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धान के कम दाम मिलने पर भड़के किसान
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Thu, 10 Sep 2015 11:58 PM IST
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धान के कम दाम मिलने पर गुस्साए किसानों ने वीरवार को मंडी चौक रादौर पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश सचिव विजय मेहता के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। किसानों ने सरकार से मांग की कि सरकार बारीक धान की खरीद की जिम्मेदारी खुद उठाए।
धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से की जाए। किसानों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि सुध नहीं ली तो किसान 30 सितंबर को चार घंटे के लिए दिल्ली के सभी रास्तों को जाम करके रोष प्रदर्शन करेंगे।
विजय मेहता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में किसानों को मंडियों में धान के बेहद कम दाम मिल रहे हैं। लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। 1509 किस्म के धान के मात्र 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल दाम मिल रहे हैं।
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सरकार बारीक धान को हैफेड व कान्फेड एजेंसियों के माध्यम से खरीदने की व्यवस्था करे। बारीक धान को तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल व मोटे धान को दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जाए। अब तक स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू न होने पर भी रोष जताया।
प्रदर्शन में धर्मबीर अमलोहा, शमशेर, रविंद्र, कर्मबीर, जयपाल चमरोडी, नाथराम, पवन बुबका, सुरेंद्र अमलोहा, ऋषिपाल, शमशेर बुबका, रविंद्र बुबका, राजकुमार चमरोडी, श्रीकुमार चमरोडी, बबलू दोहली, समयसिंह, सुखबीर, इंद्रजीत, राजकुमार अलाहर शामिल हुए।
इस बार जिले के धान उत्पादक किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ सरकार द्वारा खरीदे जाने वाले धान का भाव लागत से कम मिल रहा है। दूसरी तरफ व्यापारियों द्वारा खरीदे जाने वाले धान की कीमत काफी कम होने से किसानों की कमर ही टूट गई है।
कृषि विभाग के मुताबिक इस बार जिले में करीब 70 प्रतिशत मोटे धान की पैदावार हुई है, जिसकी खरीद सरकार की ओर से की जाती है। सरकार की ओर से यह धान 1450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। वहीं 30 प्रतिशत बारीक धान की खरीद व्यापारियों द्वारा की जाती है। बारीक धान में बासमती धान आता है, जिसे निर्यातक खरीदते हैं। बारीक धान के दाम काफी नीचे आ गए हैं।
बारीक धान में 1509 किस्म का धान आता है। इस साल व्यापारी इसे करीब 1300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीद रहे हैं। इस बार रादौर क्षेत्र में 40 से 45 प्रतिशत किसानों ने 1509 किस्म के धान की खेती की थी। जो उनके लिए घाटे का सौदा साबित हुई।
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धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से की जाए। किसानों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि सुध नहीं ली तो किसान 30 सितंबर को चार घंटे के लिए दिल्ली के सभी रास्तों को जाम करके रोष प्रदर्शन करेंगे।
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विजय मेहता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में किसानों को मंडियों में धान के बेहद कम दाम मिल रहे हैं। लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। 1509 किस्म के धान के मात्र 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल दाम मिल रहे हैं।
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सरकार बारीक धान को हैफेड व कान्फेड एजेंसियों के माध्यम से खरीदने की व्यवस्था करे। बारीक धान को तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल व मोटे धान को दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जाए। अब तक स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू न होने पर भी रोष जताया।
प्रदर्शन में धर्मबीर अमलोहा, शमशेर, रविंद्र, कर्मबीर, जयपाल चमरोडी, नाथराम, पवन बुबका, सुरेंद्र अमलोहा, ऋषिपाल, शमशेर बुबका, रविंद्र बुबका, राजकुमार चमरोडी, श्रीकुमार चमरोडी, बबलू दोहली, समयसिंह, सुखबीर, इंद्रजीत, राजकुमार अलाहर शामिल हुए।
इस बार जिले के धान उत्पादक किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ सरकार द्वारा खरीदे जाने वाले धान का भाव लागत से कम मिल रहा है। दूसरी तरफ व्यापारियों द्वारा खरीदे जाने वाले धान की कीमत काफी कम होने से किसानों की कमर ही टूट गई है।
कृषि विभाग के मुताबिक इस बार जिले में करीब 70 प्रतिशत मोटे धान की पैदावार हुई है, जिसकी खरीद सरकार की ओर से की जाती है। सरकार की ओर से यह धान 1450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। वहीं 30 प्रतिशत बारीक धान की खरीद व्यापारियों द्वारा की जाती है। बारीक धान में बासमती धान आता है, जिसे निर्यातक खरीदते हैं। बारीक धान के दाम काफी नीचे आ गए हैं।
बारीक धान में 1509 किस्म का धान आता है। इस साल व्यापारी इसे करीब 1300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीद रहे हैं। इस बार रादौर क्षेत्र में 40 से 45 प्रतिशत किसानों ने 1509 किस्म के धान की खेती की थी। जो उनके लिए घाटे का सौदा साबित हुई।