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Yamuna Nagar News: भरत मिलाप की लीला देख आंखें हुईं नम
Fri, 04 Oct 2024 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 04 Oct 2024 02:31 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। ग्रामीण रामा ड्रामेटिक क्लब नाचरौन की ओर से गांव में बुधवार रात को रामलीला में भरत मिलाप प्रसंग का मंचन किया गया। इस प्रसंग का मंचन देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
रामलीला में दिखाया गया कि जब भरत अयोध्या पहुंचते हैं तो चारों तरफ मातम होता है। भरत को कैकई के कक्ष में राम को 14 वर्ष के वनवास का पता चलता है। इसी वियोग में महाराज दशरथ स्वर्ग सिधार जाते हैं। तभी भरत अपनी माता कैकई को कोसते हैं और कौशल्या के पास जाकर उनसे माफी मांगते हैं। वे कहते हैं कि वह भैय्या राम को वन से वापस लेकर आएंगे।
उनके साथ कौशल्या, सुमित्रा व कैकई भी जाने की जिद करती हैं, तभी वे सभी श्रीराम को लेने के लिए जाते हैं। उधर वनों में जाते हुए श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट निषाद राज से होती है। वह उन्हें नदी पार करवाते हैं। चित्रकूट में पहुंचकर लक्ष्मण जी भारत को आता देखकर श्रीराम को होशियार होने के लिए कहते हैं। तभी श्रीराम लक्ष्मण को समझाते हैं।
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भरत जब श्रीराम के पास पहुंचकर वापस अयोध्या चलने को कहते हैं तो वह मात पिता की आज्ञा मानकर चलने से मना कर देते हैं। जिस पर भरत कहते हैं कि भैया आप अपनी खड़ाऊ मुझे दीजिए मैं इनको राजगद्दी पर रखकर राजकाज संभाल लूंगा। भरत प्रभु श्रीराम की खड़ाऊ लेकर अयोध्या चले जाते हैं। इस दौरान क्लब प्रधान डॉ. लाभ सिंह, राहुल पुंडीर, राज शर्मा, सेठपाल शर्मा, संदीप राणा, चंद्रपाल कोच, यशपाल राणा, मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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रादौर। ग्रामीण रामा ड्रामेटिक क्लब नाचरौन की ओर से गांव में बुधवार रात को रामलीला में भरत मिलाप प्रसंग का मंचन किया गया। इस प्रसंग का मंचन देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
रामलीला में दिखाया गया कि जब भरत अयोध्या पहुंचते हैं तो चारों तरफ मातम होता है। भरत को कैकई के कक्ष में राम को 14 वर्ष के वनवास का पता चलता है। इसी वियोग में महाराज दशरथ स्वर्ग सिधार जाते हैं। तभी भरत अपनी माता कैकई को कोसते हैं और कौशल्या के पास जाकर उनसे माफी मांगते हैं। वे कहते हैं कि वह भैय्या राम को वन से वापस लेकर आएंगे।
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उनके साथ कौशल्या, सुमित्रा व कैकई भी जाने की जिद करती हैं, तभी वे सभी श्रीराम को लेने के लिए जाते हैं। उधर वनों में जाते हुए श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट निषाद राज से होती है। वह उन्हें नदी पार करवाते हैं। चित्रकूट में पहुंचकर लक्ष्मण जी भारत को आता देखकर श्रीराम को होशियार होने के लिए कहते हैं। तभी श्रीराम लक्ष्मण को समझाते हैं।
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भरत जब श्रीराम के पास पहुंचकर वापस अयोध्या चलने को कहते हैं तो वह मात पिता की आज्ञा मानकर चलने से मना कर देते हैं। जिस पर भरत कहते हैं कि भैया आप अपनी खड़ाऊ मुझे दीजिए मैं इनको राजगद्दी पर रखकर राजकाज संभाल लूंगा। भरत प्रभु श्रीराम की खड़ाऊ लेकर अयोध्या चले जाते हैं। इस दौरान क्लब प्रधान डॉ. लाभ सिंह, राहुल पुंडीर, राज शर्मा, सेठपाल शर्मा, संदीप राणा, चंद्रपाल कोच, यशपाल राणा, मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।