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मातृ दिवस : आर्थिक तंगी में बनी परिवार की ढाल, खुद के साथ 852 लड़कियां बनाईं मिसाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 02:36 AM IST
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Family's shield made in financial crisis, 852 girls set an example with themselves
यमुनानगर। दुनिया में सबसे बड़ा यौद्धा मां होती है....फिल्म के इस डायलॉग को कई महिलाएं साबित कर रही हैं। इन्हीं में एक आजादनगर गली नंबर-12 की हेमलता हैं, जो ना सिर्फ अपने बेटे की परवरिश के साथ आर्थिक तंगी में पूरे परिवार की ढाल बनीं बल्कि अपनी तरह दूसरी लड़कियों को भी आत्मनिर्भर बना रही हैं।
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बता दें कि हेमलता पिछले आठ वर्षों से शहर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित साईं मंदिर में जरूरतमंद लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई सीखा रही है। इस तरह सिलाई-कढ़ाई से पहले खुद और फिर 852 लड़कियों का स्वयं रोजगार शुरू करवा कर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। आर्थिक परेशानी न रहे, इसलिए कुछ करने की ठानी हेमलता ने बताया कि वह मूलरूप से पंजाब की हैं। वर्ष-2008 में उसकी शादी यमुनानगर के आजादनगर में हुई। पति मार्केटिंग का काम करते हैं। फिर बेटा हुआ तो कुछ समय परिवार के आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। यह देख कुछ करने की ठानी। उसने सिलाई-कढ़ाई का काम सीख रखा था, इसलिए घर से यह काम शुरू किया। फिर औद्योगिक क्षेत्र स्थित साईं मंदिर में जरूरतमंद लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई सीखाने लगी। इसके लिए साईं सौभाग्य संस्था के महासचिव निपुण गर्ग ने प्रेरित किया। जिससे आठ वर्षों में उससे करीब 852 लड़कियां सिलाई-कढ़ाई सीख घर से यह काम शुरू कर चुकी हैं। इन लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई सीखा कर सक्षम बनाने के साथ हेमलता घर के भी काम संभाल रही हैं। परिवार में आठ वर्षीय बेटे सहित 11 सदस्य हैं।
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सुनीता ने मां बनकर बच्चों को दिलाई अच्छी शिक्षा, बहू के रूप में संभाला परिवार
अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस के लिए...
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फोटो- 18 फोटो सिंगल
- 2011 में एक हादसे में हो गई थी पति व देवर की मौत
- हादसे के बाद समाजशास्त्र में ली मास्टर डिग्री, अब बड़ी बेटी कर रही नौकरी
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सेक्टर-17 में रहने वाली सुनीता शर्मा उन महिलाओं में से हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए कड़ा संघर्ष किया। उनका संघर्ष रंग लाया। दो बेटियों व सबसे छोटे बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाई। बड़ी बेटी बीटेक करने के बाद मोहाली में नौकरी कर रही है। छोटी बेटी चंडीगढ़ में एमबीए कर रही है। सबसे छोटा बेटा अब 12वीं की परीक्षा दे रहा है। बच्चों को पढ़ाने के लिए नौकरी कर रही हैं। वह न केवल मां बल्कि एक बहू के तौर पर भी परिवार की उम्मीदों पर खरी उतरी।
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52 वर्षीय सुनीता शर्मा के पति केपी शशि समाजसेवी थे। रेडक्रॉस से जुड़े होने के कारण लोगों के बीच रहते थे। वह स्टार रक्तदाता थे। वर्ष 2011 में केपी शशि अपने छोटे भाई सूरज के साथ राजस्थान में आयोजित एक शादी समारोह में जा रहे थे। रास्ते में उनकी गाड़ी हादसे का शिकार हो गई। हादसा इतना भयंकर था कि मौके पर ही सुनीता शर्मा के पति केपी शर्मा व देवर सूरज की मौत हो गई। परिवार में एक साथ दो लोगों की मौत से पूरा परिवार बिखर गया था। सुनीता शर्मा सदमे में थी। पति के जाने के बाद तीन बच्चों, सास-ससुर को संभालने की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी।
उक्त हादसे के बाद सुनीता शर्मा ने खुद को संभाला। सास-ससुर ने उन्हें उत्साहित करते हुए कहा कि यह समय हताश होने का नहीं बल्कि कुछ कर दिखाने का है। वह बच्चों को अपने पांव पर खड़ा करने के लिए कुछ करके दिखाए। परिवार का सहयोग मिलने पर उन्होंने समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री ली। वह खुद भी 15 बार रक्तदान कर चुकी थी। इसलिए रेडक्रॉस से पहले से जुड़ी थी। वर्ष 2012 में उन्हें रेडक्रॉस द्वारा बालकुंज छछरौली में संचालित बालश्रम पुनर्वास केंद्र में कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर की नौकरी मिल गई। अब उनके पास इस केंद्र के सुपरवाइजर का एडिशनल चार्ज भी है।
