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Yamuna Nagar News: रैंकिंग बिगड़ने पर भी नहीं सुधरे हाल, लगे कचरे के ढेर
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 की रैंकिंग में पिछड़ने पर भी नगर निगम अफसर सबक लेते नजर नहीं आ रहे हैं। चूंकि सर्वेक्षण के परिणाम आने के माहभर में भी स्वच्छता के मामले में शहर की तस्वीर नहीं सुधर पाई है। एक ओर निगम अफसर शहर को खुले में गिरते कचरे से मुक्त करने का दम भर रहे हैं, पर सड़कों पर अब भी कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं। बतादें कि स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में राष्ट्र स्तर पर शहर का 170 रैंक रहा, जिसमें स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में 51 पायदान नीचे गिरकर शहर 221वें रैंक पर आ गया। ऐसा तब है, जब सालभर में डोर टू डोर कचरा उठान निस्तारण का 26 करोड़ व नालों की सफाई का 1.41 करोड़ के ठेके दिए गए। अब भी हर माह शहर की सफाई के नाम पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, बावजूद इसके शहर की स्वच्छता के मामले में हालात नहीं सुधर पा रहे हैं। डोर टू डोर कचरा उठान होने के बाद भी कचरा सड़कों पर आ रहा है। इसकी वजह निवर्तमान पार्षद रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान कचरा उठान सेवा नियमित न होना बता रहे हैं। उनका आरोप है कि डोर टू डोर कचरा उठान नियमित के बजाए कई दिन व हफ्ते में हो रहा है, इसलिए घरों-दुकानों में इकट्ठे किए कचरे से दुर्गंध व मक्खी मच्छर से परेशान होकर लोग कचरे को सड़कों किनारे गिराने पर मजबूर हैं।
कभी भी सर्वे करने आएगी टीम
स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 के लिए भी केंद्रीय टीम कभी भी शहर के दौरे पर आ सकती है। ऐसे में टीम की नजर मौजूदा समय में सड़कों किनारे बिखरे कचरे पर पड़ी तो फिर से सर्वेक्षण में नंबर कट सकते हैं और इसका सीधा असर शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर पड़ सकता है।
सात वर्षों में स्वच्छता रैंकिंग
वर्ष - रैंक
2017 - 346
2018 - 310
2019 - 218
2020 - 147
2021 - 243
2022 - 170
2023 - 221
डोर टू डोर कचरा उठान सेवा नियमित है। अगर कहीं कचरा उठान के वाहन नहीं पहुंच रहे है तो शिकायत की जा सकती है। ऐसी सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर कचरा उठान वाहन भेजे जाते हैं। सड़कों किनारे कचरे गिराने पर रोक है। ऐसा करने वालों को जागरुक करने के साथ चालान कार्रवाई के भी निर्देश है। शहरवासियों से अपील है कि सड़कों व अन्य जगह खुले में कचरा न गिराएं बल्कि कचरा उठान वाहनों में ही कचरा दें।
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- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 की रैंकिंग में पिछड़ने पर भी नगर निगम अफसर सबक लेते नजर नहीं आ रहे हैं। चूंकि सर्वेक्षण के परिणाम आने के माहभर में भी स्वच्छता के मामले में शहर की तस्वीर नहीं सुधर पाई है। एक ओर निगम अफसर शहर को खुले में गिरते कचरे से मुक्त करने का दम भर रहे हैं, पर सड़कों पर अब भी कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं। बतादें कि स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में राष्ट्र स्तर पर शहर का 170 रैंक रहा, जिसमें स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में 51 पायदान नीचे गिरकर शहर 221वें रैंक पर आ गया। ऐसा तब है, जब सालभर में डोर टू डोर कचरा उठान निस्तारण का 26 करोड़ व नालों की सफाई का 1.41 करोड़ के ठेके दिए गए। अब भी हर माह शहर की सफाई के नाम पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, बावजूद इसके शहर की स्वच्छता के मामले में हालात नहीं सुधर पा रहे हैं। डोर टू डोर कचरा उठान होने के बाद भी कचरा सड़कों पर आ रहा है। इसकी वजह निवर्तमान पार्षद रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान कचरा उठान सेवा नियमित न होना बता रहे हैं। उनका आरोप है कि डोर टू डोर कचरा उठान नियमित के बजाए कई दिन व हफ्ते में हो रहा है, इसलिए घरों-दुकानों में इकट्ठे किए कचरे से दुर्गंध व मक्खी मच्छर से परेशान होकर लोग कचरे को सड़कों किनारे गिराने पर मजबूर हैं।
कभी भी सर्वे करने आएगी टीम
स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 के लिए भी केंद्रीय टीम कभी भी शहर के दौरे पर आ सकती है। ऐसे में टीम की नजर मौजूदा समय में सड़कों किनारे बिखरे कचरे पर पड़ी तो फिर से सर्वेक्षण में नंबर कट सकते हैं और इसका सीधा असर शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर पड़ सकता है।
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सात वर्षों में स्वच्छता रैंकिंग
वर्ष - रैंक
2017 - 346
2018 - 310
2019 - 218
2020 - 147
2021 - 243
2022 - 170
2023 - 221
डोर टू डोर कचरा उठान सेवा नियमित है। अगर कहीं कचरा उठान के वाहन नहीं पहुंच रहे है तो शिकायत की जा सकती है। ऐसी सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर कचरा उठान वाहन भेजे जाते हैं। सड़कों किनारे कचरे गिराने पर रोक है। ऐसा करने वालों को जागरुक करने के साथ चालान कार्रवाई के भी निर्देश है। शहरवासियों से अपील है कि सड़कों व अन्य जगह खुले में कचरा न गिराएं बल्कि कचरा उठान वाहनों में ही कचरा दें।
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- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।