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Yamuna Nagar News: समयसीमा समाप्त, मिलरों के पास 20 फीसदी चावल बकाया
Tue, 30 Jun 2026 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 30 Jun 2026 11:48 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। धान कुटाई के बाद मिलरों ने सरकार का पूरा चावल अभी तक वापस नहीं किया है। चावल लौटाने की 30 जून को अंतिम तिथि थी। चंडीगढ़ से विभाग की टीम ने धान लेने वाली राइस मिलों की भौतिकी जांच की। इसमें सामने आया कि करीब 80 प्रतिशत चावल मिल गया है और 20 प्रतिशत बकाया है।
बता दें कि सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) योजना के तहत राइस मिलरों को 30 जून तक धान की कुटाई के बाद पूरा चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को वापस लौटाना था, लेकिन जिले के अधिकांश राइस मिलर निर्धारित समय सीमा तक लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए हैं। अब तक करीब 80 प्रतिशत चावल ही एफसीआई को लौटाया गया है। ऐसे में सरकार ने जिले की राइस मिलों में धान और चावल के बचे हुए स्टॉक का भौतिक सत्यापन करवाया है। राइस मिलरों का तर्क है कि एफसीआई के गोदामों में पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण वे पूरा चावल जमा नहीं करा सके। इसी आधार पर मिलर सरकार से समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। पिछले वर्ष सामने आए धान घोटाले के बाद सरकार इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
जिले में करीब 185 राइस मिल हैं, जिन्हें सरकार की ओर से धान कुटाई के लिए आवंटित किया गया था। खाद्यापूर्ति एवं नियंत्रक नीतिश सिंघला ने कहा कि टीम की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अभी 20 प्रतिशत चावल आना बाकी है। मुख्यालय के आदेशों पर मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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जगाधरी। धान कुटाई के बाद मिलरों ने सरकार का पूरा चावल अभी तक वापस नहीं किया है। चावल लौटाने की 30 जून को अंतिम तिथि थी। चंडीगढ़ से विभाग की टीम ने धान लेने वाली राइस मिलों की भौतिकी जांच की। इसमें सामने आया कि करीब 80 प्रतिशत चावल मिल गया है और 20 प्रतिशत बकाया है।
बता दें कि सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) योजना के तहत राइस मिलरों को 30 जून तक धान की कुटाई के बाद पूरा चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को वापस लौटाना था, लेकिन जिले के अधिकांश राइस मिलर निर्धारित समय सीमा तक लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए हैं। अब तक करीब 80 प्रतिशत चावल ही एफसीआई को लौटाया गया है। ऐसे में सरकार ने जिले की राइस मिलों में धान और चावल के बचे हुए स्टॉक का भौतिक सत्यापन करवाया है। राइस मिलरों का तर्क है कि एफसीआई के गोदामों में पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण वे पूरा चावल जमा नहीं करा सके। इसी आधार पर मिलर सरकार से समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। पिछले वर्ष सामने आए धान घोटाले के बाद सरकार इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
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जिले में करीब 185 राइस मिल हैं, जिन्हें सरकार की ओर से धान कुटाई के लिए आवंटित किया गया था। खाद्यापूर्ति एवं नियंत्रक नीतिश सिंघला ने कहा कि टीम की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अभी 20 प्रतिशत चावल आना बाकी है। मुख्यालय के आदेशों पर मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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