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Yamuna Nagar News: सत्यापन न होने से नहीं बिक पा रहा धान, किसान हो रहे परेशान

Sun, 28 Sep 2025 05:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 28 Sep 2025 05:53 AM IST
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Due to lack of verification, paddy is not being sold, farmers are getting worried.
उठान नहीं होने पर धान से अटी जगाधरी की अनाज मंडी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। खेतों में धान की कटाई जोरों पर चल रही है। एक सप्ताह से भी कम समय में अनाज मंडियां धान से अट गई हैं। मंडियों में आने वाले किसानों की फसल का सत्यापन नहीं हो रहा है। इससे मंडियों में धान नहीं बिक रहा। मंडी में आने वाली फसल की रजिस्टर में एंट्री की जा रही है। जब तक फसल का सत्यापन नहीं होगा तब फसल नहीं बिक पाएगी।
जिले में इस बार धान का कुल रकबा करीब 85 हजार हेक्टेयर है। एक-एक अनाज मंडी में रोजाना 80 से 100 किसान ऐसे आ रहे हैं, जिनकी फसल बिक नहीं पा रही है। गेट पास काटते समय उन्हें बताया जा रहा है कि उनकी फसल का अभी सत्यापन नहीं हुआ है। इसके लिए किसानों को तौलाई के समय ही एक रसीद दी जा रही है।
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रसीद पर किसान व गांव का नाम, कुल कितना धान आया है, उसका ब्योरा लिखा हुआ है। यही वजह है कि मंडियों में धान तो बहुत ज्यादा आ रहा है, लेकिन खरीद कम हो रही है। इससे मंडियां धान से अटने लगी हैं। मंडियों मेंधान सुखाने के लिए जगह कम पड़ने लगी है।
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किसान को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी अपनी फसल की जानकारी देता है कि उसने कितने एकड़ में धान लगाई है। इसके बाद पटवारी मौके पर जाकर रिपोर्ट तैयार करता है कि किसान ने सही जानकारी दी है या नहीं। किसान व पटवारी की रिपोर्ट को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की टीम सत्यापित करती है। आखिर में सेटेलाइट से इनके डाटा सत्यापन कराया जाता है।
इन चारों में से किन्हीं तीन की रिपोर्ट सही है तो किसान की ओर से दिए गए ब्योरा को सही मान लिया जाता है। यदि चार में से दो-दो की रिपोर्ट अलग-अलग आए तो सबसे अंत में ऑफिसर मिसमैच टीम के पास डाटा जाएगा। जो डाटा मिसमैच होता है उसे थोड़ा-थोड़ा करके एसडीएम, डीआरओ, एडीसी व जिला परिषद सीईओ आदि के पास भेज दिया जाता है। इनके सत्यापन को फाइनल माना जाता है।
किसान बोले - पता नहीं कब बिकेगी फसल

नया गांव के किसान राजकुमार ने बताया कि वह आज मंडी में 25 क्विंटल धान लेकर आया था। गेट पास काटते समय उसे बताया गया कि उसकी फसल का अभी सत्यापन नहीं हुआ है। जब तक सत्यापन नहीं होगा, तब तक खरीद नहीं होगी। उसे कर्मचारी ने धान की एक रसीद पकड़ा दी है। इसी तरह महलांवाली गांव की किसान संजोली ने बताया कि वह 55 क्विंटल धान जगाधरी मंडी में लेकर आए थे। सत्यापन न होने के कारण नहीं बिका। वहीं हरनौल के किसान श्याम लाल ने बताया कि वह 35 क्विंटल धान मंडी में बेचने आया था। मंडी में जब गेट पास कटा तो उसे पता चला कि उसकी फसल का अभी तक सत्यापन ही नहीं हुआ है। पता नहीं कब सत्यापन होगा और कब फसल बिकेगी। जब तक नहीं बिकेगी, तब तक फसल आढ़ती के पास ही रखी रहेगी।

फसल न बिकना सरकार की नाकामी ः गुंदियाना

भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना का कहना है कि मंडियों में किसान की फसल न बिकना सरकार की नाकामी है। जब पटवारी से ही सत्यापन करवाना है तो किसान को पोर्टल पर फसल का ब्योरा देने को क्यों कहा जा रहा है। पटवारी गांव में जाकर अपनी रिपोर्ट तैयार कर देगा। चार स्तर पर भी अधिकारी फसल का सत्यापन नहीं करवा पा रहे हैं। मंडियां धान से अट चुकी हैं। खरीद नाममात्र की हुई है।

कई बार किसान की ओर से गलत डाटा उपलब्ध करवा दिया जाता है। इससे डाटा आपस में मेल नहीं खाता। जिन किसानों के साथ ऐसी दिक्कत आ रही है, वह अपनी तहसील के तहसीलदार से मिलकर समस्या को दूर करवा सकते हैं। - डॉ. आदित्य डबास, कृषि उपनिदेशक, यमुनानगर।

उठान नहीं होने पर धान से अटी जगाधरी की अनाज मंडी। संवाद

उठान नहीं होने पर धान से अटी जगाधरी की अनाज मंडी। संवाद

उठान नहीं होने पर धान से अटी जगाधरी की अनाज मंडी। संवाद

उठान नहीं होने पर धान से अटी जगाधरी की अनाज मंडी। संवाद

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