फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   deepak, cancer

छह महीने से तड़प रहा था दीपक, आयुष्मान ने बचाई कैंसर से जान

Wed, 18 Sep 2019 12:18 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 12:18 AM IST
विज्ञापन
deepak, cancer
अस्पताल में डायलिसिस के दौरान पूजा । - फोटो : YAMUNA NAGAR
आयुष्मान भारत योजना गरीब मरीजों को नई जिंदगी दे रही है। मायापुरी के 35 वर्षीय दीपक कुमार के लिए आयुष्मान वरदान साबित हुई है। दीपक छह माह से मुंह के कैंसर से पीड़ित था। शुरूआती दौर में यह दिक्कत कम थी। धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ने लगी। ऐसे में खाना खाने में भी दिक्कत आने लगी। उसने इस बारे में कई लोगों से बातचीत की। टेस्ट करवाने पर पता चला उसे मुंह का कैंसर है और इसके इलाज के लिए काफी खर्च आएगा। लेकिन इतना खर्च करने में उसकी गुंजाइश नहीं थी। ऐसे में टेंशन ने उसके मर्ज को और बढ़ा दिया।
विज्ञापन

आयुष्मान कार्ड बनने से बची जान : दीपक बताते हैं वह प्लाइवुड फैक्टरी में मजदूरी का कार्य करता था। इसी से वह अपने परिवार का भरण पोषण करता आया। 2018 में आयुष्मान योजना के तहत उसका कार्ड बना। बीमारी से पीड़ित होने के बाद वह मॉडल टाउन स्थित स्वामी विवेकानंद मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में 19 अगस्त को इलाज करवाने के लिए पहुुंचा और आयुष्मान कार्ड दिखाया। उस वक्त उसकी हालत काफी दयनीय थी। अस्पताल स्टाफ के मुताबिक वह ठीक से बोल भी नहीं पाता था। टेस्ट करने के बाद डॉ. विक्रांत ने उन्हें ऑपरेशन करने के लिए कहा। इस दौरान दीपक की तीन बार सर्जरी भी हुई। ऑपरेशन सफल होने के बाद उसकी 25 अगस्त को छुट्टी हो गई। अस्पताल की ऑपरेशन हेड आभा कांबोज ने बताया कि अगर वह बाहर से इलाज करवाता तो चार से पांच लाख रुपये का खर्च आता, लेकिन आयुष्मान योजना के तहत उनका इलाज संभव हो पाया है। दीपक ने बताया कि आयुष्मान योजना ने उसे नया जीवन देने का काम किया है।
विज्ञापन

सुदेश पत्थरी से थी परेशान : स्वामी विवेकानंद मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में ही पित्त की पत्थरी का इलाज करवा रही चिट्टा मंदिर की 35 वर्षीय सुदेश रानी ने बताया कि तीन-चार माह से पत्थरी के दर्द से परेशान थी। पति रामकुमार मजदूरी कर परिवार का पोषण करता है, ऐसे में उनके पास इतने भी पैसे नहीं थे वह ऑपरेशन करवा ले। लेकिन आयुष्मान कार्ड बना होने से उसका ऑपरेशन होने के बाद इलाज संभव हो पाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दो किडनिया हो चुकी थी खराब : इसी तरह चिट्टा मंदिर की 34 वर्षीय पूजा बताती है उसकी एक साल से दोनों किडनियां खराब है। पति बैग बनाने का काम करता है। बीमारी ज्यादा बढ़ने के कारण वह इलाज नहीं करवा पा रहे थे। लेकिन आयुष्मान कार्ड बनवाने के बाद उन्होंने गाबा अस्पताल में इलाज करवा रही है। पूजा का कहना है उसने उम्मीद ही छोड़ दी थी वह अब बच नहीं पाएगी, किंतु आयुष्मान उसके लिए नया जीवन लेकर आया है। डॉ. बीएस गाबा ने बताया कि आयुष्मान योजना गरीब मरीजों के लिए राहत लेकर आया है। जो लोग पैसे के अभाव में इलाज नहीं करवा पा रहे थे अब उनका इलाज संभव हो पाया है।
प्रधानमंत्री की आयुष्मान योजना लोगों के इलाज के लिए वरदान साबित हो रही है। दस फीसदी केस ऐसे हैं जिनका पैसे के अभाव में इलाज होना संभव नहीं था, किंतु आयुष्मान कार्ड बना होने से उन्हें नया जीवन मिल रहा है।

-डॉ. विजय दहिया, जिला नोडल अधिकारी।

अस्पताल में ईलाज के दौरान गांव महमुदपुर की सुदेश।

अस्पताल में ईलाज के दौरान गांव महमुदपुर की सुदेश।- फोटो : YAMUNA NAGAR

आयुष्मान योजना में कैंसर का ऑपरेशन होने के बाद डॉक्टरों से बात करते दीपक

आयुष्मान योजना में कैंसर का ऑपरेशन होने के बाद डॉक्टरों से बात करते दीपक- फोटो : YAMUNA NAGAR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed