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चिह्नित करने तक सिमटी पराली को आग लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई -
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:59 PM IST
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पराली को लगी आग।
- फोटो : अमर उजाला
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देश की राजधानी व हरियाणा के कई जिलों में फैली प्रदूषित धुंध खेतों में पराली जलाने का दुष्परिणाम है। विश्व भर में इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा हो रही है, लेकिन किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए जिला प्रशासन अब तक संजीदा नहीं है। इस दिशा में प्रशासन द्वारा अब तक जो कार्रवाई हुई है, उससे यही साबित हो रहा है।
स्मॉग का कहर सामने आने के बाद सरकार का रुख कड़ा हुआ तो जिला स्तर पर पराली को आग लगाने वालों पर कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया गया। लेकिन अब तक पराली को आग लगाने वाले किसी भी किसान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसका असर यह है कि खेतों में अब भी लगातार पराली को आग लगाई जा रही है, जिससे वायु प्रदूषण में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते सप्ताह कृषि व राजस्व विभाग द्वारा जिले मेें पराली जलाने वाले 294 किसानों को चिह्नित किया गया था। इस दौरान सबूत के तौर पर वीडियोग्राफी भी करवाई गई। लेकिन अब तक इनके खिलाफ काई कार्रवाई नहीं की गई है। उधर, खेतों में अब भी पराली को जलाया जा रहा है।
कार्रवाई होने तक खेतों में जला दी जाएगी पराली-
कृषि विभाग के मुताबिक जिले में इस बार 71 हजार हेक्टेयर में धान की बिजाई हुई थी। जिले में कृषि कार्य के लिए एक लाख 26 हजार हेक्टेयर जमीन है। खेतों में धान की कटाई लगभग हो चुकी है और किसान पराली को खेत से निकालने में जुटे हुए हैं। अब तक करीब 85 प्रतिशत खेतों से पराली निकल चुकी है। जिन खेतों में पराली बची हैं, उन्हें किसान आग जलाकर नष्ट कर रहे हैं। पराली को आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ यदि जल्द कार्रवाई हो जाती तो इससे दूसरे किसान पराली को आग लगाने में परहेज करते। पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि जब तक प्रशासन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में लाएगा, तब तक सभी खेतों में पराली आग के हवाले हो जाएगी।
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खेतों में पराली जलाना गैर कानूनी है। कृषि विभाग ने खेतों में पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित कर इसकी रिपोर्ट प्रदूषण विभाग को भेज दी है। नियमानुसार इनके खिलाफ प्रदूषण विभाग ही आगामी कार्रवाई करेगा।
-डॉ आदित्य डबास, डिप्टी डायरेक्टर, एग्रीकल्चर
कृषि विभाग ने खेतों में पराली जलाने वाले 181 किसानों की लिस्ट भेजी है। खेतों में पराली जलाने वालों से जुर्माना वसूल किया जाएगा। यदि वे जुर्माना नहीं देेते हैं तो पर्यावरण कोर्ट में केस दायर किया जाएगा। किसानों से जुर्माना वसूल करने के लिए तहसीलदार को लेटर लिख दिया गया है।
संजीव कुमार, रीजनल आफिसर, प्रदूषण विभाग।
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स्मॉग का कहर सामने आने के बाद सरकार का रुख कड़ा हुआ तो जिला स्तर पर पराली को आग लगाने वालों पर कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया गया। लेकिन अब तक पराली को आग लगाने वाले किसी भी किसान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसका असर यह है कि खेतों में अब भी लगातार पराली को आग लगाई जा रही है, जिससे वायु प्रदूषण में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते सप्ताह कृषि व राजस्व विभाग द्वारा जिले मेें पराली जलाने वाले 294 किसानों को चिह्नित किया गया था। इस दौरान सबूत के तौर पर वीडियोग्राफी भी करवाई गई। लेकिन अब तक इनके खिलाफ काई कार्रवाई नहीं की गई है। उधर, खेतों में अब भी पराली को जलाया जा रहा है।
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कार्रवाई होने तक खेतों में जला दी जाएगी पराली-
कृषि विभाग के मुताबिक जिले में इस बार 71 हजार हेक्टेयर में धान की बिजाई हुई थी। जिले में कृषि कार्य के लिए एक लाख 26 हजार हेक्टेयर जमीन है। खेतों में धान की कटाई लगभग हो चुकी है और किसान पराली को खेत से निकालने में जुटे हुए हैं। अब तक करीब 85 प्रतिशत खेतों से पराली निकल चुकी है। जिन खेतों में पराली बची हैं, उन्हें किसान आग जलाकर नष्ट कर रहे हैं। पराली को आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ यदि जल्द कार्रवाई हो जाती तो इससे दूसरे किसान पराली को आग लगाने में परहेज करते। पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि जब तक प्रशासन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में लाएगा, तब तक सभी खेतों में पराली आग के हवाले हो जाएगी।
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खेतों में पराली जलाना गैर कानूनी है। कृषि विभाग ने खेतों में पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित कर इसकी रिपोर्ट प्रदूषण विभाग को भेज दी है। नियमानुसार इनके खिलाफ प्रदूषण विभाग ही आगामी कार्रवाई करेगा।
-डॉ आदित्य डबास, डिप्टी डायरेक्टर, एग्रीकल्चर
कृषि विभाग ने खेतों में पराली जलाने वाले 181 किसानों की लिस्ट भेजी है। खेतों में पराली जलाने वालों से जुर्माना वसूल किया जाएगा। यदि वे जुर्माना नहीं देेते हैं तो पर्यावरण कोर्ट में केस दायर किया जाएगा। किसानों से जुर्माना वसूल करने के लिए तहसीलदार को लेटर लिख दिया गया है।
संजीव कुमार, रीजनल आफिसर, प्रदूषण विभाग।