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मांगों को लेकर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर जुलूस निकाला
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जिले में रविवार को कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन और अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की ओर से अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ पर भारत बचाओ सत्याग्रह आंदोलन चलाया गया। इसकी अध्यक्षता संघ जिला प्रधान महीपाल सोढे़, इंटक जिला प्रधान धर्मपाल, एटक नेता हरभजन सिंह संधू, रिटायर्ड कर्मचारी संघ जिला प्रधान विनोद कुमार त्यागी, कर्मचारी महासंघ नेता अशोक शर्मा, सीटू सचिव शरबती देवी, संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति अध्यक्ष रामस्वरूप शर्मा ने की। जिसमें तमाम कर्मचारी संगठनों, मजूदर व किसान संगठनों, छात्र संघ, सहित युवाओं व महिलाओं ने भाग लिया। हालांकि जुलूस और प्रदर्शन में सबसे ज्यादा संख्या अपनी ड्रेस पहनकर आई आशाओं की रही और पूरा प्रदर्शन लाल रंग में नजर आया। सबसे पहले सभी प्रदर्शनकारी भाई कन्हैया साहिब चौक स्थित पार्क में जमा हुआ। वहां पर रैली की और जुलूस की शक्ल में मॉडल टाउन होते हुए बस अड्डा तक पहुंचे।
इस दौरान जिला सचिव राजपाल सांगवान व महासंघ नेता वरयाम सिंह ने कहा कि यह सत्याग्रह सरकार द्वारा कोरोना महामारी को अवसर में बदल कर जनता के खून पसीने से खड़े किए गए सार्वजनिक क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार की जन व कर्मचारी हित विरोधी नीतियों को लोगों के सामने लाने के लिए यह सत्याग्रह किया जा रहा है। सरकार जहां मानवीय अधिकारों पर हमला कर रही है। वहीं संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने में लगी हुई हे। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते, एलटीसी, वेतन वृद्धि पर रोक, छटनी, 1983 शिक्षकों को नौकरी से निकालने तथा ठेका प्रथा व निजीकरण, श्रम कानूनों खत्म करने, ड्यूटी घंटे 8 से 12 करने, असहमति की आवाज को दबाने सामाजिक कार्यकर्ताओं व विद्यार्थी नेताओं को यूएपीए कानून के तहत जेल में डालने, पेट्रोल-डीजल के दामों में बेहिसाब बढ़ोतरी, किसान विरोधी अध्यादेश आदि जन व कर्मचारी विरोधी हैं।
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इस दौरान जिला सचिव राजपाल सांगवान व महासंघ नेता वरयाम सिंह ने कहा कि यह सत्याग्रह सरकार द्वारा कोरोना महामारी को अवसर में बदल कर जनता के खून पसीने से खड़े किए गए सार्वजनिक क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार की जन व कर्मचारी हित विरोधी नीतियों को लोगों के सामने लाने के लिए यह सत्याग्रह किया जा रहा है। सरकार जहां मानवीय अधिकारों पर हमला कर रही है। वहीं संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने में लगी हुई हे। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते, एलटीसी, वेतन वृद्धि पर रोक, छटनी, 1983 शिक्षकों को नौकरी से निकालने तथा ठेका प्रथा व निजीकरण, श्रम कानूनों खत्म करने, ड्यूटी घंटे 8 से 12 करने, असहमति की आवाज को दबाने सामाजिक कार्यकर्ताओं व विद्यार्थी नेताओं को यूएपीए कानून के तहत जेल में डालने, पेट्रोल-डीजल के दामों में बेहिसाब बढ़ोतरी, किसान विरोधी अध्यादेश आदि जन व कर्मचारी विरोधी हैं।
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