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Yamuna Nagar News: कलेजे के टुकड़े छीन रही नहर की डुबकी, जुलाई में सात मौत
Mon, 21 Jul 2025 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 21 Jul 2025 12:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गर्मी से पलभर के सुकून की डुबकी परिवारों से उनके कलेजे के टुकड़े छीन रही है। हालांकि जिले में नहर-नदियों में नहाने की मनाही पर है, पर किशोर व युवा ऐसा करने से नहीं रुक रहे। नहाने के साथ सेल्फी लेने व रील्स बनाने भी किशोर व युवा नहर-नदियों किनारे पहुंच रहे हैं, जहां जरा-सी लापरवाही उनकी जान ले रही है।
जुलाई माह में जिले में अलग-अलग जगह सात मौत हो चुकी है। इन बढ़ती घटनाओं पर प्रशासनिक कार्रवाई अभी भी महज नहर-नदियों पर नहाने के प्रतिबंध वाले बोर्ड लगाने तक सीमित है। सबसे अधिक नहाते समय किशोर व युवा पश्चिमी यमुना नहर में डूबते हैं। नहर किनारे कई जगह नगर निगम व जिला पुलिस की ओर से बोर्ड लगाए गए हैं।
इन पर लिखा है कि यहां कपड़े धोना और नहाना सख्त मना है, पर इन निर्देश की पालना कराने के लिए मौके पर कोई तैनात नहीं है। इस कारण बोर्ड पर लिखे नियम को सिरे से नकारा जा रहा है। इसके विपरित घाटों पर कम उम्र के बच्चे, किशोर व युवा नहाते दिखाई दे जाते हैं।
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पश्चिमी यमुना नहर ताजेवाला से छछरौली, जगाधरी, यमुनानगर व रादौर होते हुए करनाल की तरफ बहती है। सफाई व देखरेख के अभाव में नहर समतल नहीं रही। अवैध रूप से रेत निकालने से जगह-जगह कुंड बन गए। नहर से सैकड़ों लोगों को डूबने से बचाने वाले और सैकड़ों शवों को बाहर निकाल चुके गोताखोर सुखराम नहर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। उनका कहना है कि नहर में बने कुंडों से भंवर आने पर प्रशिक्षित गोताखोर का भी बचना मुश्किल है। इनको बंद किया जाना जरूरी है।
ढाई माह में डूबने की 45 घटनाएं
गोताखोर राजीव ने बताया कि इस साल गर्मी के सीजन में नहर-नदियों में लोगों के डूबने की घटनाएं ज्यादा हैं। गत वर्षों में मई से जुलाई के बीच 20-25 घटनाएं थीं, पर इस बार मई से जुलाई तक करीब 45 घटनाएं हो गई हैं। इनमें नहर में डूबे अधिकांश लोगों के शव निकाल चुके हैं। कई लोगों का पता नहीं लग पाया है। ऐसी बढ़ती घटनाओं में एक के बाद एक टूटते परिवारों का दर्द देख उन्होंने नहर में डूबते लोगों की तलाश व शव बाहर निकालने की सेवा निशुल्क कर दी है।
रविवार सुबह घर से निकला बूड़िया निवासी पवन (15) जब दोपहर तक घर वापस नहीं आया। तब यह बात पवन की माता ने फैक्ट्री गए पवन के पिता विरेंद्र को बताई। तभी परिजनों को पता चला कि नहर में कुछ लड़के डूब गए हैं। प्लाईवुड फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले विरेंद्र अपने साथियों के साथ नहर के किनारे पहुंचे। इस दौरान नहर से दो शव मिले, जिनकी पहचान नहीं हुई।
नहर से निकली दो लाशें देख पवन के पिता विरेंद्र खुद को रोक नहीं पाए और बेटे की फिक्र में खुद नहर में उसे तलाशने उतर गए। राजीव गोताखोर ने उन्हें समझा कर बाहर निकाला। नहर से पवन का शव निकला तो विरेंद्र ने अपना मोबाइल तोड़ दिया।
बेटे का शव देख तड़पने लगी मां
पवन की माता भी नहर किनारे पहुंची थी। जैसे ही गोताखोर राजीव ने पवन का शव नहर से बाहर निकाला, तभी दूर खड़ी पवन की मां नहर की ओर दौड़ पड़ी। कलेजे के टुकड़े को बेजान हालत में देख वह तड़पने लगी। उसे परिवार व पड़ोस की महिलाओं ने संभाला। आंखों में आंसू लिए पवन की मां एक ही बात कही जा रही थी कि पवन तूं कहां चला गया। पवन की माता के साथ उसके दो भाई व तीन बहनों का भी रो-रो कर हाल खराब हो गया।
अभिभावकों को होना होगा जागरूक : डॉ. अंजू
उत्थान सेवा संस्थान की संचालिका डॉ. अंजू वाजपेयी ने कहा कि नहर में डूबने वालों में अधिकतर बच्चे, किशोर व युवा होते हैं, इसलिए अभिभावकों को थोड़ा जागरूक रहते हुए उन्हें नहर में नहाने के खतरे के प्रति आगाह करना चाहिए। साथ ही इस बात का ख्याल रखना होगा कि बच्चे कहां और क्या कर रहे हैं, तभी इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
अभिभावकों को होना होगा जागरूक : डॉ. अंजू
