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कोरोना की जांच रिपोर्ट में देरी से बढ़ सकती है परेशानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कोरोना की जांच रिपोर्ट आने में देरी होने के कारण मरीजों के साथ साथ अन्य लोगों की भी परेशानी बढ़ सकती है। संदिग्ध मरीजों की जांच तो की जा रही है, लेकिन रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग रहे हैं। जांच कराने वाले व्यक्ति लापरवाही बरत रहेे है, वह सार्वजनिक स्थानों और अपने घर में परिवार के घुल मिलकर रह रहा है। ऐसे ही दो मामलों में संदिग्ध जांच कराकर चले गए। जब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर स्वास्थ्य विभाग ने फोन किया तो एक व्यक्ति बैंक मेें था और एक बच्चा स्कूल में पढ़ाई कर रहा था।
जिले में कोरोना संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रतिदिन संक्रमित मरीजों की मौत हो रही है। कोरोना संदिग्ध व्यक्ति की जांच रिपोर्ट देरी से आ रही है। ऐसे में संदिग्ध व्यक्ति सब जगहों पर घूम रहा है और लोगों संक्रमण बांट रहा है। जिला अस्पताल में लगी आरटीपीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट) मशीन एक दिन में एक हजार सैंपल की जांच कर सकती है। कोरोना संक्रमण बढ़ने से मशीन पर लोड बढ़ रहा है। वहीं एंटीजन की रिपोर्ट पर भी लोग विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं जिले में 2100 से ज्यादा रिपोर्ट लंबित हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से फिलहाल कम ही सैंपल लिए जा रहे हैं। ऐसे में रिपोर्ट भी लंबित कम हैं। सैंपलिंग बढ़ी तो जांच की स्थिति और खराब हो सकती है। जिले में ज्यादातर बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
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हैरानी की बात यह है कि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के पास स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंच पा रही है। हालांकि कॉल कर स्वास्थ्य की जानकारी जरूर ली जा रही है। होम आइसोलेशन में रहने वाले संक्रमित मरीज का सैंपल सात दिन के बाद लिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग अपनी ओर से सात दिन और एहतियात के तौर पर मरीज को आइसोलेशन में रहने की सलाह दे रहा है। लेकिन कोई भी जांच के लिए नहीं पहुंच रहा है।
निगेटिव रिपोर्ट के बाद दिख रहे लक्षण
कोरोना की दूसरी वेव इतनी खतरनाक है कि आरटीपीसीआर मशीन में भी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। लेकिन उसमें कोरोना के सभी लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कई की हालत बिगड़ भी चुकी है। कई व्यक्तियों की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन उसमें कोरोना के लक्षण भी थे। लोगों ने फोन पर चिकित्सक से दवा के लिए परामर्श भी किया। लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और जब दोबारा जांच कराई तो पॉजिटिव आई।
एचआरसीटीसी दे रहे सलाह
मरीजों में कोरोना के सभी लक्षण होने के बाद भी आरटीपीसीआर से निगेटिव रिपोर्ट आ रही है। ऐसे में निजी चिकित्सक एचआरसीटीसी (हाई रिर्जेल्यूशन सीटी स्कैन) कराने की सलाह दे रहे हैं, जिसकी जांच कराने के बाद फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि यूके स्ट्रेन में आरटीपीसीआर से पुष्टि नहीं हो पा रही है।
कुरुक्षेत्र के सैंपलों की भी होती है जांच
कुरुक्षेत्र के जिला अस्पताल में कोई भी लैब फिलहाल नहीं बनाई गयी है। इस कारण यमुनानगर में बनी लैब के पास कुरुक्षेत्र से प्रतिदिन सैंपल पहुंच रहे हैं। इस कारण लोगों जांच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। वहीं आरटीपीसीआर मशीन पर भी लोड़ बढ़ गया है।
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यमुनानगर। कोरोना की जांच रिपोर्ट आने में देरी होने के कारण मरीजों के साथ साथ अन्य लोगों की भी परेशानी बढ़ सकती है। संदिग्ध मरीजों की जांच तो की जा रही है, लेकिन रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग रहे हैं। जांच कराने वाले व्यक्ति लापरवाही बरत रहेे है, वह सार्वजनिक स्थानों और अपने घर में परिवार के घुल मिलकर रह रहा है। ऐसे ही दो मामलों में संदिग्ध जांच कराकर चले गए। जब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर स्वास्थ्य विभाग ने फोन किया तो एक व्यक्ति बैंक मेें था और एक बच्चा स्कूल में पढ़ाई कर रहा था।
जिले में कोरोना संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रतिदिन संक्रमित मरीजों की मौत हो रही है। कोरोना संदिग्ध व्यक्ति की जांच रिपोर्ट देरी से आ रही है। ऐसे में संदिग्ध व्यक्ति सब जगहों पर घूम रहा है और लोगों संक्रमण बांट रहा है। जिला अस्पताल में लगी आरटीपीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट) मशीन एक दिन में एक हजार सैंपल की जांच कर सकती है। कोरोना संक्रमण बढ़ने से मशीन पर लोड बढ़ रहा है। वहीं एंटीजन की रिपोर्ट पर भी लोग विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।
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वहीं जिले में 2100 से ज्यादा रिपोर्ट लंबित हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से फिलहाल कम ही सैंपल लिए जा रहे हैं। ऐसे में रिपोर्ट भी लंबित कम हैं। सैंपलिंग बढ़ी तो जांच की स्थिति और खराब हो सकती है। जिले में ज्यादातर बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
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हैरानी की बात यह है कि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के पास स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंच पा रही है। हालांकि कॉल कर स्वास्थ्य की जानकारी जरूर ली जा रही है। होम आइसोलेशन में रहने वाले संक्रमित मरीज का सैंपल सात दिन के बाद लिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग अपनी ओर से सात दिन और एहतियात के तौर पर मरीज को आइसोलेशन में रहने की सलाह दे रहा है। लेकिन कोई भी जांच के लिए नहीं पहुंच रहा है।
निगेटिव रिपोर्ट के बाद दिख रहे लक्षण
कोरोना की दूसरी वेव इतनी खतरनाक है कि आरटीपीसीआर मशीन में भी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। लेकिन उसमें कोरोना के सभी लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कई की हालत बिगड़ भी चुकी है। कई व्यक्तियों की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन उसमें कोरोना के लक्षण भी थे। लोगों ने फोन पर चिकित्सक से दवा के लिए परामर्श भी किया। लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और जब दोबारा जांच कराई तो पॉजिटिव आई।
एचआरसीटीसी दे रहे सलाह
मरीजों में कोरोना के सभी लक्षण होने के बाद भी आरटीपीसीआर से निगेटिव रिपोर्ट आ रही है। ऐसे में निजी चिकित्सक एचआरसीटीसी (हाई रिर्जेल्यूशन सीटी स्कैन) कराने की सलाह दे रहे हैं, जिसकी जांच कराने के बाद फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि यूके स्ट्रेन में आरटीपीसीआर से पुष्टि नहीं हो पा रही है।
कुरुक्षेत्र के सैंपलों की भी होती है जांच
कुरुक्षेत्र के जिला अस्पताल में कोई भी लैब फिलहाल नहीं बनाई गयी है। इस कारण यमुनानगर में बनी लैब के पास कुरुक्षेत्र से प्रतिदिन सैंपल पहुंच रहे हैं। इस कारण लोगों जांच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। वहीं आरटीपीसीआर मशीन पर भी लोड़ बढ़ गया है।