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धुआं नहीं जहर उगल रहीं चिमनियां
यमुनानगर
Updated Tue, 12 Nov 2013 12:43 AM IST
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शहर में लगी फैक्टरियां इन दिनों धुआं नहीं, जहर उगल रही हैं। फैक्टरियों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से टायरों को जलाया जा रहा है।
टायर जलने से निकलने वाली जहरीली गैस के कारण लोग ब्लड कैंसर, दमा व अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। इतना सब होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
शहर में एक हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी मेटल की औद्योगिक इकाइयां हैं, जो सुबह से ही धुएं के जरिये जहर उगलना शुरू कर देती हैं।
शहर की दुर्गा गार्डन कॉलोनी, भारत सेवक नगर, पुरानी अनाजमंडी क्षेत्र, मुखर्जी पार्क, विश्वकर्मा कॉलोनी, बुड़िया रोड, विजय नगर, कल्याण नगर, रूप नगर का कॉलोनी, हनुमान गेट, पुराना छछरौली रोड, पुराना बिलासपुर रोड, गांधी नगर कॉलोनी के अलावा रिहायसी क्षेत्रों की गली मोहल्लों में फैक्टरियां लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हैं। इन फैक्टरियों में गलाई व बर्तन बनाने का काम होता है।
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अधिकांश फैक्टरियों में जहां वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संयंत्र नहीं हैं, वहीं ज्यादातर फैक्टरियों में डीजल व कोयले की जगह इन दिनों टायर ईंधन के तौर पर जलाया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक टायर जलने से कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड जहरीली गैस निकलती है। डॉक्टरों के मुताबिक सांस से कार्बन मोनो ऑक्साइड शरीर में जाने से ब्लड कैंसर और सल्फर डाई ऑक्साइड से दमा और सांस संबंधित बीमारियां होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
टायर जलाने पर सीधा बंद करने का है प्रावधान
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के मुताबिक फैक्टरी की भट्टी में ईंधन के तौर पर टायरों को इस्तेमाल करना पूर्ण रूप से अवैध है। पकडे़ जाने पर नोटिस के बाद सीधा फैक्टरी बंद करने का प्रावधान है। इस मामले में कोई दलील भी नहीं है। बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक टायर जलने से निकलने वाली जहरीली गैस लोगों के स्वास्थ्य पर वितरित असर पड़ता है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए फैक्टरी संचालकों को उपकरण लगाने के निर्देश दिए हुए हैं।
अधिकारियों की कमी का रोना रो रहा बोर्ड
फैक्टरियों की नियमित जांच के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी की कमी का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। फिलहाल बोर्ड के पास यमुनानगर व करनाल जिले में प्रदूषण को नियंत्रित करने का जिम्मा है। यमुनानगर में जहां मेटल, प्लाइवुड, भट्ठे व अन्य फैक्टरियों की संख्या तीन हजार से ज्यादा है, तो वहीं करनाल में यह आंकड़ा दो हजार के पार है। करीब पांच हजार फैक्टरियों की जांच का जिम्मा फिलहाल एक एसडीओ संभाले हैं।
छत और घरों में कालिख की परत
फैक्टरियों से निकलने वाले काले धुएं की वजह से लोगों की छतों और घर के अंदर सुबह के समय कालिख की परत देखी जा सकती है। इस कारण उनकी मुश्किलें बढ़ी हुई है। गौरी शंकर कॉलोनी निवासी दुर्गेश त्यागी, कुसुम व सविता का कहना है कि अगर गलती से वे छत पर नंगे पांव चली जाती हैं, तो पैरों पर कालिख चिपक जाती है। अगर छत पर कपडे़ सुखाने के लिए डाले जाते हैं तो उन उन पर कालिख जमीं देखी जा सकती है। हालांकि इस संदर्भ में कॉलोनी के लोग कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो पाया है।
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टायर जलने से निकलने वाली जहरीली गैस के कारण लोग ब्लड कैंसर, दमा व अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। इतना सब होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
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शहर में एक हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी मेटल की औद्योगिक इकाइयां हैं, जो सुबह से ही धुएं के जरिये जहर उगलना शुरू कर देती हैं।
शहर की दुर्गा गार्डन कॉलोनी, भारत सेवक नगर, पुरानी अनाजमंडी क्षेत्र, मुखर्जी पार्क, विश्वकर्मा कॉलोनी, बुड़िया रोड, विजय नगर, कल्याण नगर, रूप नगर का कॉलोनी, हनुमान गेट, पुराना छछरौली रोड, पुराना बिलासपुर रोड, गांधी नगर कॉलोनी के अलावा रिहायसी क्षेत्रों की गली मोहल्लों में फैक्टरियां लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हैं। इन फैक्टरियों में गलाई व बर्तन बनाने का काम होता है।
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अधिकांश फैक्टरियों में जहां वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संयंत्र नहीं हैं, वहीं ज्यादातर फैक्टरियों में डीजल व कोयले की जगह इन दिनों टायर ईंधन के तौर पर जलाया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक टायर जलने से कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड जहरीली गैस निकलती है। डॉक्टरों के मुताबिक सांस से कार्बन मोनो ऑक्साइड शरीर में जाने से ब्लड कैंसर और सल्फर डाई ऑक्साइड से दमा और सांस संबंधित बीमारियां होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
टायर जलाने पर सीधा बंद करने का है प्रावधान
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के मुताबिक फैक्टरी की भट्टी में ईंधन के तौर पर टायरों को इस्तेमाल करना पूर्ण रूप से अवैध है। पकडे़ जाने पर नोटिस के बाद सीधा फैक्टरी बंद करने का प्रावधान है। इस मामले में कोई दलील भी नहीं है। बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक टायर जलने से निकलने वाली जहरीली गैस लोगों के स्वास्थ्य पर वितरित असर पड़ता है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए फैक्टरी संचालकों को उपकरण लगाने के निर्देश दिए हुए हैं।
अधिकारियों की कमी का रोना रो रहा बोर्ड
फैक्टरियों की नियमित जांच के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी की कमी का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। फिलहाल बोर्ड के पास यमुनानगर व करनाल जिले में प्रदूषण को नियंत्रित करने का जिम्मा है। यमुनानगर में जहां मेटल, प्लाइवुड, भट्ठे व अन्य फैक्टरियों की संख्या तीन हजार से ज्यादा है, तो वहीं करनाल में यह आंकड़ा दो हजार के पार है। करीब पांच हजार फैक्टरियों की जांच का जिम्मा फिलहाल एक एसडीओ संभाले हैं।
छत और घरों में कालिख की परत
फैक्टरियों से निकलने वाले काले धुएं की वजह से लोगों की छतों और घर के अंदर सुबह के समय कालिख की परत देखी जा सकती है। इस कारण उनकी मुश्किलें बढ़ी हुई है। गौरी शंकर कॉलोनी निवासी दुर्गेश त्यागी, कुसुम व सविता का कहना है कि अगर गलती से वे छत पर नंगे पांव चली जाती हैं, तो पैरों पर कालिख चिपक जाती है। अगर छत पर कपडे़ सुखाने के लिए डाले जाते हैं तो उन उन पर कालिख जमीं देखी जा सकती है। हालांकि इस संदर्भ में कॉलोनी के लोग कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो पाया है।