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Yamuna Nagar News: मंदिरों में उमड़ी भीड़, गूंजते रहे जयकारे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2024 02:46 AM IST
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Crowds gathered in temples, cheers kept resonating
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ वीरवार से हो गया। इस दौरान जय माता दी के जयकारों के साथ नवरात्र के पहले दिन तमाम मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सबसे ज्यादा भीड़ माता रानी के मंदिर के अलावा प्राचीन, ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिरों में देखने को मिली। मंदिरों में तड़के चार बजे ही श्रद्धालुओं का तांता लगने लगा था। इस दौरान मां के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठे।
नवरात्र के चलते अलसुबह ही मंदिरों के कपाट खोल दिए गए थे, लेकिन भक्तों भोर चार बजे दर्शन कर सके। व्रत करने वालों ने व्रत धारण किया। दिनभर मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली। इस दौरान प्रात: व संध्या आरती में भारी भीड़ उमड़ी। नवरात्र को लेकर मंदिरों को फूलों व रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। रात को मंदिर रंगीन रोशनी में सराबोर नजर आए।
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मंदिरों में प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा की गई। पुजारियों के अनुसार शैलपुत्री माता का यह रूप अनेक नामों से लोक प्रसिद्ध है। सती, पार्वती, दुर्गा, उमा, अपर्णा, गौरी, महेश्वरी, शिवांगी, शुभांगी, पर्वतवासिनी इत्यादि नामों से भी पूजा जाता है। मंदिरों के अलावा घरों, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों पर भी नवरात्र पूजन की धूम देखने को मिली।
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पहले दिन श्रद्धालुओं ने घर में घट स्थापना कर मां शैलपुत्री की पूजा की। जगाधरी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मठ मंदिर, भंभौली स्थित स्वयं-भू महादेव मंदिर, आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर में भारी भीड़ रही।
मंदिर पहुंची सीमा, मोनिका, कंचन, प्रभा, रजनी, नीलम, पूनम ने बताया कि वह हर बार नवरात्र में व्रत करती हैं। उन्होंने बताया कि घर में कलश की स्थापना कर वे मंदिर आईं हैं। मंदिर में लंबी लाइन थी, जिस कारण काफी देर बाद उनका नंबर आया।
पंडित एवं ज्योतिषाचार्य रमन शर्मा ने बताया कि नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। मां ब्रह्मचारिणी ध्यान, ज्ञान, तपस्या, वैराग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। मां ब्रह्मचारिणी का उद्गम भगवान ब्रह्मा के कमंडल से हुआ है। उन्होंने बताया कि मां को सफेद पुष्प, फल, मिष्ठान पसंद हैं। ममता व करुणामयी मां ब्रह्मचारिणी क्षमाशील व सद्मार्ग दिखाने वाली हैं। साधक को उनकी पूजा कर अपने जाने अनजाने में किए पाप कर्मों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए।

ब्रह्मचारिणी की पूजा में गुड़हल या कमल के फूल का ही प्रयोग करें। मां को दूध से बनी चीजों का ही भोग लगाएं। इसके साथ ही मन में मां के मंत्र या जयकार करते रहें। इसके बाद पान-सुपारी भेंट कर प्रदक्षिणा करें। फिर कलश देवता और नवग्रह की पूजा करें। घी व कपूर से बने दीपक से माता की आरती करें। दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ करें। पाठ करने के बाद मां का जयघोष करें। इससे मां की असीम अनुकंपा प्राप्त होगी।
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