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पहले सड़कें बनाने में खर्चे करोड़ों, अब मरम्मत में लगेंगे लाखों

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2022 02:33 AM IST
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Crores were spent in building roads first, now lakhs will be spent in repairing
यमुनानगर। शहर में करोड़ों रुपये से बनाई गई नगर निगम की सड़कों को सालभर में ही मरम्मत की जरूरत पड़ गई है। क्योंकि निर्माण के समय मार्ग पर डाली सामग्री (तारकोल-बजरी) से पब्लिक हेल्थ के काफी सीवर हाल सड़कों में ही दब गए।
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इनको निकालने के लिए जगह-जगह सड़कें उखाड़नी पड़ रही हैं। यह स्थिति शहर में एक जगह नहीं कई जगह पर है। इन जगहों पर जहां पहले सड़कों के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए साल भर में ही मरम्मत पर लाखों रुपये खर्चने की नौबत आ गई है।
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महाराजा अग्रसेन चौक से बस स्टैंड
नगर निगम ने 4.45 करोड़ रुपये खर्च में महाराजा अग्रसेन (स्टेशन) चौक से बस स्टैंड वाया शहीद भगत सिंह चौक तक मार्ग की डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़ाई बढ़ाकर पुनर्निर्माण का काम कराया। ये काम सीएम अनाउंसमेंट का था, पर उसमें फंड कम पड़ने पर दो वर्ष पहले 6 माह तक ही काम चला। इसके बाद डेढ़ साल काम रुका रहा। तब एमसी फंड से दिसंबर-2020 फिर 10 जून 2021 में काम हुआ। लेकिन यहां सड़क निर्माण के बाद सीवर होल सड़क मटेरियल (तारकोल-बजरी) में लॉक (दबे) मिले, जिन्हें निकालने को जगह-जगह से सड़क उखाड़नी पड़ी। यह सिलसिला साल भर से जारी है। ऐसा नजारा शहीद भगत सिंह चौक, मेट्रो होटल, सिटी थाने व महिला थाने के सामने है, जहां मरम्मत की भी जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे।
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महाराणा प्रताप पार्क रोड-
नगर निगम ने वार्ड-9 में करोड़ों रुपये के खर्च से महाराणा प्रताप पार्क रोड भी नगर निगम ने तैयार कराया था, पर इसे भी सालभर में कई जगह से उखाड़ दिया गया। यहां भी सड़क निर्माण के बाद सीवर होल सड़क मटेरियल (तारकोल-बजरी) में लॉक (दबे) मिले, जिन्हें निकालने को जगह-जगह रोड उखाड़ना पड़ा। इनमें दो जगह मोड़ पर और एक जगह पार्क के सामने टाइलें उखाड़े तीन माह हो चुके हैं, पर यहां मरम्मत को लेकर जिम्मेदारों को सुध नहीं है।
साल भर उखाड़ी जाती निगम की सड़कें, तब भी रोड कट चार्ज इनकम कम:-
वर्ष - लक्ष्य - इनकम
2014-15 - 10 लाख - 13.32 लाख
2015-16 - 20 लाख - 2675 रुपए
2016-17 - 20 लाख - 11.12 लाख
2017-18 - 20 लाख - 3.34 करोड़
2018-19 - 1 करोड़ - 2390 रुपए
2019-20 - 1 करोड़ - 12.80 लाख
2020-21 - 1 करोड़ - 2.01 करोड़
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सरकारी धन की बर्बादी कर रहे अफसर-
वार्ड-4 से पार्षद देवेंद्र सिंह, वार्ड-8 से विनोद मरवाह, वार्ड-13 से निर्मल चौहान ने कहा कि मामले में नगर निगम व पब्लिक हेल्थ दोनों विभागों को कसूरवार हैं। क्योंकि सड़कें बनते वक्त दोनों विभागों के अफसर मौके पर रहें तो न सीवर होल सड़कों में दबेंगे और न सड़कें उखाड़ने व उनकी मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्चने की जरूरत पड़ेगी। लेकिन ऐसा न कर अफसर जनता के टैक्स से जुटाए सरकारी धन की बर्बादी कर रहे हैं। क्योंकि भले अनुमति लेकर नई-पुरानी सड़कें उखाड़ी जाएं, पर उनकी मरम्मत के नाम पर रोड कट चार्ज सरकारी खजाने से जाता है। साथ ही सड़कें उखाड़ने के बाद मरम्मत करने पर ज्यादा टिकाऊ नहीं बनती।

वर्जन
मामले में पता किया जाएगा उखाड़ी गई सड़कों की अनुमति ली गई या नहीं। अनुमति बिना ऐसा किए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। इसके लिए संबंधित अफसरों को निर्देश देंगे।
-आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
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