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बलभद्र मंदिर मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, करवाया दंगल
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Crowd of devotees gathered in Balabhadra temple fair, got riots done
- फोटो : Yamuna Nagar
रादौर। सतवा तीज पर मंगलवार को गांव धौलरा स्थित बलभद्र मंदिर में एक दिवसीय प्राचीन व ऐतिहासिक मेला लगाया गया। मेले का शुभारंभ पूर्व धौलरा सरपंच संजू शर्मा ने किया। इस दौरान मेले में क्षेत्र व दूर दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान बलभद्र के मंदिर में सत्तू का प्रसाद चढ़ा मन्नत मांगी। मेले में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मेले में लगी दुकानों से लोगों ने जमकर खरीदारी की।
मेले के दौरान लोगों के लिए ओमप्रकाश धौलरा, संजू धौलरा की ओर से भंडारा करवाया गया। जहां हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूर्व सरपंच संजू ने बताया कि यह मेला महाभारत काल से लगता आ रहा है। मंदिर में स्थापित मूर्ति हजारों वर्ष पूर्व खोदाई के दौरान मिली थी। जिसे गांव के लोगों ने एक पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया था। उन्हीं दिनों जगाधरी के एक सेठ बंसीलाल के यहां कोई संतान न थी तभी उनके सपने में भगवान बलभद्र ने दर्शन दिए और सेठ बंसीलाल को गांव धौलरा में उनका एक मंदिर बनवाने को कहा। जिस पर सेठ बंसीलाल ने गांव में पेड़ के नीचे रखी भगवान बलभद्र की मूर्ति बैल गाड़ियों से जगाधरी लाने की योजना बनाई लेकिन जब सेठ बंसीलाल मूर्ति बैलगाड़ी में लादकर गांव की सीमा के बाहर निकलने लगा तो बैल अंधे हो गए। जिसके बाद सेठ को अपनी गलती का अहसास हुआ।
सेठ बंसीलाल ने तभी भगवान बलभद्र का मंदिर गांव में बनवाया। जिसके बाद सेठ बंसीलाल के घर बेटे ने जन्म लिया तभी से गांव में हर वर्ष सतवा तीज के दिन मेला लगता आ रहा है। उन्होंने बताया कि भगवान बलभद्र के मंदिर में लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। खोदाई के दौरान मिली भगवान बलभद्र की मूर्ति किस धातु की बनी हैं। इसके बारे में आजतक पता नहीं चल पाया है। भगवान बलभद्र की मूर्ति पर कोई रंग नहीं ठहरता। कई बार उन्होंने मूर्ति पर रंग किया, लेकिन कुछ दिन में ही रंग उतर जाता है।
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मेले में करवाई दंगल प्रतियोगिता
मेले में 20 हजार से अधिक लोग भाग लेने पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों की ओर से दंगल करवाया गया। दंगल में क्षेत्र व दूरदराज के पहलवानों ने भाग लिया। पहलवानों ने ग्रामीणों का खूब मनोरंजन किया। विजेता पहलवानों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। पूर्व सरपंच संजू धौलरा ने कहा कि कुश्ती हमारी प्राचीन सभ्यता का प्रतीक है। गांव की पंचायत कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए दंगल करवाती है।
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मेले के दौरान लोगों के लिए ओमप्रकाश धौलरा, संजू धौलरा की ओर से भंडारा करवाया गया। जहां हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूर्व सरपंच संजू ने बताया कि यह मेला महाभारत काल से लगता आ रहा है। मंदिर में स्थापित मूर्ति हजारों वर्ष पूर्व खोदाई के दौरान मिली थी। जिसे गांव के लोगों ने एक पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया था। उन्हीं दिनों जगाधरी के एक सेठ बंसीलाल के यहां कोई संतान न थी तभी उनके सपने में भगवान बलभद्र ने दर्शन दिए और सेठ बंसीलाल को गांव धौलरा में उनका एक मंदिर बनवाने को कहा। जिस पर सेठ बंसीलाल ने गांव में पेड़ के नीचे रखी भगवान बलभद्र की मूर्ति बैल गाड़ियों से जगाधरी लाने की योजना बनाई लेकिन जब सेठ बंसीलाल मूर्ति बैलगाड़ी में लादकर गांव की सीमा के बाहर निकलने लगा तो बैल अंधे हो गए। जिसके बाद सेठ को अपनी गलती का अहसास हुआ।
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सेठ बंसीलाल ने तभी भगवान बलभद्र का मंदिर गांव में बनवाया। जिसके बाद सेठ बंसीलाल के घर बेटे ने जन्म लिया तभी से गांव में हर वर्ष सतवा तीज के दिन मेला लगता आ रहा है। उन्होंने बताया कि भगवान बलभद्र के मंदिर में लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। खोदाई के दौरान मिली भगवान बलभद्र की मूर्ति किस धातु की बनी हैं। इसके बारे में आजतक पता नहीं चल पाया है। भगवान बलभद्र की मूर्ति पर कोई रंग नहीं ठहरता। कई बार उन्होंने मूर्ति पर रंग किया, लेकिन कुछ दिन में ही रंग उतर जाता है।
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मेले में करवाई दंगल प्रतियोगिता
मेले में 20 हजार से अधिक लोग भाग लेने पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों की ओर से दंगल करवाया गया। दंगल में क्षेत्र व दूरदराज के पहलवानों ने भाग लिया। पहलवानों ने ग्रामीणों का खूब मनोरंजन किया। विजेता पहलवानों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। पूर्व सरपंच संजू धौलरा ने कहा कि कुश्ती हमारी प्राचीन सभ्यता का प्रतीक है। गांव की पंचायत कुश्ती को बढ़ावा देने के लिए दंगल करवाती है।