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सरस्वती नदी पर नौ महीने जल प्रवाह के लिए 387 करोड़ से बनेगा बांध
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प्राचीन काल में विलुप्त हुई सरस्वती को पुनर्जीवित करने में सबसे बड़ी अड़चन दूर हो गई है। हिमाचल सरकार ने बांध के एमओयू प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। एमओयू साइन होते ही सरस्वती नदी पर बांध बनाने का रास्ता साफ जाएगा। सरकार द्वारा पहले चरण में 387 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्रीय भूजल बोर्ड चंडीगढ़ के माध्यम से यह परियोजना तैयार की गई है। यह जानकारी सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने दी।
उन्होंने बताया कि बांध के पास जलाशय बनाने के लिए तीन गांव रामपुरा हेरियां, रामपुरा कंबोयान व संगौर की पंचायत ने 350 एकड़ जमीन का प्रस्ताव दिया है, जिस पर निर्मित जलाशय में 300 क्यूसेक पानी इकट्ठा करने क्षमता होगी। इतना पानी सरस्वती नदी के प्रवाह के लिए नौ महीने तक पर्याप्त होगा। वहीं सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड ने यमुनानगर के आदिबद्री से लेकर पिहोवा तक 20 बड़े जलाशय बनाने के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दे दी है। इन जलाशयों में भी बारिश का पानी एकत्र किया जाएगा। जब पानी की कमी होगी तो इन जलाशयों से नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच का कहना है कि सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। सरकार का मुख्य फोकस उद्गम स्थल आद्रिबद्री पर बांध बनाने का है, जिसे वर्ष 2024-25 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हिमाचल की 77 हेक्टेयर जमीन चाहिए
-अधिकारियों के मुताबिक आदिबद्री क्षेत्र में प्रस्तावित बांध स्थल में 77 हेक्टेयर जमीन हिमाचल के सिरमौर जिले की और 11 हेक्टेयर हरियाणा की है। बांध बनने से हिमाचल की लगभग तीन हजार की आबादी प्रभावित होगी, जिनके चारागाह स्थल डूब क्षेत्र में आएंगे। करार के तहत 25 से 30 करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रभावित क्षेत्र में हरियाणा सरकार को करने होंगे।
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पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद
पहाड़ों में कम बारिश और बर्फ नहीं पिघलने से भाखड़ा जलाशय व यमुना नदी में लगातार पानी कम हो रहा है। यमुना में करीब 1000 क्यूसेक पानी कम हो गया है। प्रदेश को रोजाना 7860 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन पानी की कमी के चलते अब 6117 क्यूसेक ही पानी मिल रहा है।
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उन्होंने बताया कि बांध के पास जलाशय बनाने के लिए तीन गांव रामपुरा हेरियां, रामपुरा कंबोयान व संगौर की पंचायत ने 350 एकड़ जमीन का प्रस्ताव दिया है, जिस पर निर्मित जलाशय में 300 क्यूसेक पानी इकट्ठा करने क्षमता होगी। इतना पानी सरस्वती नदी के प्रवाह के लिए नौ महीने तक पर्याप्त होगा। वहीं सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड ने यमुनानगर के आदिबद्री से लेकर पिहोवा तक 20 बड़े जलाशय बनाने के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दे दी है। इन जलाशयों में भी बारिश का पानी एकत्र किया जाएगा। जब पानी की कमी होगी तो इन जलाशयों से नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच का कहना है कि सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। सरकार का मुख्य फोकस उद्गम स्थल आद्रिबद्री पर बांध बनाने का है, जिसे वर्ष 2024-25 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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हिमाचल की 77 हेक्टेयर जमीन चाहिए
-अधिकारियों के मुताबिक आदिबद्री क्षेत्र में प्रस्तावित बांध स्थल में 77 हेक्टेयर जमीन हिमाचल के सिरमौर जिले की और 11 हेक्टेयर हरियाणा की है। बांध बनने से हिमाचल की लगभग तीन हजार की आबादी प्रभावित होगी, जिनके चारागाह स्थल डूब क्षेत्र में आएंगे। करार के तहत 25 से 30 करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रभावित क्षेत्र में हरियाणा सरकार को करने होंगे।
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पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद
पहाड़ों में कम बारिश और बर्फ नहीं पिघलने से भाखड़ा जलाशय व यमुना नदी में लगातार पानी कम हो रहा है। यमुना में करीब 1000 क्यूसेक पानी कम हो गया है। प्रदेश को रोजाना 7860 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन पानी की कमी के चलते अब 6117 क्यूसेक ही पानी मिल रहा है।