फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Emergency services are struggling with inadequate ambulances and staff shortages.

Yamuna Nagar News: कंडम एंबुलेंस व स्टाफ की कमी से जूझ रही आपातकालीन सेवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 02:18 AM IST
विज्ञापन
Emergency services are struggling with inadequate ambulances and staff shortages.
यमुनानगर। जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं इन दिनों जर्जर एंबुलेंस और स्टाफ की कमी के सहारे चल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 20 एंबुलेंस संचालित हैं, जिनमें से 13 अपनी निर्धारित मियाद पूरी कर चुकी हैं। इसके बावजूद इन्हीं वाहनों के सहारे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया जा रहा है। एंबुलेंस की खराब हालत और कर्मचारियों की कमी का असर सीधे तौर पर सेवा की गुणवत्ता और रिस्पॉन्स टाइम पर पड़ रहा है।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार जिले में एंबुलेंस सेवाओं के लिए दो शिफ्ट में 12-12 घंटे की ड्यूटी लगाई जाती है। इसके हिसाब से पर्याप्त स्टाफ होना जरूरी है, लेकिन विभाग में कर्मचारियों की संख्या जरूरत से काफी कम है। वर्तमान में कंट्रोल रूम में केवल चार ऑपरेटर कार्यरत हैं, जिनमें से एक पंचकूला में डेपोटेशन पर तैनात है। ऐसे में कंट्रोल रूम का काम भी सीमित स्टाफ के सहारे चल रहा है।
विज्ञापन

इसी तरह एंबुलेंस में तैनात रहने वाले इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) की संख्या भी कम है। जिले में इस समय केवल 25 ईएमटी हैं, जबकि दो शिफ्टों में ड्यूटी के हिसाब से कम से कम 40 ईएमटी होने चाहिए। स्टाफ की कमी के कारण कई बार एंबुलेंस को बिना ईएमटी के ही घटनास्थल पर भेजना पड़ता है। ईएमटी की अनुपस्थिति में मरीजों को घटनास्थल पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता। ऐसी स्थिति में एंबुलेंस चालक को ही मरीज को संभालने और प्राथमिक सहायता देने का प्रयास करना पड़ता है, जिससे उस पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है। चालक को वाहन चलाने के साथ-साथ मरीज की देखभाल भी करनी पड़ती है, जो कई बार जोखिम भरा साबित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एंबुलेंस की जर्जर स्थिति भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। निर्धारित समय सीमा पूरी कर चुके वाहनों में तकनीकी खराबियां आने की आशंका बनी रहती है। इससे कई बार सेवा प्रभावित होती है और मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत आती है। इन सभी समस्याओं का असर एंबुलेंस सेवा के रिस्पॉन्स टाइम पर भी पड़ा है। पहले किसी कॉल के बाद एंबुलेंस औसतन 10 मिनट में मौके पर पहुंच जाती थी, लेकिन अब यह समय बढ़कर करीब 12 मिनट तक पहुंच गया है। आपात स्थिति में दो मिनट की देरी भी मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकती है। जिले में एंबुलेंस की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ नई गाड़ियों की जरूरत है। इसके अलावा पर्याप्त संख्या में ईएमटी और कंट्रोल रूम स्टाफ की नियुक्ति भी जरूरी है, ताकि आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके और मरीजों को समय पर राहत मिल सके।


वर्जन:
नई एंबुलेंस व स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए मुख्यालय में लिखा हुआ है। जल्द ही स्टाफ के पूरा होने की उम्मीद है। सरकार नई एंबुलेंस खरीद रही है, इसलिए इनकी कमी भी जल्द पूरी हो जाएगी।
- डॉ. सुशीला सैनी, डिप्टी सिविल सर्जन एवं नोडल ऑफिसर आपात सेवाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed