकार के प्रति अपना विरोध व्यक्त किया और सरकार से मांग की कि जल्द ही किसानों को उनकी गेहूं और गन्ने का भुगतान किया जाए। भारतीय किसान संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रतन सिंह देवधर ने कहा कि सरकार द्वारा प्रदेश में गेंहू की खरीद 20 अप्रैल को शुरू कर दी गई थी, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी बिके हुए गेहूं के भुगतान का कोई अता-पता नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे सरकार किसानों और आढ़तियों को आपस में उलझा कर रखना चाहती हैं। एक ओर तो देश महामारी की चपेट में है, जहां सभी काम-धंधे बन्द है, लेकिन देश का किसान दिन-रात मेहनत करके देश के लिए अन्न पैदा कर रहा है। जो किसी भी फैक्ट्री में किसी भी कीमत में नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद भी देश का अन्नदाता सरकार द्वारा तय किए गए दामों पर अपनी फसल को बेच रहा हैं, लेकिन सरकार द्वारा किसान को उनकी मेहनत का भुगतान ना करके, किसानों के साथ अनदेखी की जा रही है। इस महामारी के समय में सरकार हर वर्ग के बारे में सोच रही है। सबको कुछ ना कुछ राहत दे रही है, लेकिन देश की भूख को शांत करने वाले अन्नदाता को उसकी मेहनत का पैसा नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ना उनकी गेहूं का भुगतान किया जा रहा है और ना ही गन्ने का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैसे तो मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री खुद को किसान हितैषी बताते है, लेकिन किसानों के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं है। उल्टा हर रोज नई-नई किसान विरोधी योजनाएं लागू करके किसानों को परेशान करने का काम करते है। अपने एशो आराम में और खुद के लिए करोड़ों रुपये की नई गाड़िया खरीदने में कोई कमी नहीं कर रहे है। अपने विधायकों और खुद के भत्ते बढ़ाने में एक मिनट का समय लगाते है, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत के पैसे भी समय से नहीं दिलवा पाते है। उन्होंने कहा कि किसानों को इन दिनों नई फसलों की बुवाई करने में और उनको तैयार करने में अधिक पैसों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर किसानों के प्रति सरकार का ऐसा ही रवैया रहा तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।