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बॉर्डर खाली व कोरोना की पाबंदी हटने पर भी नहीं मिल रही लेटनाइट बस की सुविधा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 01:17 AM IST
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Farmers' movement and Corona's restrictions end, lack of buses persists
दिल्ली बॉर्डर से किसानों के धरने और कोरोना की पाबंदियों के कारण रोडवेज बसों का संचालन सीमित कर दिया गया था, लेकिन समस्या खत्म होने के बाद भी यात्रियों को राहत नहीं मिल रही है। स्थिति यह है कि शाम ढलने के बाद अधिकतर स्थानों के लिए यमुनानगर रोडवेज डिपो से बसों का टोटा बना हुआ है, जिससे आए दिन यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि समस्या संबंधी शिकायतों के बावजूद रोडवेज की ओर से सुध नहीं ली जा रही है।
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देर शाम को बस नहीं मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी दिल्ली जाने वाले लोगों को हो रही है। यमुनानगर बस अड्डे से लोगों को दिल्ली के लिए पहली बस भले ही सुबह तीन बजकर 50 मिनट पर मिल जाती है, परंतु आखिरी बस शाम पांच बजे जाती है। जबकि कोरोना महामारी से पहले देर रात तक दिल्ली बस जाती थी।
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कोरोना काल में रोडवेज अधिकारी कहने लगे कि दिल्ली बॉर्डर पर किसान बैठे हैं। इसके अलावा सरकार ने कोरोना महामारी के चलते पाबंदियां लगाई हुई हैं, जिस कारण दिल्ली के लिए बस नहीं चलाई जा रही, परंतु दिल्ली बार्डर से किसानों के उठने और कोरोना नियमों में ढील के बावजूद रोडवेज बसों का संचालन सुचारु नहीं हो सका है।
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यमुनानगर से चंडीगढ़ के लिए पहली बस सुबह सवा पांच बजे चलती है, लेकिन चार बजे के बाद रोडवेज की बस नहीं है। इसी तरह अंबाला के लिए आखिरी बस शाम साढ़े छह बजे, नारायणगढ़ के लिए छह बजकर 20 मिनट, प्रतापनगर के लिए सात बजे, छछरौली के लिए छह बजकर 20 मिनट, करनाल के लिए साढ़े सात बजे, कुरुक्षेत्र के लिए छह बजकर 50 मिनट पर है। इसके बाद सवारियों को मुश्किलों को सामना करना पड़ता है।
रोडवेज के बेड़े में कुछ साल पहले तक 174 बसें हुआ करती थी, जो अब घट कर 135 रह गई हैं। इनमें से कुछ बसें तो सर्विस व छोटी मोटी मरम्मत के लिए वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं, जो बसें हैं वह भी रूटों पर नहीं चल रहीं। काफी समय से लोग लेट नाइट में बसें चलाने की मांग कर रहे हैं, परंतु सुनवाई नहीं हो रही है।

रोडवेज जीएम बालक राम ने बताया कि रोडवेज बसें सवारी के हिसाब से चलाई जा रही हैं। कई रूट ऐसे हैं जिनमें आखिरी समय में भी सवारी कम होती है। सवारी की संख्या बढ़ने या फिर डिमांड आने पर बस चला दी जाती है।
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