कोट
मैं अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित थी। तब सास ने मेरा हौसला बढ़ाया। मेरा यही सोचना था कि मुझे अपने परिवार के लिए कुछ करना है। बस एक ही सपना था कि मेरे बच्चे पढ़ लिख कर इतने काबिल बन जाएं कि वह अपने पांव पर खड़े हो सकें। मेरा मानना है कि किसी भी महिला को खुद को अकेला नहीं समझना चाहिए। यदि कुछ कर दिखाना है तो उसे पूरा करने की हिम्मत जुटाएं। जब हम आगे बढ़ेंगे तो बाधाएं अपने आप दूर होती जाएंगी। हर महिला सबकुछ कर सकती है।
- सुनीता शर्मा
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मां ही जिंदगी में कईं प्रकार के रिश्ते निभाती है : चिराग
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ब्लूमबर्ग स्कूल में शनिवार को मदर्स डे मनाया गया। इस अवसर पर स्कूल के एमडी चिराग विनायक ने कहा कि एक मां जिंदगी में कईं फर्ज कईं रिश्ते बिना किसी स्वार्थ के निभाती है मां का दर्जा भी काफी ऊपर माना जाता है। उन्होंने कहा कि साल में एक ही दिन सही लेकिन महिलाएं खुद पर गर्व महसूस कर सकें। मुख्यातिथि रही उमा व श्वेता विनायक ने सभी अध्यापिकाओं और माताओं को बधाई दी। प्रधानाचार्य कृति अरोड़ा ने कहा कि हजारों बूंद चाहिए समुद्र बनाने के लिए, पर मां अकेले ही काफी है बच्चों की जिंदगी को स्वर्ग बनाने के लिए। इसी के साथ मदर्स के लिए कुछ गेम्स और रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं बच्चों की माताओं ने अपनी प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। जिसमें कैप गेम में कोमल, दीप्ति, रश्मि और निशा, तंबोला गेम में पिंकी गुप्ता, अनिता, बिंदु ठाकुर और वीना, पेपर डांस में नीता, योगिता, अनिता व शिपरा माताएं विजयी रही। रैंप वॉक प्रतियोगिता में भी सभी माताओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। वहीं ब्लूमबर्ग स्कूल की सीनियर ब्रांच में भी मदर्स डे बड़ी धूमधाम से मनाया गया और सीनियर ब्रांच की प्रधानाचार्य अन्नू कपूर ने सभी माताओं को बधाई दी।
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बच्चों ने डांस से प्रदर्शित किया मां के प्रति प्रेम
रादौर। इंडियन पब्लिक स्कूल में शनिवार को मातृ दिवस मनाया गया। जिसमें विभिन्न गतिविधियां करवाई गई। इस दौरान नर्सरी से 8वीं के विद्यार्थियों ने भाग लिया। नर्सरी से तीसरी तक के बच्चों ने कविता, नृत्य आदि से मां के प्रति प्रेम व सम्मान प्रदर्शित किया। वहीं कक्षा एक से चार के बच्चों ने बिस्कुट डेकोरेशन में बढ़चढ़ कर भाग लिया। कक्षा पांच व छह के विद्यार्थियों ने भेलपुरी प्रतियोगिता में भाग लिया। कक्षा सात व आठ के विद्यार्थियों ने सैंडविच बनाओ प्रतियोगिता में अपना कौशल दिखाया। स्कूल की प्रिंसिपल इंदु मेहता ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस दौरान इंदु मेहता ने कहा कि मां धरती पर ईश्वर का रूप है। मां का कोई दिन नहीं होता बल्कि हर दिन मां से होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस तरह की प्रतियोगिताओं से भाग लेने के प्रेरित किया। ऐसी प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ता है।

महिलाओं शिविर में दिया जाएगा निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण
रादौर। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की ओर से 16 मई से एक महीने का सिलाई प्रशिक्षण शिविर लगाया जा रहा है। जिसमें 35 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिविर प्रभारी मोनिका कांबोज ने बताया कि प्रशिक्षण लेने के लिए महिलाओं को 12 मई शाम चार बजे तक पांच पासपोर्ट साइज फोटो, तीन आधार कार्ड की कॉपी, तीन राशन कार्ड की कॉपी, जाति प्रमाणपत्र की तीन प्रति, समूह की एक बैंक कॉपी जमा करवानी होगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के लिए महिलाओं को कैंची, इंचीटेप, चॉक, एक बॉक्स रील, कॉपी, पेन, यूनिफार्म, दोपहर का भोजन शिविर में निशुल्क दिया जाएगा। आवेदकों की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। प्रतिदिन आठ घंटे प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के लिए महिलाओं को ग्रामीण मंत्रालय भारत सरकार व पंजाब नेशनल बैंक की ओर से प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
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