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Yamuna Nagar News: शहर की बची अवैध कॉलोनियां भी वैध कराने के लिए होगा ड्रोन सर्वे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Oct 2023 02:38 AM IST
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Drone survey will be done to legalize the remaining illegal colonies of the city.
यमुनानगर।
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नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत बची अवैध कॉलोनियां व क्षेत्र भी वैध करने की तैयारी है। इसके लिए नगर निगम आयुक्त आयुष सिन्हा ने ड्रोन सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसमें वैध होने की शर्तें पूरी करने वाली कॉलोनियों को वैध करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। यही नहीं, इन कॉलोनियों व क्षेत्र में सर्वे सहित मार्किंग व जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) के जरिए नगर निगम की जमीनों और उन पर अवैध कब्जों का भी पता लग पाएगा। जिससे इन जमीनों पर तारबंदी कर नगर निगम के बोर्ड लगाने सहित मौके पर मिले अवैध कब्जे हटाए जा सकेंगे।
नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत वर्ष-2018 में 69 कॉलोनियों का वैध किया गया था। जबकि चालू वित्तवर्ष में पहले अप्रैल को 35 फिर अगस्त में 36 कॉलोनियों को वैध करने सरकार ने अधिसूचना जारी की। इस तरह प्रदेश में सबसे अधिक नगर निगम यमुनानगर जगाधरी क्षेत्र की 71 कॉलोनियां इस वर्ष वैध हुईं। साथ ही चार कॉलोनियां साढौरा नगर पालिका क्षेत्र की भी वैध की गईं। अभी भी नगर निगम यमुनानगर जगाधरी के अंतर्गत एक 139 व दूसरा 24 कॉलोनियों को वैध करने के प्रस्ताव सरकार के पास भेजे गए हैं।
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सर्वे पर 48.35 लाख खर्च का अनुमान
निगम क्षेत्र में जो कॉलोनियां या क्षेत्र वैध होने से रह गए हैं, उनमें ड्रोन सर्वे सहित मार्किंग व जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) पर करीब 48.35 लाख खर्च आने का अनुमान है। इसी खर्च पर निगम अफसरों ने ई-टेंडर लगाया है, जिसमें 25 अक्तूबर तक एजेंसियों से बिड मांगी गई है। निविदा लेने वाली एजेंसी को कॉलोनी का नाम, क्षेत्र, लोकेशन, निगम एरिया में है या उसके बाहर, कॉलोनी का इस्तेमाल रिहायशी, व्यावसायिक, इंडस्ट्रियल (तीनों का प्रतिशत), किस साल हुई स्थापना, कंट्रोल्ड या अर्बन क्षेत्र, लेआउट प्लान, कुल प्लॉट, कितने प्लॉट पर निर्माण व कितने खाली, कॉलोनी में कितने परिवार रहते हैं, स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति व अंडरग्राउंड सीवरेज, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, पार्क या ओपन स्पेस है या नहीं, रास्ता कच्चा है या पक्का और उसकी लंबाई, चौड़ाई कितनी है, कहां रोड की चौड़ाई तीन मीटर से कम है, अप्रोच रोड से मुख्य मार्ग की दिशाएं, किस सबस्टेशन से झारों में बिजली आपूर्ति हो रही है, कॉलोनी में कम्युनिटी साइट है या नहीं, है तो वह कितने क्षेत्र में है, रजिस्टर्ड रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन है या नहीं जैसा ब्योरा एजेंसी को जुटाना है। इसमें मार्किंग, जियो टैगिंग के साथ जीआईएस वर्क भी करने हैं।
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प्रयास है कि वैध होने से वंचित न रहे कोई कॉलोनी
नगर निगम आयुष सिन्हा ने कहा कि प्रयास है कि नगर निगम क्षेत्र में कोई भी कॉलोनी शर्तें पूरी करने के बावजूद वैध होने से वंचित न रहे। इसी के तहत अवैध बची कॉलोनियों में यह ड्रोन सर्वे, मार्किंग व जीआईएस का काम होना है। ताकि वैध होने की शर्तें पूरी करने वाली अवैध कॉलोनियों को वैध करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा सके। साथ ही इससे नगर निगम की जमीनों व उन पर अवैध कब्जों का पता लग सकेगा। ऐसी निगम की जमीनों पर तारबंदी कर नगर निगम के बोर्ड लगाए जाएंगे और जहां कहीं भी निगम की जमीनों पर ड्रोन की मदद से अवैध कब्जों का पता लगेगा, वहां कार्रवाई कर अवैध कब्जे हटवाए जाएंगे।
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