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संपत्ति क्षति वसूली विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन
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प्रदर्शन के दौरान जुलूस की शक्ल में लघु सचिवालय जाते विभिन्न संगठनों के सदस्य। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। संपत्ति क्षति वसूली विधेयक व कृषि कानून रद्द करने और किसानों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा, ट्रेड यूनियन एवं कई संगठनों के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने लघु सचिवालय के सामने अनाज मंडी गेट पर केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लघु सचिवालय से पहले रोक लिया। एडीसी रणजीत कौर ने आकर ज्ञापन लिया।
प्रदर्शन की अगुवाई संयुक्त किसान मोर्चा के गुरभजन सिंह मुझेल, जरनैल सिंह सांगवान, कृष्णपाल सुढ़ैल, सर्व कर्मचारी संघ से राजपाल सांगवान, सीटू से मतलूब हुसैन ने की। वक्ताओं ने कहा कि 18 मार्च को हरियाणा विधानसभा में संपत्ति क्षति वसूली विधेयक 2021 बनाया गया है। विधेयक में आंदोलन के दौरान वाली किसी भी तरह की क्षति की वसूली प्रदर्शनकारियों से करने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक लाकर शांतिपूर्ण तरीके से अपने हकों की लड़ाई लड़ने वालों का दमन आसान कर दिया गया है। जिलास्तरीय अदालत में इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। सिर्फ उच्च न्यायालय में ही इसकी सुनवाई की जाएगी। यही नहीं उच्च न्यायालय में भी तभी जा सकते हैं, जब भरपाई की कुल राशि का 20 प्रतिशत पहले जमा करवा दिया जाएगा।
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वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बनाए गए ऐसे ही कानून का सरकार दुरुपयोग कर रही है। विरोध जताना, आंदोलन करना जनता का संवैधानिक अधिकार है। प्रदेश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर गंभीर अपराध के सैकड़ों केस दर्ज हैं। देश की व्यवस्था पूंजीपतियों को सौंपने की भूमिका तैयार कर दी गई है। श्रम कानूनों में परिवर्तन करके काम के घंटे 8 की बजाए 12 किए जा चुके हैं।
संगठनों ने कृषि कानून, संपत्ति क्षति वसूली विधेयक और किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग उठाई। इस मौके पर सतपाल कौशिक, विजय पाल, महिपाल चमरोड़ी, रामकुमार कांबोज, दीपक तेजली, गुलशन भारद्वाज, मांगे राम तिगरा, जापान सिंह, अधिवक्ता साहब सिंह गुर्जर, सोमनाथ, नायाब सिंह, यशपाल, अजमेर सिंह संधू, मान सिंह मंडेबर, मोहन लाल मुंडा खेड़ा मौजूद रहे।
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जगाधरी। संपत्ति क्षति वसूली विधेयक व कृषि कानून रद्द करने और किसानों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा, ट्रेड यूनियन एवं कई संगठनों के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने लघु सचिवालय के सामने अनाज मंडी गेट पर केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लघु सचिवालय से पहले रोक लिया। एडीसी रणजीत कौर ने आकर ज्ञापन लिया।
प्रदर्शन की अगुवाई संयुक्त किसान मोर्चा के गुरभजन सिंह मुझेल, जरनैल सिंह सांगवान, कृष्णपाल सुढ़ैल, सर्व कर्मचारी संघ से राजपाल सांगवान, सीटू से मतलूब हुसैन ने की। वक्ताओं ने कहा कि 18 मार्च को हरियाणा विधानसभा में संपत्ति क्षति वसूली विधेयक 2021 बनाया गया है। विधेयक में आंदोलन के दौरान वाली किसी भी तरह की क्षति की वसूली प्रदर्शनकारियों से करने का प्रावधान किया गया है।
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विधेयक लाकर शांतिपूर्ण तरीके से अपने हकों की लड़ाई लड़ने वालों का दमन आसान कर दिया गया है। जिलास्तरीय अदालत में इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। सिर्फ उच्च न्यायालय में ही इसकी सुनवाई की जाएगी। यही नहीं उच्च न्यायालय में भी तभी जा सकते हैं, जब भरपाई की कुल राशि का 20 प्रतिशत पहले जमा करवा दिया जाएगा।
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वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बनाए गए ऐसे ही कानून का सरकार दुरुपयोग कर रही है। विरोध जताना, आंदोलन करना जनता का संवैधानिक अधिकार है। प्रदेश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर गंभीर अपराध के सैकड़ों केस दर्ज हैं। देश की व्यवस्था पूंजीपतियों को सौंपने की भूमिका तैयार कर दी गई है। श्रम कानूनों में परिवर्तन करके काम के घंटे 8 की बजाए 12 किए जा चुके हैं।
संगठनों ने कृषि कानून, संपत्ति क्षति वसूली विधेयक और किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग उठाई। इस मौके पर सतपाल कौशिक, विजय पाल, महिपाल चमरोड़ी, रामकुमार कांबोज, दीपक तेजली, गुलशन भारद्वाज, मांगे राम तिगरा, जापान सिंह, अधिवक्ता साहब सिंह गुर्जर, सोमनाथ, नायाब सिंह, यशपाल, अजमेर सिंह संधू, मान सिंह मंडेबर, मोहन लाल मुंडा खेड़ा मौजूद रहे।