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Yamuna Nagar News: देरी बनी वरदान, परिवार की बच गई जान
Thu, 04 Sep 2025 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 04 Sep 2025 01:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। अक्सर देरी के कारण लोगों के काम बिगड़ जाते हैं। वहीं कई बार देरी जिंदगी के लिए वरदान साबित हो जाती है। ऐसा ही शहर निवासी कुछ लोगों के साथ हुआ, जिन्होंने कटरा पहुंचने के बाद देरी से वैष्णो दरबार की चढ़ाई शुरू की थी। यही देरी उन लोगों के जीवन के लिए वरदान बन गई।
उनका कहना है कि उन्होंने वहां प्रकृति का ऐसा तांड़व देखा, जिसे वह कभी भूल नहीं सकते हैं। किसी तरह सकुशल लौटने पर उन्होंने जिंदगी के सबसे भयावह अनुभव के बारे में बताया।
शहर की गोबिंदपुरी निवासी रवि कुमार ने बताया कि वह परिवार के साथ मां वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए गए थे। परिवार के दस से ज्यादा सदस्य और बच्चे उनके साथ थे। उनकी किस्मत अच्छी थी कि कटरा पहंचने के बाद उन्होंने चढ़ाई देरी से शुरू की। इसी देरी ने उन्हें व उनके परिवार को उस प्रलय से बचा लिया। रवि ने बताया कि 24 सितंबर को वे जम्मू के लिए सपरिवार निकले थे। परिवार में चार बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग भी थे। जम्मू से वे सभी कटरा जाने के लिए बस में सवार हुए। इस दौरान उन्होंने सीधे वैष्णो दरबार जाने के बजाए शिव खोड़ी जाने का मन मनाया। वहां से लौटकर उन्होंने चढ़ाई की। इस दौरान रास्ते में ही उन्हें रोक दिया गया।
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उन्होंने देखा कि चारों तरह भगदड़ और चीख पुकार मची है। पता चला कि कुछ दूरी पर ही पहाड़ गिरने से कई लोग दब गए हैं। उनके सामने चुनौती थी कि बच्चों व महिलाओं को वहां से सुरक्षित दूर लेकर जाना। वह बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे और वहां से अपने होटल में आ गए। जहां आने पर उन्हें वास्तविक स्थिति का पता चला।
वे चार दिन वहीं पर फंसे रहे। उन्हें लगा था कि कोई मदद मिलेगी परंतु कोई सहायता नहीं मिली। बहुत से लोग अपने लापता परिजनों के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था। वहीं, शहर निवासी विक्रम सिंह ने बताया कि परिवार के साथ वैष्णो दरबार दर्शन के लिए गए थे। वहां ऐसा अनुभव हुआ है, जो हमेशा इस प्रलय की याद दिलवाएगा। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद वहां पर मानवता के कई रंग देखने को मिले। हादसे के बाद चारों खाने-पीने की किल्लत हो गई। इसका कई लोगों ने फायदा उठाया। कई ढाबा संचालकों व दुकानदारों ने चीजों के दाम चार गुणा कर दिए। 50 रुपये में मिलने वाले खाने की थाली 150 से 200 रुपये मिलने लगी। होटलों में कमरों के दाम कई गुना कर दिए गए ।
हालात ऐसे रहे कि होटलों में कमरों की बोली होने लगी। 500 रुपये के कमरे के लिए लोग 3000 रुपये देने के लिए तैयार थे। दो दिन वे ऐसे ही परेशान रहे। इसके बाद श्राइन बोर्ड ने लोगों के लिए ठहरने व खाने का बंदोबस्त किया। इस दौरान लोगों में श्राइन बोर्ड के खिलाफ भारी रोष देखने को मिला। लोगों ने सड़क पर निकलकर बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी की। चार दिन यह भयावह मंजर देखने के बाद वे किसी तरह घर पहुंचे।
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जगाधरी। अक्सर देरी के कारण लोगों के काम बिगड़ जाते हैं। वहीं कई बार देरी जिंदगी के लिए वरदान साबित हो जाती है। ऐसा ही शहर निवासी कुछ लोगों के साथ हुआ, जिन्होंने कटरा पहुंचने के बाद देरी से वैष्णो दरबार की चढ़ाई शुरू की थी। यही देरी उन लोगों के जीवन के लिए वरदान बन गई।
उनका कहना है कि उन्होंने वहां प्रकृति का ऐसा तांड़व देखा, जिसे वह कभी भूल नहीं सकते हैं। किसी तरह सकुशल लौटने पर उन्होंने जिंदगी के सबसे भयावह अनुभव के बारे में बताया।
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शहर की गोबिंदपुरी निवासी रवि कुमार ने बताया कि वह परिवार के साथ मां वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए गए थे। परिवार के दस से ज्यादा सदस्य और बच्चे उनके साथ थे। उनकी किस्मत अच्छी थी कि कटरा पहंचने के बाद उन्होंने चढ़ाई देरी से शुरू की। इसी देरी ने उन्हें व उनके परिवार को उस प्रलय से बचा लिया। रवि ने बताया कि 24 सितंबर को वे जम्मू के लिए सपरिवार निकले थे। परिवार में चार बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग भी थे। जम्मू से वे सभी कटरा जाने के लिए बस में सवार हुए। इस दौरान उन्होंने सीधे वैष्णो दरबार जाने के बजाए शिव खोड़ी जाने का मन मनाया। वहां से लौटकर उन्होंने चढ़ाई की। इस दौरान रास्ते में ही उन्हें रोक दिया गया।
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उन्होंने देखा कि चारों तरह भगदड़ और चीख पुकार मची है। पता चला कि कुछ दूरी पर ही पहाड़ गिरने से कई लोग दब गए हैं। उनके सामने चुनौती थी कि बच्चों व महिलाओं को वहां से सुरक्षित दूर लेकर जाना। वह बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे और वहां से अपने होटल में आ गए। जहां आने पर उन्हें वास्तविक स्थिति का पता चला।
वे चार दिन वहीं पर फंसे रहे। उन्हें लगा था कि कोई मदद मिलेगी परंतु कोई सहायता नहीं मिली। बहुत से लोग अपने लापता परिजनों के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था। वहीं, शहर निवासी विक्रम सिंह ने बताया कि परिवार के साथ वैष्णो दरबार दर्शन के लिए गए थे। वहां ऐसा अनुभव हुआ है, जो हमेशा इस प्रलय की याद दिलवाएगा। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद वहां पर मानवता के कई रंग देखने को मिले। हादसे के बाद चारों खाने-पीने की किल्लत हो गई। इसका कई लोगों ने फायदा उठाया। कई ढाबा संचालकों व दुकानदारों ने चीजों के दाम चार गुणा कर दिए। 50 रुपये में मिलने वाले खाने की थाली 150 से 200 रुपये मिलने लगी। होटलों में कमरों के दाम कई गुना कर दिए गए ।
हालात ऐसे रहे कि होटलों में कमरों की बोली होने लगी। 500 रुपये के कमरे के लिए लोग 3000 रुपये देने के लिए तैयार थे। दो दिन वे ऐसे ही परेशान रहे। इसके बाद श्राइन बोर्ड ने लोगों के लिए ठहरने व खाने का बंदोबस्त किया। इस दौरान लोगों में श्राइन बोर्ड के खिलाफ भारी रोष देखने को मिला। लोगों ने सड़क पर निकलकर बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी की। चार दिन यह भयावह मंजर देखने के बाद वे किसी तरह घर पहुंचे।