उत्थान सेवा संस्थान की संचालिका डॉ. अंजू वाजपेयी ने कहा कि नहर में डूबने वालों में अधिकतर बच्चे, किशोर व युवा होते हैं, इसलिए अभिभावकों को थोड़ा जागरूक रहते हुए उन्हें नहर में नहाने के खतरे के प्रति आगाह करना चाहिए। साथ ही इस बात का ख्याल रखना होगा कि बच्चे कहां और क्या कर रहे हैं, तभी इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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यमुनानगर। गर्मी से पलभर के सुकून की डुबकी परिवारों से उनके कलेजे के टुकड़े छीन रही है। हालांकि जिले में नहर-नदियों में नहाने की मनाही पर है, पर किशोर व युवा ऐसा करने से नहीं रुक रहे। नहाने के साथ सेल्फी लेने व रील्स बनाने भी किशोर व युवा नहर-नदियों किनारे पहुंच रहे हैं, जहां जरा-सी लापरवाही उनकी जान ले रही है।
जुलाई माह में जिले में अलग-अलग जगह सात मौत हो चुकी है। इन बढ़ती घटनाओं पर प्रशासनिक कार्रवाई अभी भी महज नहर-नदियों पर नहाने के प्रतिबंध वाले बोर्ड लगाने तक सीमित है। सबसे अधिक नहाते समय किशोर व युवा पश्चिमी यमुना नहर में डूबते हैं। नहर किनारे कई जगह नगर निगम व जिला पुलिस की ओर से बोर्ड लगाए गए हैं।
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इन पर लिखा है कि यहां कपड़े धोना और नहाना सख्त मना है, पर इन निर्देश की पालना कराने के लिए मौके पर कोई तैनात नहीं है। इस कारण बोर्ड पर लिखे नियम को सिरे से नकारा जा रहा है। इसके विपरित घाटों पर कम उम्र के बच्चे, किशोर व युवा नहाते दिखाई दे जाते हैं।
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पश्चिमी यमुना नहर ताजेवाला से छछरौली, जगाधरी, यमुनानगर व रादौर होते हुए करनाल की तरफ बहती है। सफाई व देखरेख के अभाव में नहर समतल नहीं रही। अवैध रूप से रेत निकालने से जगह-जगह कुंड बन गए। नहर से सैकड़ों लोगों को डूबने से बचाने वाले और सैकड़ों शवों को बाहर निकाल चुके गोताखोर सुखराम नहर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। उनका कहना है कि नहर में बने कुंडों से भंवर आने पर प्रशिक्षित गोताखोर का भी बचना मुश्किल है। इनको बंद किया जाना जरूरी है।
ढाई माह में डूबने की 45 घटनाएं
गोताखोर राजीव ने बताया कि इस साल गर्मी के सीजन में नहर-नदियों में लोगों के डूबने की घटनाएं ज्यादा हैं। गत वर्षों में मई से जुलाई के बीच 20-25 घटनाएं थीं, पर इस बार मई से जुलाई तक करीब 45 घटनाएं हो गई हैं। इनमें नहर में डूबे अधिकांश लोगों के शव निकाल चुके हैं। कई लोगों का पता नहीं लग पाया है। ऐसी बढ़ती घटनाओं में एक के बाद एक टूटते परिवारों का दर्द देख उन्होंने नहर में डूबते लोगों की तलाश व शव बाहर निकालने की सेवा निशुल्क कर दी है।
रविवार सुबह घर से निकला बूड़िया निवासी पवन (15) जब दोपहर तक घर वापस नहीं आया। तब यह बात पवन की माता ने फैक्ट्री गए पवन के पिता विरेंद्र को बताई। तभी परिजनों को पता चला कि नहर में कुछ लड़के डूब गए हैं। प्लाईवुड फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले विरेंद्र अपने साथियों के साथ नहर के किनारे पहुंचे। इस दौरान नहर से दो शव मिले, जिनकी पहचान नहीं हुई।
नहर से निकली दो लाशें देख पवन के पिता विरेंद्र खुद को रोक नहीं पाए और बेटे की फिक्र में खुद नहर में उसे तलाशने उतर गए। राजीव गोताखोर ने उन्हें समझा कर बाहर निकाला। नहर से पवन का शव निकला तो विरेंद्र ने अपना मोबाइल तोड़ दिया।
बेटे का शव देख तड़पने लगी मां
पवन की माता भी नहर किनारे पहुंची थी। जैसे ही गोताखोर राजीव ने पवन का शव नहर से बाहर निकाला, तभी दूर खड़ी पवन की मां नहर की ओर दौड़ पड़ी। कलेजे के टुकड़े को बेजान हालत में देख वह तड़पने लगी। उसे परिवार व पड़ोस की महिलाओं ने संभाला। आंखों में आंसू लिए पवन की मां एक ही बात कही जा रही थी कि पवन तूं कहां चला गया। पवन की माता के साथ उसके दो भाई व तीन बहनों का भी रो-रो कर हाल खराब हो गया।
अभिभावकों को होना होगा जागरूक : डॉ. अंजू
उत्थान सेवा संस्थान की संचालिका डॉ. अंजू वाजपेयी ने कहा कि नहर में डूबने वालों में अधिकतर बच्चे, किशोर व युवा होते हैं, इसलिए अभिभावकों को थोड़ा जागरूक रहते हुए उन्हें नहर में नहाने के खतरे के प्रति आगाह करना चाहिए। साथ ही इस बात का ख्याल रखना होगा कि बच्चे कहां और क्या कर रहे हैं, तभी इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
अभिभावकों को होना होगा जागरूक : डॉ. अंजू
उत्थान सेवा संस्थान की संचालिका डॉ. अंजू वाजपेयी ने कहा कि नहर में डूबने वालों में अधिकतर बच्चे, किशोर व युवा होते हैं, इसलिए अभिभावकों को थोड़ा जागरूक रहते हुए उन्हें नहर में नहाने के खतरे के प्रति आगाह करना चाहिए। साथ ही इस बात का ख्याल रखना होगा कि बच्चे कहां और क्या कर रहे हैं, तभी इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।