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दैनिक यात्रियों ने की अंबाला-सहारनपुर मार्ग पर पैसेंजर ट्रेन बढ़ाने की मांग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Aug 2021 01:45 AM IST
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Demand to increase passenger train on Ambala-Saharanpur route, Yamunanagar
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले साल के लॉकडाउन में बंद की गई पैसेंजर ट्रेनों का संचालन अब तक नहीं किया गया है, जबकि रेलवे ने संक्रमण का हवाला देते हुए विशेष श्रेणी में मेल एक्सप्रेस गाड़ियां का संचालन शुरू कर दिया है। ये ट्रेन अंबाला और सहारनपुर के बीच केवल यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन पर ही रुकती है। इसके अलावा बराड़ा, मुस्तफाबाद, दराजपुर, जगाधरी वर्कशॉप, कलानौर, सरसावा, पिलखनी आदि छोटे स्टेशनों पर नहीं रुकती, जिसके चलते इन स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों ने रेलवे से पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
लॉकडाउन से पहले अंबाला-सहारनपुर मार्ग पर आठ जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें चलती थी, लेकिन अब केवल एक जोड़ी ट्रेन ही चलाई जा रही हैं। ऐसे में दैनिक यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। ट्रेन की कमी होने के कारण लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं निजी यातायात साधन से सफर करना उनकी जेब पर भारी पड़ता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में दुकानदार व छोटे व्यापारी सामान लेकर आते जाते थे, लेकिन काफी समय से ये लोग भी परेशान हैं।
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यमुनानगर जगाधरी होकर आठ जोड़ी पैसेंजर ट्रेन निकलती थी, लेकिन अब केवल एक जोड़ी ट्रेन है। पहले प्रतिदिन दोनों तरफ 16 सवारी गाड़ियां गुजरती थी। औसत के अनुसार करीब 60 फीसदी यात्री पैसेंजर गाड़ियों में सफर करते हैं। यहां से उत्तरप्रदेश के पिलखनी, सरसावा, देवबंद, मुज्जफरनगर के अलावा कलानौर, दराजपुर, मुस्तफाबाद, बराड़ा, तंदवाल, केसरी, दुखेड़ी, अंबाला, अंबाला शहर, धूलकोट, राजपुरा सहित तमाम स्थानों पर जाने वालों की बड़ी संख्या है। दैनिक यात्रियों का कहना है कि इसके संचालन से लोगों को तो लाभ होगा ही, वहीं रेलवे का राजस्व भी बढ़ेगा। कोरोना संक्रमण के ध्यान में रखते हुए रेलवे इसमें नियमावली लागू करें, परंतु नियमित रूप से इनका संचालन किया जाए।
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हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र मित्तल ने कहा कि व्यापार के सिलसिले में छोटे व्यापारियों को सरसावा, पिलखनी, सहारनपुर, अंबाला, राजपुरा सहित अन्य छोटे कस्बों में भी जाना होता है। ऐसे में पैसेंजर ट्रेन से वे आना जाना करते थे, जिससे समय व धन की बचत होती थी। लॉकडाउन के समय से बंद सवारी गाड़ियों के कारण उन्हें निजी वाहन से जाना पड़ रहा है, जिससे समय अधिक लगता है और धन की भी हानि हो रही है। रेलवे को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
मुकेश सैनी ने कहा कि पैसेंजर न चलने से कस्बों का शहर से संपर्क कट गया है। कस्बा निवासियों का अब शहर आना कम हो गया है। क्योंकि कस्बों में रोडवेज सहित अन्य यातायात के साधन कम हैं। यहां के लोग पैसेंजर ट्रेन से सफर करना पसंद करते हैं। रेलवे को लोगों की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। शीघ्र ही इसका समाधान करना चाहिए।

दैनिक यात्री संघ के प्रधान हरप्रीत सिंह रोमी ने कहा कि पैसेंजर ट्रेन न चलने से लोगों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। स्टेशन से प्रतिदिन करीब पांच हजार दैनिक यात्री दूसरे शहरों में नौकरी, व्यवसाय, मजदूरी करने जाते हैं, वहीं इतने ही लोग रोजाना आते थे। अब सवारी गाड़ी न होने से अधिकांश लोगों की नौकरी चली गई हैं, चूंकि सड़क मार्ग से पहुंचने काफी समय लगाता है। इसलिए रेलवे शीघ्र पैसेंजर गाड़ियों का संचालन करे।
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