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मलिकपुर बांगर में पंचायती भूमि से काटे खैर के पेड़
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Sun, 18 Dec 2016 12:19 AM IST
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ब्लॉक छछरौली के गांव मलिकपुर बांगर की पंचायती भूमि से किसी ने करीब सौ से अधिक खैर के पेड़ काट लिए। इस संबंध में पंचायत द्वारा प्रस्ताव पास कर बीडीओ को सौ पेड़ काटे जाने की शिकायत दी गई। किंतु ग्रामीणों का आरोप है कि चोरी से काटे गए पेड़ों की संख्या ज्यादा है व ये एक रात में नहीं बल्कि कई रोज से रात में काटे जा रहे थे। पंचायत द्वारा इसकी शिकायत देने तक पूरे पंचायती जंगल से खैर काट जा चुका था।
बता दें कि छछरौली व खिजराबाद क्षेत्र में खैर तस्कर सक्रिय हैं और वह जंगल ही नहीं पंचायती भूमि से भी चोरी से खैर के पेड़ काटने में परहेज नहीं कर रहे हैं। खैर की लकड़ी की कीमत करीब सात हजार रुपये प्रति क्विंटल है और एक पेड़ से लगभग तीन क्विंटल लकड़ी निकल आती है। प्रतिदिन खैर तस्कर कहीं न कहीं से खैर की लकड़ी को काट कर तस्करी कर रहे हैं। इसको लेकर वन विभाग की ओर से भी शिकंजा कसा जा रहा है, बावजूद इसके खैर तस्करी पर अंकुश नहीं लग रहा है। मलिकपुर बांगर से पंचायती भूमि से इतने अधिक पेड़ों के काटे जाने से हर कोई हैरान है। ग्रामीणों ने माने तो पंचायती भूमि से काटे गए पेड़ों की संख्या सौ से अधिक है, किंतु पंचायत की ओर से करीब सौ पेड़ों के चोरी से काटे जाने की ही शिकायत दी गई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि जब वह खेतों में रात के वक्त फसल में पानी देते हैं तो जंगल से लकड़ी कटने की आवाजें आती हैं व इतने अधिक पेड़ों का कटना एक रात का काम नहीं है। पंचायत को इसकी भनक तब लगी, जब लगभग पूरे पंचायती जंगल से खैर काटा जा चुका था। उधर, वन विभाग द्वारा किसी भी खैर की जड़ पर डीआर रिपोर्ट नहीं बनाई गई। जबकि नियमानुसार यदि जंगल या सेक्शन चार के तहत पेड़ चोरी से काटे लिए जाते हैं तो वन विभाग द्वारा एक डैमेज रिपोर्ट बनाई जाती है। लेकिन पेड़ों पर वन विभाग ने अपना नंबर अंकित नहीं किया और पिछले कुछ माह से कटे हुए पेड़ों की जड पर भी विभाग द्वारा नंबर अंकित नहीं किया गया।
मामले की जानकारी नहीं है। फिर भी वह कर्मचारियों को मौके पर भेजकर जांच कराएंगे।
एमपी शर्मा, संरक्षक, वन विभाग।
पंचायती जमीन से किसी ने चोरी से खैर के पेड़ काटे लिए, जिनकी संख्या लगभग सौ है। इस बारे में पंचायत ने प्रस्ताव पास कर बीडीओ को शिकायत दे दी गई है।
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राजकुमार, सरपंच, मलिकपुर बांगर।
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बता दें कि छछरौली व खिजराबाद क्षेत्र में खैर तस्कर सक्रिय हैं और वह जंगल ही नहीं पंचायती भूमि से भी चोरी से खैर के पेड़ काटने में परहेज नहीं कर रहे हैं। खैर की लकड़ी की कीमत करीब सात हजार रुपये प्रति क्विंटल है और एक पेड़ से लगभग तीन क्विंटल लकड़ी निकल आती है। प्रतिदिन खैर तस्कर कहीं न कहीं से खैर की लकड़ी को काट कर तस्करी कर रहे हैं। इसको लेकर वन विभाग की ओर से भी शिकंजा कसा जा रहा है, बावजूद इसके खैर तस्करी पर अंकुश नहीं लग रहा है। मलिकपुर बांगर से पंचायती भूमि से इतने अधिक पेड़ों के काटे जाने से हर कोई हैरान है। ग्रामीणों ने माने तो पंचायती भूमि से काटे गए पेड़ों की संख्या सौ से अधिक है, किंतु पंचायत की ओर से करीब सौ पेड़ों के चोरी से काटे जाने की ही शिकायत दी गई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि जब वह खेतों में रात के वक्त फसल में पानी देते हैं तो जंगल से लकड़ी कटने की आवाजें आती हैं व इतने अधिक पेड़ों का कटना एक रात का काम नहीं है। पंचायत को इसकी भनक तब लगी, जब लगभग पूरे पंचायती जंगल से खैर काटा जा चुका था। उधर, वन विभाग द्वारा किसी भी खैर की जड़ पर डीआर रिपोर्ट नहीं बनाई गई। जबकि नियमानुसार यदि जंगल या सेक्शन चार के तहत पेड़ चोरी से काटे लिए जाते हैं तो वन विभाग द्वारा एक डैमेज रिपोर्ट बनाई जाती है। लेकिन पेड़ों पर वन विभाग ने अपना नंबर अंकित नहीं किया और पिछले कुछ माह से कटे हुए पेड़ों की जड पर भी विभाग द्वारा नंबर अंकित नहीं किया गया।
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मामले की जानकारी नहीं है। फिर भी वह कर्मचारियों को मौके पर भेजकर जांच कराएंगे।
एमपी शर्मा, संरक्षक, वन विभाग।
पंचायती जमीन से किसी ने चोरी से खैर के पेड़ काटे लिए, जिनकी संख्या लगभग सौ है। इस बारे में पंचायत ने प्रस्ताव पास कर बीडीओ को शिकायत दे दी गई है।
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राजकुमार, सरपंच, मलिकपुर बांगर।