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श्रद्धालुओं को भा रहा कागजी, गुड़बंदी और काठा अखरोट
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कपालमोचन मेले सजीं अखरोट और अन्य सूखे मेवे की दुकानें। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कपालमोचन में आए श्रद्धालुओं को जम्मू का कागजी, गुड़बंदी और काठा अखरोट श्रद्धालुओं को खूब भा रहा है। बिलासपुर-रणजीतपुर रोड पर अखरोट की करीब 30 फड़ियां लगी है। इन फड़ियों में दस प्रकार के अखरोट बिक रहे है।
अखरोट बेचने वाले सभी लोग मूलरूप से गुजरात के रहने वाले हैं। अधिकतर लोग 10 साल से अखरोट बेचने का काम करते आ रहे हैं। अखरोट बेच रही महिला रानी, ऊषा और सूर्या ने वह कपालमोचन मेले में अखरोट बेचने के लिए परिवार के साथ आती हैं। कई साल से कपाल मोचन मेले में अखरोट बेच रही हैं।
अखरोट बेचने वाली महिलाओं ने बताया कि वैैसे तो यह अखरोट जम्मूू का है। यह दांत व अन्य भारी वस्तु से तोड़ने की बजाय केवल हाथ से दबाने पर टूट जाता है। इस अखरोट की कीमत 100 रुपये प्रति किलो से 200 रुपये तक है। सस्ता होने के चलते श्रद्धालु भी काफी खरीद रहे हैं। अखरोट का काम करने वाली रानी ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने के चलते काम मंदा है। पूरे दिन में उन्होंने चार सौ रुपये ही कमाए हैं।
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यमुनानगर। कपालमोचन में आए श्रद्धालुओं को जम्मू का कागजी, गुड़बंदी और काठा अखरोट श्रद्धालुओं को खूब भा रहा है। बिलासपुर-रणजीतपुर रोड पर अखरोट की करीब 30 फड़ियां लगी है। इन फड़ियों में दस प्रकार के अखरोट बिक रहे है।
अखरोट बेचने वाले सभी लोग मूलरूप से गुजरात के रहने वाले हैं। अधिकतर लोग 10 साल से अखरोट बेचने का काम करते आ रहे हैं। अखरोट बेच रही महिला रानी, ऊषा और सूर्या ने वह कपालमोचन मेले में अखरोट बेचने के लिए परिवार के साथ आती हैं। कई साल से कपाल मोचन मेले में अखरोट बेच रही हैं।
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अखरोट बेचने वाली महिलाओं ने बताया कि वैैसे तो यह अखरोट जम्मूू का है। यह दांत व अन्य भारी वस्तु से तोड़ने की बजाय केवल हाथ से दबाने पर टूट जाता है। इस अखरोट की कीमत 100 रुपये प्रति किलो से 200 रुपये तक है। सस्ता होने के चलते श्रद्धालु भी काफी खरीद रहे हैं। अखरोट का काम करने वाली रानी ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने के चलते काम मंदा है। पूरे दिन में उन्होंने चार सौ रुपये ही कमाए हैं।
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